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    Moradabad News: नए कप्‍तान ने संभाली जिले की कमान, अपराधियों पर सख्‍त कार्रवाई के निर्देश

    By Vivek BajpaiEdited By:
    Updated: Sun, 17 Apr 2022 10:30 AM (IST)

    त्याकांड की जांच पुलिस ने दो साल तक की थीलेकिन किसी भी कातिल को नहीं पकड़ सकी थी। सितंबर 2016 में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर केस को बंद कर दिया था। एक साल पहले शासन के निर्देश पर पुलिस की विशेष टीम जांच के लिए गठित की गई थी।

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    हेमंत कुटियाल 2011 बैच के आइपीएस अधिकारी हैं

    मुरादाबाद, जेएनएन। जिले में आइपीएस हेमंत कुटियाल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हो गए हैं। लेकिन, उनके लिए भी चुनौती पुरानी ही हैं। उन्‍होंने शनिवार रात को चार्ज संभाल लिया। इसके साथ ही अपने अधीनस्‍थोंं के साथ बैठक भी की। अपराधियों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई करने और आम लोगोंं के साथ विनम्रता से पेश आने के निर्देश दिए। नए कप्‍तान के सामने में भी कई चुनौतियां खड़ी हैं।

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    डा. शैली की बेटी को नहीं मिला इंसाफ: 13 मई 2014 की रात को सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के जिगर कालोनी स्थित आवास में जिला अस्पताल की सेवानिवृत्त सीएमएस डा. शैली मेहरोत्रा, उनके पति डा. ओम मेहरोत्रा सहित चार लोगों की हत्या की गई थी। बेटी डा. गुंजन अरोरा ने सिविल लाइंस थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था। हत्याकांड की जांच पुलिस ने दो साल तक की थी,लेकिन किसी भी कातिल को नहीं पकड़ सकी थी। सितंबर 2016 में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर केस को बंद कर दिया था। इस मामले में एक साल पहले शासन के निर्देश पर पुलिस की विशेष टीम जांच के लिए गठित की गई थी। लेकिन, अभी तक कुछ नहीं हो सका।

    अंधेरे में हाथ-पैर मार रही पुलिस: रामगंगा विहार में 12 जनवरी की शाम कारोबारी कुशांक गुप्ता की बाइक सवार बदमाशों ने सिर पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। मृतक के पिता अशोक गुप्ता की तहरीर के आधार पर प्रियांशु गोयल और हिमांशु गोयल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने के बाद जेल भेज दिया था। कुशांक हत्याकांड का पर्दाफाश करने के लिए डीआइजी ने जांच के निर्देश दिए हैं। लेकिन अभी तक कोई पुख्ता सुबूत पुलिस के हाथ नहीं लगे हैं। कारोबारी कुशांक गुप्ता हत्याकांड क गुत्थी अभी तक पुलिस सुलझा नहीं पाई है।

    एक साल बाद भी नहीं हुई पहचान: -थाना मझोला क्षेत्र में तीन मार्च 2021 की दोपहर चौहानों वाली मिलक गांव के पास बाग में युवक का शव मिला था। हत्यारों ने युवक के चेहरे को बुरी तरह कुचल दिया था। युवक के चेहरे पर ईंटों से हमला किया गया था। गले पर भी चोट के निशान मिले हैं। शव जिस स्थान पर मिला, वहां आसपास शराब की खाली बोतलों के साथ नमकीन के खाली पैकेट भी मिले हैं। पुलिस एक साल बाद भी युवक की शिनाख्त नहीं करा सकी। युवक की हत्या के इस केस में पुलिस फाइनल रिपोर्ट लगाने की तैयारी कर रही है।

    जाम के झाम से कब मिलेगी निजात: शहर में जाम सबसे बड़ी समस्या है। बाजारों का बुरा हाल है। कोतवाली, बर्तन बाजार, टाउन हाल, बुधबाजार, कटरा, मंडी चौक में दिन भर निकलना मुश्किल है। रेलवे स्टेशन के सामने सबसे अधिक जाम लगता है। अवैध तरीके से टेंपो स्टैंड बनाए जाने की वजह से सम्भल चौराहे पर जाम की समस्या बनी रहती है। रोडवेज पुलिस चौकी के पास से ठेका वाहन चलते हैं। कुछ दिन के लिए लोगों को जाम से निजात मिल जाती है। लेकिन, बाद में फिर वही हालात बन जाते हैं।

    गोकशी रोकने में पुलिस नाकाम

    जिले में मांस का अवैध कारोबार करने वाले सक्रिय हैं। कई मुहल्लों में तो घरों में ही पशुओं का कटान कर लिया जाता है। कोहिनूर तिराहे के पास कई बार अवैध कटान होते हुए पकड़ा गया है। लेकिन, कार्रवाई होने के बाद फिर से गिरोह सक्रिय हो जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों को पशु वधशाला बना लिया गया है। रात के अंधेरे में जंगल में पशुओं का वध करके मांस बेच दिया जाता है। कोरोना काल में कई नए गिरोह बन गए हैं। इनके कुछ साथी पशु तस्करी के धंधे में लिप्त हैं। पुलिस कड़ाई से कार्रवाई करे तो गोकशी पर अंकुश लग सकता है।

    अतिक्रमण और जमीनी विवाद भी समस्या: शहर में अतिक्रमण भी बड़ी समस्या है। दुकानों के आगे सामान रख लिया जाता है। इससे चौड़ी सड़कें भी सिमटकर छोटी हो जाती है। यही हाल पाश कालोनियों का भी है। नालों को पाटकर स्लैब डाल रखे हैं। इन्हें हटाने के लिए कई बार प्रयास किए गए। लेकिन, विरोध के आगे किसी की एक नहीं चलती है। जमीनी विवाद भी जिले की बड़ी समस्या है। इन्हीं विवादों में कई बार अपराध हो जाता है। इसलिए पुलिस जमीनी विवाद से दूर रहे तो कुछ राहत मिल सकती है।

    आठ माह के कार्यकाल में अपराध नियंत्रण और विकास कार्य किए: मुरादाबाद में आठ माह के कार्यकाल के दौरान एसएसपी बबलू कुमार ने अपराधियों पर शिकंजा कसने के साथ ही पुलिस वेलफेयर के लिए काम किए। पुलिस लाइन में नई कैंटीन,रेडियो दफ्तर,आवासीय सुविधाओं को बेहतर करने के साथ ही निर्माण कार्यों पर विशेष ध्यान दिया। इसके साथ ही विभाग में डिजिटलाईजेंशन के लिए लगातार काम किया। उन्होंने चुनाव के दौरान ई-संपर्क ऐप बनाने के साथ ही सभी दस्तावेज को आनलाइन करने का काम किया। इस दौरान अपराधियों पर शिकंजा कसने के बाद गरीबों की शिकायतों को प्राथमिकता से सुनने के साथ ही उनका निस्तारण किया। विधानसभा चुनाव को उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया। जिसकी तारीफ शासन तक हुई। हालांकि कुछ राजनेताओं की नाराजगी के चलते भी वह बीते दिनों चर्चा में आए थे। लेकिन उन्होंने अपने कार्य को निरंतर जारी रखा। विभागीय पुलिस कर्मियों की समस्याओं को उन्होंने प्राथमिकता से निस्तारित किया।