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    Yadav Singh Corruption Case: CBI के रडार पर नोएडा से रांची तक की कंपनियां

    By Mangal YadavEdited By:
    Updated: Tue, 11 Feb 2020 07:23 PM (IST)

    सीबीआइ के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी टेंडर घोटाले में आरोपी नोएडा प्राधिकरण के पूर्व इंजीनियर इन चीफ यादव सिंह पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है

    Yadav Singh Corruption Case: CBI के रडार पर नोएडा से रांची तक की कंपनियां

    नोएडा [कुंदन तिवारी]। यादव सिंह पर अंडरग्राउंड केबलिंग के 954.38 करोड़ रुपये का मुकदमा दर्ज है, लेकिन इसके साथ-साथ सीबीआइ ने यादव सिंह के खिलाफ नोएडा स्टेडियम में क्रिकेट स्टेडियम घोटाला और अन्य टेंडर का मुकदमा दर्ज किया था। इसमें प्राधिकरण के कुछ अफसरों व कर्मचारियों के अलावा कई निजी कंपनियों के निदेशकों को भी अभियुक्त बनाया गया था।

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    अभियुक्तों की तलाश में सीबीआइ ने नोएडा, दिल्ली व रांची में आठ स्थानों पर छापा भी मारा था। यह मुकदमा नियमों को दरकिनार कर 116.39 करोड़ रुपये के टेंडर बांट दिए जाने से संबंधित है, जिसमें नोएडा प्राधिकरण को भारी नुकसान हुआ और ठेकेदारों व फर्मों को फायदा हुआ। सीबीआइ ने 17 जनवरी 2018 को एफआइआर दर्ज कर कर यादव सिंह की पूरी साठगांठ उजागर कर दी थी। इसी मामले पर पूछताछ के लिए सीबीआइ ने सोमवार को दोबारा गिरफ्तार किया है।

    टेंडर के समय यादव सिंह नोएडा प्राधिकरण में चीफ मेंटीनेंस आफिसर के पद पर तैनात थे। इस मामले में सीबीआइ ने आइपीसी की धारा 120 बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13 (2), 13(1) (बी) और 13(1) (डी) के तहत दर्ज किया है। इसमें मेसर्स गुल इंजीनियर्स कंपनी के प्रोपराइटर जावेद अहमद, मेसर्स एमएसपी टेक्नालॉजी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक साई राजू, मनीष कुमार व प्रेम प्रदीप, मेसर्स अबू इंफ्राकान प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक कुमार सौरव व प्रेम प्रदीप, मेसर्स संजय इलेक्टिकल्स के प्रोपराइटर संजय कुमार गुप्ता तथा मेसर्स शाकम्बरी प्रोजेक्ट्स रांची के प्रोपराइटर संजय कुमार शर्मा के अलावा नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों व कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है।

    संपत्ति की जांच कर चुकी सीबीआइ

    सीबीआइ ने एक अप्रैल 2004 से चार अगस्त 2015 तक की अवधि में नोएडा के पूर्व इंजीनियर इन चीफ इंजीनियर यादव सिंह एवं उनके परिवार के सभी सदस्यों की संपत्ति की जांच की थी।

    सीबीआइ को इस जांच में 23,15, 41, 514 रुपये की अघोषित परिसंपत्तियों का पता चला था। सूत्रों का कहना है कि आरोपपत्र के मुताबिक यादव सिंह के परिवार की आय के सभी ज्ञात स्रोतों के मुताबिक उक्त अवधि में चार करोड़ 51 लाख 64 हजार 232 रुपये की आय होनी चाहिए थी लेकिन जांच में आय व संपत्ति ज्ञात स्नोतों से 512.66 फीसदी अधिक पाई गई।

    मुकदमे में यादव सिंह, उसकी पत्नी कुसुमलता, बेटी गरिमा भूषण व करुणा सिंह, बेटे सन्नी, बहू श्रेष्ठा सिंह, चार्टर्ड अकाउंटेंट मोहन लाल राठी आरोपित हैं। सीबीआइ के लोक अभियोजक ने बताया कि 30 जुलाई, 2015 को नोएडा प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह और उसके परिवार के सदस्य पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था।

    यादव सिंह का पूरा परिवार ईडी के निशाने पर

    सीबीआइ के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी टेंडर घोटाले में आरोपी नोएडा प्राधिकरण के पूर्व इंजीनियर इन चीफ यादव सिंह पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डिंग एक्ट 2002 (पीएमएलए) के तहत भ्रष्टाचार के मामले में यादव सिंह और उसके परिवार से संबंधित 89 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है।

    ईडी के मुताबिक पीएमएलए के तहत उसने यादव सिंह और उसके परिवार की आवासीय और वाणिज्यिक संपत्ति, कृषि भूमि और बैंकों में जमा धनराशि समेत कुल मिलाकर 89 लाख की संपत्ति जब्त की है। पीएमएलए 2002 के तहत जांच सीबीआई द्वारा यादव सिंह के खिलाफ दर्ज एक एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। यादव सिंह एवं उनके परिवार पर आय के अनुपात में 23 करोड़ 15 लाख रुपये कीमत की अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता सिंह पर भी इसमें संलिप्त रहने का गंभीर आरोप है।