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    Adulteration In Cheese: मिलावटी पनीर के बाद मिठाई की दुकान पर दो लाख का जुर्माना, 30 दिन में जमा करना होगा फाइन

    Updated: Mon, 12 May 2025 03:20 PM (IST)

    मिठाई की दुकान से लिए गए पनीर के नमूने की जांच में मिलावट मिली। खाद्य सुरक्षा विभाग ने विक्रेता पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया। न्यायालय ने आदेश दिया है कि जुर्माना एक महीने के भीतर राजकोष में जमा किया जाए अन्यथा भू राजस्व के रूप में वसूली की जाएगी। यह मामला पिछले साल अगस्त में बरखेड़ा कस्बे में आदर्श मिष्ठान भंडार पर हुई जाँच के दौरान सामने आया।

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    Pilibhit News: प्रस्तुतीकरण के लिए सांकेतिक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।

    जागरण संवाददाता, पीलीभीत। Pilibhit News: मिठाई की दुकान से लिया गया पनीर का नमूना परीक्षण में फेल हो गया। इस मामले में न्यायालय ने विक्रेता पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना की धनराशि एक माह के भीतर राजकोष में जमा कराने के आदेश दिए हैं।

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    खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पिछले साल 13 अगस्त को बरखेड़ा कस्बे में गाजीपुर कुंडा चौराहा स्थित आदर्श मिष्ठान भंडार की दुकान की निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान के मालिक सुमित कुमार उपस्थित मिले। दुकान में विभिन्न प्रकार की मिठाइयों के साथ ही विक्रय के लिए लगभग सात किग्राम पनीर का भंडारण पाया गया।

    मिलावट का संदेह होने पर टीम ने पनीर का नमूना लेकर सील किया। इस नमूना को परीक्षण के लिए खाद्य विश्लेषक लखनऊ को भेजा गया। खाद्य विश्लेषक ने परीक्षण के उपरांत अपनी रिपोर्ट प्रेषित की। जिसमें कहा गया कि पनीर के नमूना में वसा की मात्रा निर्धारित 50 प्रतिशत से कम है।

    न्यायालय में वाद किया दायर

    ऐसे में नमूना मानक अधिनियम के तहत सब स्टैंडर्ड है। इस रिपोर्ट के आधार पर खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से अपर जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) के न्यायालय में वाद दायर किया गया। न्यायालय की ओर से प्रतिष्ठान के मालिक को नोटिस जारी किया गया। प्रतिष्ठान का मालिक न्यायालय में उपस्थित हुआ लेकिन कोई आपत्ति न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की।

    दो लाख का लगाया जुर्माना

    इसके बाद न्यायालय ने मामले की सुनवाई के उपरांत प्रतिष्ठान के मालिक पर दो लाख रुपये जुर्माना लगाया। साथ ही जुर्माना की धनराशि एक माह के भीतर राजकोष में जमा कराने का आदेश दिया। निर्धारित अवधि तक जुर्माना की धनराशि राजकोष में जमा नहीं होने पर बीसलपुर के तहसीलदार को भू राजस्व की भांति इसकी वसूली कराने के लिए कहा गया।

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