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    ग्रेटर नोएडा में उद्योगों की बसावट की रफ्तार होगी तेज, 3000 से ज्यादा इंडस्ट्रियल प्लॉट आवंटित कर चुका है YEIDA

    Updated: Wed, 20 Aug 2025 10:03 AM (IST)

    यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए अधिकारियों को साप्ताहिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। यीडा ने 3000 से अधिक औद्योगिक भूखंड आवंटित किए हैं लेकिन केवल कुछ ही इकाइयां चालू हो पाई हैं। सीईओ राकेश कुमार सिंह ने औद्योगिक विकास में तेजी लाने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं और नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं।

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    ग्रेटर नोएडा शहर का दृश्य। फाइल फोटो सौजन्य- सोशल मीडिया

    जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में उद्योगों की बसावट की रफ्तार तेज करने के लिए अधिकारियों को हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट देनी होगी। आवंटित प्लॉटों के सापेक्ष मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन, स्वीकृति किए गए मानचित्र, क्रियाशील प्रमाण पत्र आदि की रिपोर्ट सीईओ के सामने रखी जाएगी।

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    तीन हजार से अधिक औद्योगिक प्लॉट आवंटित होने बावजूद अभी तक महज 15 औद्योगिक इकाईयां ही क्रियाशील हो पाई हैं। सीईओ औद्योगिक इकाई लगाने में आ रही अड़चनों की जानकारी लेने और उनका समाधान करने के लिए औद्योगिक आवंटियों के साथ बैठक कर रहे हैं।

    यमुना प्राधिकरण ने 2013 में पहली औद्योगिक प्लॉट योजना निकाली थी। तब से लेकर अब तक यीडा तीन हजार से अधिक औद्योगिक प्लॉट आवंटित कर चुका है। तकरीबन ढाई हजार आवंटियों ने प्लॉट की लीजडीड भी करा ली है, लेकिन मानचित्र स्वीकृत करने वाले आवंटियों की संख्या महज साढ़े चार सौ है।

    दो हजार आवंटी अभी भी ऐसे हैं जो लीजडीड कराने के बावजूद इकाई लगाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसकी वजह से यीडा के औद्योगिक सेक्टर वीरान पढ़े हैं। ढांचागत सुविधाओं को विकसित करने में खर्च हुए करोड़ों रुपये उपयोग न होने के कारण बर्बाद हो रहे हैं। रोजगार न होने के कारण यीडा के आवासीय सेक्टर भी खाली है।

    जिन लोगों ने निर्माण में देरी की वजह से लगने वाले जुर्माने के कारण मकान का निर्माण करा लिया है, वह भी रहने को तैयार नहीं हैं। अधिकतर मकानों में ताले लटके हैं। सीईओ राकेश कुमार सिंह ने औद्योगिक विभाग पर शिकंजा कसते हुए आवंटियों से निर्माण की कार्ययोजना मांगने और उनकी नियमित निगरानी के निर्देश के बाद अब हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट तलब की है।

    विभागीय अधिकारियों को सीईओ को बताना होगा कि स्पताह के दौरान कितने आवंटियों ने लीजडीड कराई, मानचित्र स्वीकृति के लिए कितने आवेदन हुए और कितने स्वीकृत हुए। कितनों का निर्माण कार्य शुरू हुआ आदि जानकारी देनी होगी। सीईओ का कहना है कि उद्योगों के शुरू होने से ही शहर की बसावट तेजी होगी। इसलिए उद्योगों की स्थापना पर खास जोर दिया जा रहा है।