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    नोएडा में ESIC डिस्पेंसरी में मरीजों की लंबी कतारें, डॉक्टरों की कमी के कारण बना दबाव

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 03:45 PM (IST)

    नोएडा सेक्टर 57 स्थित ईएसआईसी डिस्पेंसरी में मरीजों को घंटों लाइन में लगने की समस्या से जूझना पड़ रहा है। पर्ची और दवा के लिए केवल एक काउंटर होने से मरीजों को सुबह से ही इंतजार करना पड़ता है। डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों का दबाव बढ़ गया है जिससे इलाज में मुश्किल हो रही है। डिस्पेंसरी निदेशक ने इस मामले पर बात करने से इनकार कर दिया।

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    डिस्पेंसरी में मरीजों को घंटों लाइन में लगने की समस्या से जूझना पड़ रहा है। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, नोएडा। सेक्टर 57 स्थित ईएसआईसी डिस्पेंसरी में मरीजों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है। कतार में खड़े होने के कारण मरीजों में विवाद भी हो रहा है। पर्ची काउंटर पर कतार में खड़े साजिद ने बताया कि डिस्पेंसरी में पर्ची और दवा देने के लिए सिर्फ एक ही काउंटर खुला है, जिसके कारण घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है।

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    सुबह आठ बजे से कतार में खड़े होने के बाद एक से दो घंटे बाद नंबर आता है। अगर पर्ची बनवानी है तो डॉक्टर के केबिन के बाहर खड़ा रहना पड़ता है। मरीजों को इलाज के लिए लाइनों की सीढ़ियां पार करने में दिक्कत हो रही है। लेकिन जिम्मेदार लोग मरीजों की परेशानी पर खामोश हैं।

    बता दें कि डिस्पेंसरी में रोजाना 700 से 900 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। नियमानुसार एक डिस्पेंसरी में छह डॉक्टर होने चाहिए। लेकिन डिस्पेंसरी में सिर्फ चार डॉक्टर ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं। यह संख्या अक्सर घटकर तीन रह जाती है, ऐसे में मरीजों की अधिक संख्या डॉक्टरों का रक्तचाप बढ़ा रही है।

    डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें एक दिन में 100 से 150 मरीज़ों का इलाज करना पड़ता है। ऐसे में सभी मरीज़ों को इलाज देना मुश्किल हो रहा है। कई बार मरीज़ भीड़ देखकर लौट जाते हैं। डॉक्टरों की कमी के कारण मरीज़ों को सेक्टर 24 स्थित ईएसआई अस्पताल रेफर करना पड़ता है।

    मरीजों से बातचीत

    सुबह 8 बजे से लाइन में लगने के बाद एक घंटे बाद इलाज मिला। डिस्पेंसरी में दवा, पर्चा और इलाज की सुविधा पाने के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ता है।

    -दिगंबर झा, मरीज

    इलाज के लिए डिस्पेंसरी में कतार में खड़े रहने से बीमारी बढ़ती है। अगर पर्चा और दवा के लिए दो काउंटर हों, तो परेशान होने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

    -अजय पाल सिंह

    बेटी को तेज़ बुखार है। लेकिन हम इतनी देर से लाइन में लगे हैं, बच्ची की हालत बिगड़ती जा रही है। डिस्पेंसरी आने से बेहतर था कि प्राइवेट में इलाज करवा लेते।

    -रबीना, मरीज

    डिस्पेंसरी में डॉक्टरों की संख्या बढ़ानी चाहिए। कम से कम लोगों को इलाज तो मिल सकेगा। काउंटर पर कोई कर्मचारी नहीं है। दवाइयां बनाने में देरी हो रही है।

    -अक्षत सिंह, मरीज

    डिस्पेंसरी निदेशक डॉ. संगीता माथुर ने सेक्टर 57 स्थित डिस्पेंसरी में अव्यवस्था के बारे में बात करने के लिए फ़ोन किया। उन्होंने बात सुने बिना ही फ़ोन काट दिया।