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'अब 8 घंटे से ज्यादा काम की मिले छूट' MSME ने योगी सरकार के सामने रखीं 6 शर्तें, वरना बढ़ जाएगी उत्पादों की लागत

Published: Wed, 15 Apr 2026 08:15 PM (IST)

मेरठ के एमएसएमई न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने के सरकारी फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनका दावा है कि श्रमिकों की ...और पढ़ें

(Photo Source - AI Generated)

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HighLights

  1. मेरठ एमएसएमई ने न्यूनतम वेतन वृद्धि पर जताया विरोध।

  2. श्रमिकों की कमी के कारण पहले से ही अधिक वेतन भुगतान।

  3. उत्पाद लागत में 2-3% वृद्धि, सरकारी सहायता की मांग।

जागरण संवाददाता, मेरठ। नोएडा, फरीदाबाद में हुए श्रमिक आंदोलन के बाद प्रदेश के सभी जिलों में श्रमिकों का वेतनमान बढ़ा दिया गया है, जिसका एमएसएमई विरोध कर रहा है। औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारी व प्रमुख उद्यमियों का दावा है कि यहां तो पहले से ही न्यूनतम मजदूरी से अधिक वेतनमान दे रहे हैं।

ऐसा इसलिए कि विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से होने के कारण प्रवासी श्रमिक अब छोटे शहरों में कम आते हैं। या तो वे बड़े शहरों में काम करते हैं या फिर अपने मूल निवास के आसपास की कामकाज तलाशने लगे हैं। अब अगर नए सिरे से फिर से बढ़ाना पड़ेगा तो इसका असर वस्तुओं की कीमत पर पड़ेगा। बहरहाल औद्योगिक संगठनों की ओर से इस बढ़ोतरी का विरोध करते हुए अब विभिन्न मांगों का पत्र सरकार को भेजा जाएगा।

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन मेरठ चैप्टर के सचिव गौरव जैन का कहना है कि मेरठ में न्यूनतम मजदूरी से अधिक वेतनमान पहले से ही दिया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है श्रमिकों का न मिलना। अधिकांश उद्योगों के बाहर पोस्टर चस्पा है जिसमें लिखा है श्रमिकों व अन्य स्टाफ की आवश्यकता है।

दरअसल, जिन क्षेत्रों में रोजगार के साधन नहीं थे या कम वेतन मिलता था उन क्षेत्रों के श्रमिक आते थे। अब परिस्थितियां बदल गई हैं, इसलिए अब प्रवासी श्रमिकों की संख्या घटी है। वे या तो दिल्ली, नोएडा जैसे शहरों में चले जाते हैं या फिर स्थानीय स्तर पर ही रोजगार तलाशते हैं।

इस स्थिति में स्थानीय श्रमिकों को अधिक वेतन देकर काम कराना पड़ता है। अधिक वेतन देने के बाद भी श्रमिकों की अनुपस्थिति बड़ी समस्या बन रही है। सरकार को इसे वापस लेना चाहिए। परतापुर इंडस्ट्रियल एस्टेट मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष निपुण जैन कहते हैं कि भारी उद्याेगों व एमएसएमई के कार्य व्यवहार में अंतर है।

वहां सिर्फ प्रबंधक व एचआर तक ही सभी स्टाफ सीमित रहते हैं। यहां पर सीधे मालिक तक पहुंच रहती है। यहां पर संचालक स्वयं श्रमिकों के बीच में पहुंचकर निर्देश देते हैं। व्यक्तिगत आवश्यकताओं पर भी उद्योगों के मालिक समय-समय पर काम आते हैं।

कारपोरेट और एमएसएमई में उत्पाद लागत और लाभ में भी बहुत बड़ा अंतर है। साईंपुरम औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन के उपाध्यक्ष संजय गुप्ता का कहना है कि मेरठ में उद्योगों में श्रमिकों का वेतनमान पहले से ही 15 हजार से 25 हजार तक है। जब श्रमिकों की समस्या से सब जूझ रहे हैं तो इसलिए अधिक वेतन भी देते हैं। ऐसे में यहां समस्या नहीं आएगी।

