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    नमोशूद्र का मामला फिर केंद्र के पाले में

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    Updated: Sat, 03 Sep 2016 12:59 AM (IST)

    जागरण संवाददाता, पीलीभीत : देश के विभाजन के उपरांत शरणार्थी के तौर पर यहां आकर बसने वाले बंगाली समाज

    जागरण संवाददाता, पीलीभीत : देश के विभाजन के उपरांत शरणार्थी के तौर पर यहां आकर बसने वाले बंगाली समाज के नमोशूद्र जाति के लोगों को अभी तक अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं मिल सका। हालांकि पश्चिम बंगाल में नमोशूद्र अनुसूचित जातियों में पहले से ही शामिल हैं। प्रदेश की सपा सरकार ने नमोशूद्र को अनुसूचित जातियों में शामिल करने की संस्तुति के साथ केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर इस मुद्दे पर भाजपा को घेरने की कोशिश की है।

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    देश के बंटवारे के बाद बड़ी संख्या में बंगाली समाज के लोगों को विस्थापित होना पड़ा। उस समय काफी संख्या में बंगाली समाज के लोग यहां भी आए। उन लोगों को सरकार ने पांच-पांच एकड़ जमीन देकर इस जिले के विभिन्न स्थानों पर बसाया। इसके कई साल बाद अनेक बंग्लादेशी शरणार्थी परिवार यहां पहुंचे। पहले आने वालों को तो नागरिकता मिल गई लेकिन बाद में आने वाले बंगालियों को अभी तक नागरिकता नहीं मिल सकी है। बंगाली समाज के लोगों ने सैकड़ों परिवार नमोशूद्र जाति हैं। इन्हें पश्चिम बंगाल में तो अनुसूचित जाति का दर्जा हासिल है लेकिन उप्र में अभी तक नहीं मिला है। गत दिवस यह मामला खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री हेमराज वर्मा ने मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया। तब मुख्यमंत्री ने उन्हें बताया कि राज्य सरकार अपनी संस्तुति के साथ नमोशूद्र को अनुसूचित जातियों में शामिल करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज चुकी है। साथ ही वंचित बंगाली समाज के लोगों को नागरिकता दिलाने का भी केंद्र सरकार से आग्रह किया है। इस पर राज्यमंत्री ने मुख्यमंत्री से केंद्र सरकार को स्मरण पत्र भेजने का अनुरोध किया। जिन बंगाली लोगों को सरकार से पांच-पांच एकड़ भूमि मिली है। उस भूमि पर मालिकाना हक दिए जाने की मांग उठाते हुए राज्यमंत्री ने राजस्व मंत्री के साथ ही मुख्यमंत्री को भी पत्र दिया है। इस पर जल्द निर्णय लेने की बात कही गई। उधर, यहां नमोशूद्र को केंद्र सरकार से भले ही अनुसूचित जाति की मान्यता न मिली लेकिन छात्रवृत्ति के लिए इस जाति के विद्यार्थियों को पात्र मान लिया है। नमोशूद्र का प्रमाणपत्र ऑनलाइन के बजाय मैनुअल ही जारी हो रहे हैं। अब कालेजों में इन बच्चों से कहा जा रहा है कि ऑनलाइन जारी जाति प्रमाणपत्र ही मान्य हैं। हालांकि एसडीएम (सदर) की ओर से इस आशय का आदेश पहले ही जारी हो चुका है कि सिर्फ नमोशूद्र विद्यार्थियों के लिए मैनुअल जाति प्रमाणपत्र छात्रवृत्ति के लिए मान्य हैं। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बंगाली समाज के वंचित लोगों को नागरिकता एवं नमोशूद्र को अनुसूचित जाति में शामिल करने की केंद्र सरकार से पैरवी करके सपा ने भाजपा को घेरने की कोशिशें तेज कर दी हैं।