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    Happy Women’s Day: गहने बेचे, सूत काता… अनपढ़ मां ने पांच बच्चों को बनाया कामयाब; यूपी की 'सुपरमॉम' की कहानी

    मुजफ्फरनगर के गांव पटौली की अनपढ़ शाहिदा खातून ने अपने पति को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जिससे वे सुपरवाइजर बने। खुद सूत कताई कर दरी चादरें बनाकर पांचों बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई। सभी ने पीएचडी की और विभिन्न क्षेत्रों में सफलता पाई। शाहिदा शिक्षा को इतना महत्व देती थीं कि अखबार पर बैठने तक नहीं देती थीं। अब वे जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में सहयोग कर रही हैं।

    By Rohitash Verma Edited By: Aysha Sheikh Updated: Sat, 08 Mar 2025 06:11 PM (IST)
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    भोपा के गांव पटौली में शाहिदा खातून अपने बच्चों व पति के साथ : सौ. स्वजन

    संवाद सूत्र, भोपा (मुजफ्फरनगर)। क्षेत्र के गांव पटौली की अनपढ़ महिला ने जहां अपने पति को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और वह स्नातक के बाद शुगर मिल में सुपरवाइजर बन गए। वहीं सूत कताई कर दरी, चादरें बुनकर पांच बच्चों को पढ़ाया। मां की मेहनत से पांचों बच्चों ने उच्च शिक्षा प्राप्त की। वर्तमान में सभी विभिन्न क्षेत्रों में सफलता अर्जित कर रहे हैं। यह अनपढ़ महिला नारी सशक्तिकरण की मिसाल है।

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    विकास खंड मोरना क्षेत्र के गांव रहकड़ा निवासी वाहिद की बेटी शाहिदा खातून की शादी वर्ष 1979 में ग्राम पंचायत भोपा के मजरा गांव पटौली निवासी इकबाल अहमद से हुई थी। जिन्होंने कक्षा चार पास की थी। अनपढ़ पत्नी शाहिदा ने पति को पढ़ने के लिए प्रेरित किया और खुद रूई कपास लाकर सूत कताई कर दरी, चादर आदि बनाकर बेचने का काम किया।

    बीएससी करने बाद पति मोरना शुगर मिल में गन्ना सुपरवाईजर की नौकरी मिल गई। दंपत्ति के यहां बेटे मौहम्मद मुस्तफा, मौहम्मद मुर्तजा, डा. जावेद अख्तर, परवेज आलम व एक बेटी डा. फरजाना पैदा हुए। मां के मन में अपने बच्चों को तालीम दिलाने की इतनी इच्छा थी लेकिन गांव में स्कूल नहीं था तो उन्होंने तो पहले अपने बच्चों को पास के गांव मलपुरा में पढ़ने भेजा और उसके बाद भोपा और मुजफ्फरनगर कालेज में शिक्षा दिलाई, जिसके लिए अपने गहने तक बेचने पड़े।

    बेटा बेटी समेत पांचों को कराई पीएचडी

    बड़ा बेटे मौहम्मद मुस्तफा एमएड़ के बाद बीएड कालेज में अध्यापक है तथा पीएचडी कर रहे हैं। दूसरा बेटा मौहम्मद मुर्तजा ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एमटेक कर एनआईटी जालंधर से पीएचडी कर रहे हैं और वर्तमान में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय कैंपस मेरठ में असिस्टेंट प्रोफेसर है।

    तीसरा बेटा डा. जावेद अख्तर ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय से पीएचडी की है तथा वर्तमान में वहीं पर साइंटिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। वह जर्मनी, आस्ट्रेलिया एवं स्विटजरलैंड की यात्रा तथा व्याख्यान दे चुके हैं। बेटी डा. फरजाना ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से सीनियर प्रोफेसर वाई विमला जो कि वर्तमान में सहारनपुर विश्वविद्यालय की कुलपति हैं के मार्गदर्शन में पीएचडी की है।

    वह एमफिल में गोल्ड मैडलिस्ट हैं। सबसे छोटा बेटा परवेज आलम एनआईटी जालंधर से एमटेक कर वहीं से पीएचडी कर रहे हैं। शहिदा खातून के मन में पढ़ाई को इतनी अहमियत थी कि कभी भी बच्चों को अखबार के ऊपर बैठने नहीं देती थी।

    उनका कहना था कि इस पर तालीम लिखी होती है। उन्होंने अपने गांव और रिश्तेदारों के लिए योजना बना रखी है कि अगर कोई बच्चा पढ़ने चाहे तो इंटर तक उनका सारा खर्च वहन कर सकती है। दो साल पहले पति इकबाल अहमद की कैंसर के चलते मौत हो चुकी है।