मुजफ्फरनगर, जेएनएन। सपा खेमे से विस चुनाव का टिकट मांग रहे बड़े भाई गौरव स्वरूप और ब्राह्मण नेता राकेश शर्मा को भले ही विरासत की सियासत कर रहे सौरभ स्वरूप ने टिकट की रेस में पीछे छोड़ दिया, लेकिन उनकी राह भी आसान नहीं दिख रही। उनकी जंग घर के बाहर कम, घर के भीतर ज्यादा नजर आ रही है। शुक्रवार को नामांकन करने पहुंचे सौरभ स्वरूप के साथ सपा, रालोद के जिलाध्यक्ष नजर आए, लेकिन बड़े भाई गौरव स्वरूप की गैर मौजूदगी चर्चा का कारण रही। वहीं, टिकट नहीं मिलने से नाराज राकेश शर्मा ने साथ देने का वादा किया, लेकिन नामांकन के समय उनकी दूरी भी समर्थकों में कोई साफ संदेश नहीं दे सकी।

मुजफ्फरनगर सीट पर सपा-रालोद के गठबंधन ने सबसे आखिर में प्रत्याशी घोषित किया। रालोद के खाते में गई शहर सीट पर सपा के तीन नेता, राकेश शर्मा, गौरव स्वरूप और उनके भाई सौरभ स्वरूप टिकट की लाइन में थे। पिछली बार प्रत्याशी रहीं पायल शर्मा माहेश्वरी रालोद से दावेदार थीं। अंत में पूर्व मंत्री चितरंजन स्वरूप के छोटे बेटे सौरभ स्वरूप ने बड़े भाई गौरव स्वरूप व राकेश शर्मा की राह रोक दी। ब्राह्मण नेता राकेश शर्मा भी नाराज होकर घर बैठ गए। गुरुवार को सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी के साथ गठबंधन प्रत्याशी सौरभ स्वरूप ने घर पहुंचकर राकेश शर्मा को मना लिया। राकेश शर्मा ने साथ देने का वादा भी किया।

उधर, सौरभ स्वरूप के नाम की घोषणा के बाद पूर्व के चुनावों में सपा के प्रत्याशी रहे और उनके बड़े भाई गौरव स्वरूप राजनीतिक परिदृश्य से गायब हो गए। सौरभ के नामांकन से उनके दूरी बनाने की चर्चा होती रही। उधर, रालोद खेमे में भी दबी जुबान से सपा के चेहरे को सिबल देने को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। बहरहाल, चुनाव का परिणाम तो भविष्य में पता चलेगा लेकिन मौजूदा हालात में घर की रार गठबंधन प्रत्याशी की राह मुश्किल जरूर कर सकती है।

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गौरव को सहानुभूति तो सौरभ को विरासत का सहारा

पूर्व मंत्री चितरंजन स्वरूप के निधन के बाद 2016 में हुए उप चुनाव में पहली बार बड़े पुत्र गौरव स्वरूप को सपा ने टिकट दिया लेकिन वह भाजपा प्रत्याशी कपिल देव अग्रवाल से हार गए। 2017 में फिर सपा ने गौरव स्वरूप को प्रत्याशी बनाया लेकिन भाजपा की लहर में वह भाजपा प्रत्याशी कपिल देव अग्रवाल से दस हजार से ज्यादा वोट से हार गए। गौरव स्वरूप इस बार वैश्य वर्ग की सहानुभूति के जरिए टिकट की दावेदारी कर रहे थे जबकि उनके छोटे भाई सौरभ स्वरूप राजनीतिक विरासत की दुहाई देते हुए टिकट के दावेदार थे। सपा ने 2012 में भी सौरभ स्वरूप को प्रत्याशी बनाया था। पिता-पुत्र के बीच सियासी दीवार खड़ी होने की चर्चाएं चलीं तो सौरभ स्वरूप ने टिकट लौटा दिया था।

------- राजनीति से परिवार का पुराना नाता

राजनीति से स्वरूप परिवार का पुराना नाता है। वर्ष 1967 में पूर्व मंत्री स्व. चितंरजन स्वरूप के भाई विष्णु स्वरूप सदर सीट से निर्दल चुनाव लड़कर विधायक रह चुके हैं। 1974 में सौरभ स्वरूप के पिता चितरंजन स्वरूप पहली बार चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे। 2002 और 2012 में सपा के टिकट पर जीतकर चितंरजन स्वरूप विधायक बने। इस दौरान वह सपा सरकार मे राज्यमंत्री भी रहे।

Edited By: Jagran