अब आसानी से हो सकेगा दांतों की नसों का इलाज
मुरादाबाद, जासं : दांतों की नसों का इलाज अब और आसान हो गया है। एमडीएस के छात्रों ने इ
मुरादाबाद, जासं : दांतों की नसों का इलाज अब और आसान हो गया है। एमडीएस के छात्रों ने इसके लिए दो नए उपकरण तैयार किए हैं। इस उपकरण को भारत सरकार की इंटलेक्चुअल प्रापर्टी आफ इंडिया की ओर से पेटेंट किया गया है।
कोठीवाल डेंटल कॉलेज से एमडीएस करने वाले दंत चिकित्सक डॉ. मुहम्मद सलमान अख्तर और पढ़ाई कर रहे डॉ. अंकित अग्रवाल ने मिलकर दोनों उपकरण तैयार किए हैं। एक उपकरण का नाम यूनिवर्सल पर्चा कटर और दूसरे का नाम यूनिवर्सल वेक्टा पर्चा कंडेंसर रखा है। छात्रों ने बताया कि इस उपकरण से दांतों की नसों का इलाज (आरसीटी) आसानी हो जाएगा।
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काम में बाधा ने तैयार कराए उपकरण
उपकरण को तैयार करने में छात्रों को दो साल लगे। डॉ. सलमान अख्तर के अनुसार वर्ष 2016 में पढ़ाई के दौरान प्रैक्टिकल के समय देखा कि दांतों में कीड़े लगने से नसों तक उसका असर पड़ता है। इससे नसें कमजोर हो जाती हैं और खून बहने लगता है। इलाज के लिए कमजोर हो चुकी पुरानी नसों की जगह आर्टिफिशियल नस डाली जाती है, लेकिन नस कैसे सही रूप से बैठेगी, इसको लेकर कोई उपकरण नहीं था। मन में जिज्ञासा उठी कि इस पर कुछ काम करना चाहिए। इसके बाद डॉ. अंकित अग्रवाल से मिल नए उपकरण की खोज में लग गया। इसके बाद यह सफलता मिली।
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इस तरह आएगा उपयोग में
यूनिवर्सल वेक्टा पर्चा कटर का उपयोग दांत की नस को निकालने के लिए होगा। इससे क्राउन पर नस को कसने के बाद रूट का एक्स-रे कर नई नस डाली जाएगी। इसके बाद यूनिवर्सल वेक्टा पर्चा कंडेंसर के माध्यम से नस को सही से बैठाकर मसाला भर दिया जाएगा। इससे पूरी प्रक्रिया सही रूप से होगी। अभी तक ऐसा उपकरण न होने की वजह से मरीजों को आरसीटी के बाद काफी दिक्कत होती है।
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हर उम्र के लोगों के लिए है कारगर
डॉ. अख्तर ने बताया कि ये उपकरण हर उम्र के लोगों में आरसीटी के लिए इस्तेमाल किए जा सकते है। आरसीटी के लिए इन उपकरणों के अलावा अन्य उपकरणों की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
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