नोएडा में 21% वेतन वृद्धि के बाद भी कामगारों की मनमानी, उद्योगों को 5000 करोड़ का नुकसान
नोएडा की औद्योगिक इकाइयों को कामगारों की मनमानी के कारण तीन दिनों में पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक का ...और पढ़ें
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सोमवार को हुए उपद्रव के बाद बुधवार को जब फैक्ट्री खुली तो नोएडा फेज दो स्थित फैक्ट्री में काम करने जाते कामगार। सौरभ राय
HighLights
70 प्रतिशत इकाइयां खुली
70 प्रतिशत कामगार भी पहुंचे
कामकाज 20 प्रतिशत भी नहीं हुआ
कुंदन तिवारी, नोएडा। औद्योगिक नगरी में सरकार के निर्देश पालन करने में कामगारों का वेतन 21 प्रतिशत बढ़ा दिया गया। सरकार के इस फैसले के बाद भी कामगारों अभी संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। उनकी मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है।
70 प्रतिशत इकाइयां खुली, कामकाज 20 प्रतिशत भी नहीं हुआ
बुधवार को दो दिन से बंद चल रही 11098 औद्योगिक इकाइयां का संचालन शुरू हुआ। दहशत के बीच सिर्फ 70 प्रतिशत इकाइयों (7769) को खोला गया। इकाइयों में कामकाज के लिए कामगार पहुंचे, जिनकी संख्या 70 प्रतिशत ही रही, लेकिन इन कामगारों ने इकाइयों के अंदर 20 प्रतिशत भी काम काज नहीं किया।
इस कारण तीसरे दिन भी औद्योगिक सेक्टरों में बंद सा माहौल रहा। तीनों दिन का मिलाकर औद्योगिक सेक्टरों में करीब पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
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नोएडा सेक्टर 84 स्थित रिचाको एक्सपोर्टस में कामगारों से बात करतीं जिलाधिकारी मेधा रूपम। सौ. सूचना विभाग
जेएंडएस वायर लिंक्स निदेशक सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि कामगारों के उग्र प्रदर्शन के बाद जिस प्रकार से शासन प्रशासन ने एकतरफा फैसला लेकर 21 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी की है। इससे कामगारों का मन बढ़ गया है। इससे औद्योगिक इकाइयों की मुसीबत बढ़ रही है।
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बुधवार को कामगारों ने कामकाज नहीं किया, उल्टा प्रबंधन पर दबाव बनाया कि सरकार ने जो 21 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी की है, उसके हिसाब से अब उनका मासिक वेतन कितना हो गया है। इसको एक शपथ पत्र के रूप में उपलब्ध कराया जाए।
प्रबंधन और कामगार के बीच पूरे दिन रही गहमा गहमी
कामगारों का सीधा कहना था कि शपथ पत्र फैक्ट्री के लेटर पैड पर मोहर लगी होनी चाहिए। प्रत्येक कामगार के नाम से अलग-अलग शपथ पत्र दिया जाए। जब तक यह कार्य नहीं किया जाएगा, तब तक उत्पादन कार्य में एक भी कामगार अपना सहयोग नहीं देगा।
इस शर्त को लेकर प्रबंधन और कामगार के बीच पूरे दिन गहमा गहमी रही, मजबूरन समय से पहले उत्पादन इकाइयों को बंद करना पड़ा। इससे समस्या से उद्यमियों ने औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारी से संपर्क कर नई समस्या से अवगत कराया।
आनन फानन में 21 प्रतिशत का आर्थिक बोझ उद्यमी पर डाल दिया, उद्यमी कैसे अपना कारोबार संचालित कर सकेगा। रोजगार उपलब्ध कराए, उनकी इकाइयों में तोडफोड़ भी हो, वेतन का दबाव भी उसी पर बनाया जाए। उसके बाद भी कामगार काम न करे, ऐसी स्थित में उद्यमी बंदी के अलावा क्या कर सकता है।
-विपिन कुमार मल्हन, अध्यक्ष, नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन
वेतन बढ़ोतरी के नोटिस व बैनर इकाइयों के बाहर व अंदर चस्पा है। कामगारों से इस प्रकरण में विस्तार से बातचीत जारी है, उम्मीद है कि जल्द कामकाज की बहाली होगी।
-ललित ठुकराल, चेयरमैन, नोएडा एपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर
वेतन बढोतरी ही केवल बिकल्प नहीं है, सरकार को कामगारों को मनमानी पर सख्त से निपटना होगा। वेतन के साथ बोनस, ईएसआइसी, पीएफ, छुट्टी के साथ अन्य अलाउंस भी बढ़ेंगे, लेकिन कामगार यह समझने को तैयार नहीं है, इकाइयां बंद हो जाएंगी।
-राजीव बंसल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