दो से तीन प्रतिशत बढ़ सकती है उत्पादाें की कीमत

आइआइए मेरठ के पूर्व सचिव विभोर अग्रवाल बताते हैं कि किसी भी उद्याेग में तैयार उत्पाद की कीमत में 10 से 15 प्रतिशत तक लेबर कास्ट शामिल होती है। अब अचानक से वेतन बढ़ोतरी की बात सामने आई है तो इससे उत्पाद लागत पर असर पड़ेगा। उद्योग पहले से ही कच्चा माल की अधिक कीमत चुका रहे हैं।

एलपीजी नहीं मिल रही है और पीएनजी का शत-प्रतिशत उपयोग करने पर अर्थदंड देना पड़ रहा है। निर्यात घट गया है। ऐसे में अब वेतनमान बढ़ाने का जो बोझ बढ़ेगा उसकी भरपाई करने के लिए उत्पादों की कीमत में दो से तीन प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।

काम के घंटे और उत्पादकता आधार पर वेतन देने की रखेंगे मांग

-एमएसएमई की ओर से मांग रखी जाएगी कि एमएसएमई और भारी उद्योगों के श्रमिकों के वेतनमान व सुविधाओं की नियम-शर्तें अलग होनी चाहिए।
-वेतनमान देने का नियम उत्पादकता के आधार पर किया जाए। इसे इंसेंटिव से जोड़ा जाए।
-अनुपस्थिति को देखते हुए कम से कम 240 दिन की उपस्थिति पर ही वेतन देने का नियम रखा जाए।
-आठ घंटे से अधिक कार्य कराने की छूट दी जाए।
-वेतनमान बढ़ाने से वित्तीय स्थिति पर असर पड़ेगा इसलिए सरकार अलग-अलग रूपों में सहायता करे। जिसमें जीएसटी रिफंड समय पर कराएं। ईज आफ डूईंग बिजनेस में आसानी लाएं। जीएसटी की श्रेणी में आने वाली समस्या का निस्तारण किया जाए।
-एनसीआर के कारण मेरठ में औद्योगिक इकाइयों का संचालन चुनौतीपूर्ण है, इसलिए पीएनजी अपनाने के लिए सब्सिडी दी जाए।

मेरठ में 2445 रुपये बढ़ेगा कुशल श्रमिकों का वेतन 

औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति ने अब प्रदेशभर के जिलों को तीन श्रेणियों में बांटते हुए अकुशल, अर्धकुशल व कुशल श्रमिकों के लिए मूल वेतन व महंगाई भत्ता सहित मजदूरी तय की है। ऐसे में अब कुल नौ तरह की मासिक अंतरिम दरें निर्धारित की गई हैं। मार्च तक प्रदेशभर में एक समान मजदूरी तय थी, जिसमें अब महंगाई भत्ता भी जोड़ दिया गया है।

श्रम विभाग ने एक अप्रैल से महंगाई भत्ता जोड़ते हुए 292 से 360 रुपये की बढ़ोतरी की है। नोएडा में उग्र प्रदर्शन के बाद सरकार की ओर से गठित समिति द्वारा नए सिरे से तय की गईं। इस तरह से मेरठ सहित अन्य नगर निगम वाले जिलों में अकुशल श्रमिकों की मजदूरी में 1985 रुपये, अर्धकुशल में 2183 रुपये और कुशल श्रमिकों में 2445 रुपये की वृद्धि होगी। श्रमिकों की मार्च से लगभग 15 प्रतिशत तक की मजदूरी बढ़ जाएगी।

मेरठ में इस तरह से लागू होगा वेतनमान

श्रेणी मूल मजदूरी (₹) महंगाई भत्ता (₹) कुल वेतन प्रतिमाह (₹)
अकुशल 12,241 765 13,006
अर्द्धकुशल 13,464 842 14,306
कुशल 15,082 943 16,025

नोट : एक अप्रैल से प्रभावी अंतरिम वेतन की दरें (सभी आंकड़े रुपये में)