जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। PFI Ban in India : गृह मंत्रालय ने पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआइ) पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद से सभी राज्यों में पीएफआइ के ठिकानों में छापेमारी करके उसके सदस्यों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन में पीएफआइ ने की थी फंडिंग

दिल्ली के शाहीन बाग आन्दोलन के बाद से पीएफआइ की कार्यप्रणाली पर केंद्रीय जांच एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही थी। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन में पीएफआइ की फंडिंग की बात सामने आई थी। मुरादाबाद के ईदगाह में भी दो माह तक आन्दोलन चला था।

मुरादाबाद के आंदोलन में शामिल हुए थे पीएफआइ के सदस्य

मुरादाबाद के गलशहीद, मुगलपुरा थाना क्षेत्र के साथ ही बिजनौर जनपद से बड़ी संख्या में पीएफआइ के सदस्य आन्दोलन में सहयोग करने के लिए पहुंचे थे। मदद पहुंचाने वाले सदस्यों को खुफिया विभाग के अफसरों ने चिन्हित किया था। लेकिन प्रतिबंध के बाद स्थानीय स्तर पर पीएफआइ के सदस्य पूरी तरह से भूमिगत हो गए हैं।

खुफिया एजेंसी पीएफआइ सदस्यों की तलाश में जुटी

खुफिया एजेंसिया इन सदस्यों की तलाश में जुट गई है। मुरादाबाद मंडल में 25 अधिक पीएफआइ के सक्रिय सदस्य हैं। हालांकि, नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में मंडल में मुरादाबाद को छोड़कर सभी जनपदों में हिंसा हुई थी। उस दौरान भी इन विरोध प्रदर्शनों में पीएफआइ का नाम सामने आया था।

स्थानीय स्तर पर इस आंदोलन को शुरू करने के लिए अलीगढ़ और जामिया से जुड़े छात्र संगठनों के पदाधिकारियों ने घर-घर जाकर इस आंदोलन से लोगों को जोड़ने का काम किया था।

249 नंबरों को सर्विलांस से हो रही निगरानी

खुफिया विभाग के अफसरों ने जनवरी 2021 से जोन के नौ जनपदों में 249 नंबरों को सर्विलांस में लगाकर निगरानी का काम किया था। इन नंबरों की निगरानी से मुरादाबाद में सक्रिय रहे सदस्यों की पहचान भी हुई थी। हालांकि पीएफआइ ने मंडल में अपना संगठन संचालन के लिए बिजनौर को बेस बनाया था।

वहां पर लगभग पांच सदस्यों के खिलाफ वित्तीय लेन-देन का काम सम्भाला जाता रहा है। खुफिया विभाग के अफसर इन सक्रिय सदस्यों की लगातार निगरानी कर रहे थे। लेकिन प्रतिबंध के बाद से यह सभी अचानक गायब हो गए हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी

मुरादाबाद के डीआइजी शलभ माथुर का कहना है कि पुलिस की खुफिया इकाई के माध्यम से प्रतिबंधित संगठन और संदिग्ध लोगों की निरंतर निगरानी की जाती है। इस संबंध में केंद्रीय एजेंसियों के साथ भी सूचनाएं साझा की जाती हैं। पीएफआइ संगठन के सदस्यों की सक्रियता मंडल में बहुत अधिक नहीं हैं। इनके बारे में लगातार सूचनाएं संकलित की जा रही हैं।

Edited By: Samanvay Pandey

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