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    काली नदी के उद्गम पर फिर फूटी पानी की धार

    By JagranEdited By:
    Updated: Fri, 16 Oct 2020 11:24 PM (IST)

    खतौली क्षेत्र में काली नदी पूर्वी के पुनर्जीवित होने के स्पष्ट संकेत दिखने लगे हैं। एक बार फिर अंतवाड़ा गांव में इस नदी के उद्गमस्थल पर पानी की धार फूट पड़ी है। नदी में पानी देखकर लोग खुश हैं।

    काली नदी के उद्गम पर फिर फूटी पानी की धार

    मुजफ्फरनगर, जेएनएन। खतौली क्षेत्र में काली नदी पूर्वी के पुनर्जीवित होने के स्पष्ट संकेत दिखने लगे हैं। एक बार फिर अंतवाड़ा गांव में इस नदी के उद्गमस्थल पर पानी की धार फूट पड़ी है। नदी में पानी देखकर लोग खुश हैं। उधर नीर फाउंडेशन के साथ जिला प्रशासन भी नदी को पुनर्जीवित करने में जुट गया है। अंतवाड़ा में अब दस तालाब बनाए जाएंगे और दो चैक डैम भी बनाए जाएंगे। प्रशासन ने जिले के जिन नौ गांवों से नदी निकल रही है, वहां नदी की भूमि को कब्जामुक्त कराकर पौधारोपण कराने का निर्णय लिया है।

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    करीब छह सौ किलोमीटर लंबी यह नदी मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, एटा, फर्रुखाबाद होते हुए कन्नौज में जाकर गंगा नदी में मिलती है। यह बरसाती नदी है, जो गंगा की प्रमुख सहायक नदी है। अवैध कब्जे होने पर यह नदी लगभग सूख गई थी। नीर फाउंडेशन के निदेशक नदी पुत्र रमन त्यागी ने इस नदी को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया। जिला प्रशासन व नीर फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों से काली नदी पूर्वी के पुनर्जीवित होने के स्पष्ट संकेत दिखने लगे हैं। मुख्यमंत्री के सचिव आलोक कुमार के प्रयास से सहारनपुर के मंडलायुक्त संजय कुमार के निर्देशन में सीडीओ आलोक यादव ने नीर फाउंडेशन के सहयोग से नदी पुनर्जीवन का कार्य शुरू कराया। नदी उद्गम अंतवाड़ा गांव से नदी की खोदाई शुरू की गई। प्रथम चरण में मुजफ्फरनगर जिले की 22 किलोमीटर नदी को लिया गया है। उद्गमस्थल पर दो तालाब बन चुके हैं और आठ और नए तालाब बनाए जा रहे हैं। रमन त्यागी ने बताया कि नदी उद्गमस्थल के साथ पास का तालाब स्वत: ही जल से भरने लगा है। अन्य तालाबों में भी पानी आने लगा है। आने वाले समय में यह नदी देश की तमाम छोटी नदियों के लिए प्रेरणा बनेगी।