धान के रेट ने बढ़ाई किसानों की टेंशन, मिडिल ईस्ट में तनाव से अन्नदाताओं को सता रहा ये डर
गौतमबुद्धनगर के जेवर में बारिश न होने और बिजली की समस्या के कारण किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं, जबकि पौध तैयार है। मौसम विभाग के दावों के बावजूद बारिश नहीं हो रही। ईरान और इजरायल के बीच तनाव के कारण बासमती चावल के निर्यात और कीमतों में गिरावट आई है, जिससे किसानों को उचित दाम न मिलने का डर है।

मनोज कुमार शर्मा, जेवर। देश के आधे से अधिक हिस्सों में बारिश की वजह से जन जीवन अस्त वयस्त हो रहा है तो नदियों का जल स्तर बढ़ता बढ़ने से बाढ़ का खतरा पैदा हो रहा है। दिल्ली एनसीआर से सटे गौतमबुद्धनगर के जेवर में अभी तक एक भी बारिश अच्छी नहीं हुई है। मौसम विभाग आए दिन बारिश की संभावना बताता है, लेकिन बारिश की बूंद भी जमीन तक नहीं आती जिसकों लेकर किसान मौसम विभाग के दावों पर भी विश्वास नहीं कर पा रहे हैं।
कब शुरू होती है धान की रोपाई
किसानों ने समय से धान की रोपाई करने के लिए उन्नत किस्म के धान की पौध खेतों में तैयार तो कर ली है। बिजली की आंख मिचौली को देखते हुए अभी रोपाई से हिचक रहे हैं। जेवर क्षेत्र में धान की उन्नत किस्म पीबी 1121,पीबी1718,पीबी1509,पीबी 1692 आदि बासमती के अलावा सरवती चावल की सबसे अधिक पैदावार होती है। इसकी पौध मई के अंत और जून के प्रथम सप्ताह से ही तैयार करनी शुरू कर दी जाती है जिससे 20 जून के बाद धान की रोपाई शुरू हो सके।
इस बार किसानों को समझ नहीं आ रहा कि धान की फसल की रोपाई करें या फिर अन्य फसल की बुवाई की जाएं। किसानों का मानना है कि अभी तक धान की फसलों की रोपाई भी शुरू नहीं हुई और जेवर में लो वोल्टेज व ट्रिपिंग की समस्या शुरू हो चुकी है। ऐसे में अगर फसल के समय बिजली की अघोषित कटौती होती है तो धान की सिंचाई नहीं हो पाएगी।
बासमती चावल के रेट में मंदी
अगर किसान डीजल पंप सेट से सिंचाई करेंगे तो धान की लागत काफी बढ़ जाएगी। दूसरा किसानों का मानना ज्यादातर चावल का मिडिल ईस्ट के देशों में निर्यात किया जाता है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर धान के निर्यात पर भी पर पड़ना लाजमी है। युद्ध शुरू होने के साथ ही बासमती चावल के रेटों में काफी मंदी देखी जा रही है।
ऐसे में अगर चावल मिडिल ईस्ट में निर्यात नहीं हो पाया तो किसानों को धान की उचित कीमत नहीं मिल पाने का डर सता रहा है। ऐसे में ज्यादातर किसान अभी बारिश और मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने का इंतजार कर रहे हैं। धान का बीज लाकर पौध भी तैयार कर ली है। लोग बता रहे हैं कि ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का सीधा असर चावल पड़ने वाला है।
प्रदेश में पैदा हाने वाली धान की उन्नत किस्मों का ज्यादातर मिडिल ईस्ट में ही निर्यात होता है। ऐसे में धान की रोपाई की जाए या अन्य फसलें बोई जाए अभी विचार कर रहे हैं। कुशलपाल सिंह पौध तैयार है। बारिश न होने से खेतों में पानी की व्यवस्था नहीं हो पा रही कुछ लोग बिजली के भरोसे रोपाई कर भी रहे है अगर ऐसी ही बिजली मिली तो किसानों के लिए फसल को पकाना मुश्किल हो जाएगा।
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