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नोएडा प्राधिकरण ने स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के 62 सबलीज धारकों को जारी किया नोटिस, अभी भी 11,642 करोड़ रुपये बकाया 

Published: Wed, 15 Oct 2025 03:20 PM (IST)

नोएडा प्राधिकरण ने स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के 62 सबलीज धारकों को बकाया राशि के लिए नोटिस जारी किए, जिसके बाद ...और पढ़ें

नोएडा प्राधिकरण ने स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के 62 सबलीज धारकों को बकाया राशि के लिए नोटिस जारी किए

नोएडा प्राधिकरण ने स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के 62 सबलीज धारकों को बकाया राशि के लिए नोटिस जारी किए

HighLights

  1. 62 सबलीज धारकों को नोटिस जारी

  2. सबलीज धारकों ने 319 करोड़ जमा किए

  3. मुख्य डेवलपर्स पर 11,642 करोड़ बकाया

जागरण संवाददाता, नोएडा। प्राधिकरण ने स्पोर्ट्स सिटी परियोजना से जुड़े 81 सबलीज धारकों में से 62 को बकाया राशि जमा करने के लिए नोटिस जारी किए थे। ये सबलीज सेक्टर 78, 79, 150 और 152 में हैं। इसमें से सबलीज धारकों ने 319 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं, जबकि स्पोर्ट्स सिटी के चार मुख्य डेवलपर्स पर लगभग 11,642 करोड़ रुपये बकाया हैं।

यह नोटिस इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फरवरी में दिए गए आदेश के बाद जारी किया गया था, जिसमें स्पोर्ट्स सिटी परियोजना की सीबीआई और ईडी से जांच कराने का आदेश दिया गया था।

नोटिस जारी होने के बाद, सबलीज धारकों की कंसोर्टियम कंपनी के सदस्यों, कंटेंड बिल्डर्स (140 करोड़ रुपये), ब्रिक राइज डेवलपर्स (89 करोड़ रुपये), ऐस इंफ्रासिटी डेवलपर्स (12 करोड़ रुपये) और स्टार लैंड क्राफ्ट (80 करोड़ रुपये) ने आंशिक भुगतान कर दिया है।

प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, सेक्टर 150 स्थित लॉजिक्स इंफ्रा डेवलपर्स पर ₹4,082 करोड़ और लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन्स पर ₹4,177 करोड़ बकाया है, जबकि सेक्टर 78-79 में स्पोर्ट्स सिटी विकसित करने वाली ज़ानाडू एस्टेट पर ₹635 करोड़ बकाया है।

सेक्टर 152 परियोजना के डेवलपर एटीएस होम्स पर ₹2,745 करोड़ बकाया है। स्पोर्ट्स सिटी परियोजना 2008 के राष्ट्रमंडल खेलों के आसपास शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य आवासीय और व्यावसायिक स्थानों के साथ खेल सुविधाओं को मिलाकर एक एकीकृत स्पोर्ट्स टाउनशिप विकसित करना था। परियोजना के लिए 70 प्रतिशत क्षेत्र खेल गतिविधियों के लिए और 30 प्रतिशत आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के लिए आरक्षित होना आवश्यक था।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने फरवरी के आदेश में, प्राधिकरण अधिकारियों और डेवलपर्स के बीच मिलीभगत का हवाला देते हुए, सीबीआई और ईडी को स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं के भूमि आवंटन और विकास में कथित अनियमितताओं की जांच करने का निर्देश दिया था। इसके बाद, ज़ानाडू एस्टेट, लॉजिक्स इंफ्रा डेवलपर्स और लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं।

कई डेवलपर्स ने राहत पाने के लिए विभिन्न अदालतों और न्यायाधिकरणों का दरवाजा खटखटाया है। वर्तमान में, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) और राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में नौ याचिकाएँ लंबित हैं, जबकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 25 मामले लंबित हैं।

इसके अतिरिक्त, सर्वोच्च न्यायालय में 26 विशेष अनुमति याचिकाएँ (एसएलपी) दायर की गई हैं। न्यायालय ने कार्यवाही जारी रखने की अनुमति तो दी है, लेकिन प्राधिकरण को डेवलपर्स के खिलाफ कोई भी "दंडात्मक कार्रवाई" करने से रोक दिया है।