रामपुर,जेएनएन। शासन ने पुलिस अधीक्षक डॉ. अजय पाल शर्मा को रामपुर से हटा दिया है। उन्हे पीटीएस उन्नाव भेजा है, जबकि इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्रा को रामपुर का एसपी बनाया है। अजय पाल मात्र सात माह रामपुर के पुलिस अधीक्षक रहे। लेकिन, इस अवधि में ही उन्होंने कई बड़े काम कर डाले। उन्होंने बदमाशों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। उन्हें सजा दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। उनके सात माह के कार्यकाल में कई बदमाश मुठभेड़ में पुलिस की गोली से घायल हुए, जबकि पांच को फांसी की सजा सुनाई गई।

डॉ.अजय पाल शर्मा जून माह में रामपुर के पुलिस अधीक्षक बने थे। उन्होंने कार्यभार संभालने के चंद रोज बाद ही दुष्कर्म के बाद मासूम की हत्या करने के मामले में आरोपित को पकड़वा लिया था। पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान उसे गोली भी मार दी थी। उसे सजा दिलाने के लिए पुलिस ने प्रभावी ढंग से पैरवी की और छह माह के अंदर ही उसे अदालत से फांसी की सजा सुना दी गई। सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर आतंकी हमले का मुकदमा तो 12 साल से अदालत में विचाराधीन था। इस मामले में भी उन्होंने पुलिस से प्रभावी पैरवी कराई। अदालत ने चार आतंकियों को फांसी की सजा सुनाई और एक को उम्रकैद की सजा सुनाई। उनके एसपी रहते रामपुर में आधा दर्जन बदमाशों को मुठभेड़ के दौरान गोली से घायल किया गया। इससे बदमाशों में कानून का खौफ कायम हुआ। उनके कार्यकाल में सांसद आजम खां और उनके करीबियों के खिलाफ भी अनेक मुकदमे दर्ज कराए गए।

पिछले दिनों गौतमबुद्धनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव कृष्ण ने पांच आइपीएस अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पैसा देकर मनचाहे जिलों में पोङ्क्षस्टग कराने का आरोप लगाया गया। इसमें डॉ.अजय पाल शर्मा का नाम भी सामने आया। मेरठ के अपर पुलिस महानिदेशक को जांच सौंपी गई। उनकी जांच रिपोर्ट के बाद गौतमबुद्धनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया, जबकि अजय पाल शर्मा समेत अन्य अधिकारियों को जिलों से हटाया गया है। इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्रा को रामपुर का पुलिस अधीक्षक बनाया गया है।  

Edited By: Narendra Kumar