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    CWG 2022 : सम्भल की सरिता ने खेतों में मारी ऐसी जंप कि Commonwealth Games का मिल गया टिकट

    Commonwealth Games 2022 सम्भल की सरिता मुरादाबाद मंडल से एक मात्र खिलाड़ी है जो कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। आइए जानते हैं लांग जंप से शुरू हुआ उनका खेल का सफर कैसे हैमर थ्रो में तब्दील हो गया।

    By Samanvay PandeyEdited By: Updated: Thu, 28 Jul 2022 11:47 AM (IST)
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    CWG 2022 : चेहरे पर जीत का विश्वास, इशारों में गोल्ड का इरादा जता इग्लैंड गई सरिता

    सम्भल, (सचिन चौधरी)। Commonwealth Games 2022 : क्या आंखें बोलती हैं। हां बातें करती हैं। कोई ठीक से समझ जाए तो इरादे जानने में देर नहीं लगेगी। खेत की पगडंडी से छलांग लगा (Long Jump) विश्व स्तर पर पहचान बनाने वाली सरिता बुधवार को Commonwealth Games के लिए विदा होते समय भले कुछ न बोली।

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    लेकिन, चेहरे की चमक के बीच आंखों और इशारों से गोल्ड (Gold Medal) का सपना सभी को बता गईंं। दिल्ली (Delhi) से रवाना होते वक्त इंग्लैंड (England) जाने की जल्दी जरूर थी, लेकिन सफलता का विश्वास कम नजर नहीं आया। उन्हें हेमर थ्रो (Hammer Throw) में प्रदर्शन करना है। इसके लिए एक बच्ची की मां होने के बाद भी खासी तैयारी की।

    उत्तर प्रदेश के जनपद सम्भल के गांव सैदपुर जसकोली में जन्म लेने वालीं सरिता को खेल में नाम रोशन करने की ललक बचपन से थी। तीन भाई-बहनों में मझली सरिता (Sarita) के स्वजन को उनके खेल में आगे बढ़ने की उम्मीद नहीं थी। लिहाजा पिता प्रकाश सिंह पढ़ने पर जोर देते थे।

    घर की आर्थिक स्थिति भी ज्यादा ठीक नहीं थी। ऐसे में खेल की प्रेक्टिस के लिए बाहर भेजना संभव नहीं था। कक्षा पांच तक बेटी को गांव के ही बेसिक स्कूल में पढ़ाया। कक्षा छह में गांव शकरपुर सोत स्थित कल्याण लोधी इंटर कालेज में प्रवेश करा दिया। कालेज में क्रीड़ाधिकारी उन्हें खिलाते थे।

    लंबी कूद (Long Jump) में तेज होने की वजह से क्रीड़ाधिकारी ने उनका उत्साहबर्द्धन किया। इस वजह से सरिता (Sarita) का भी खेल के प्रति लगाव बढ़ता गया। कक्षा आठ में वह खेत में ही लांग जंप की तैयारी करनी लगीं। कक्षा 11 में अमरोहा के नारंगपुर स्थित सिख इंटर कालेज में प्रवेश होने पर उन्हें कोच (प्रिंसीपल) सुरेंद्र मिल गए।

    उन्होंने सरिता को हैमर थ्रो (Hammer Throw) की तैयारी करायी। छह माह की कड़ी मेहनत के बाद सरिता ने विश्व विद्यालय स्तर की खेल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल (Gold Medal) हासिल किया। कोच ने अन्य प्रतियोगिताओं में सरिता सिंह को भेजना शुरू कर दिया। नेशनल प्रतियोगिता में मेडल मिलने शुरू हो गए।

    खेल के दम पर वर्ष 2011 में सरिता सिंह की रेलवे में क्लर्क के पद पर नौकरी लग गई, उन्होंने खेलना जारी रखा। 2016 में सरिता सिंह की गांव परियावली के रोमित सिंह से शादी कर ली और वर्ष 2019 में एक बेटी को जन्म दिया। बुधवार को सरिता कामन वेल्थ गेम्स में खेलने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट (Delhi Airport) से इग्लैंड रवाना हुई हैं। 

    सरिता का सफर

    • 2015 में नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल, इसके बाद राष्ट्रीय शिविर में चयन
    • 2017 में 65.25 मीटर थ्रो कर सीनियर नेशनल फेडरेशन कप में नेशनल रिकार्ड बनाया।
    • 2017 में एशियन चैंपियन शिप के लिए चयन, इसमें छठे स्थान पर रहीं
    • 2018 में एशियन गेम्स के लिए चयन, पांचवां स्थान मिला
    • 2022 में 64.15 मीटर थ्रो करने पर कामनवेल्थ गेम्स के लिए चयन

    एक समय खेल को अलविदा कहने का बना लिया था मन

    सरिता सिंह ने वर्ष 2019 में बेटी को जन्म दिया। इसके बाद उन्होंने खेल को अलविदा कहने का मन बना लिया था, लेकिन पति रोमित सिंह और ससुर धर्मपाल सिंह ने उन्हें खेलते रहने के लिए प्रेरित किया। आज सरिता कामनवेल्थ गेम्स में खेलने के लिए रवाना हुई हैं। सरिता सिंह की वर्ष 2016 में सम्भल के गांव परियावली के रोमित सिंह से शादी हुई थी।

    रोमित सिंह भी खिलाड़ी है और रेलवे में नौकरी करते हैं। सरिता के स्कूली कोच सुरेंद्र सिंह ने बताया कि सरिता सिंह का खेल अच्छा है। इन्होंने तैयारी अच्छी की है। सरिता सिंह बहुत मेहनत करती है। आठ साल तक मैंने तैयारी कराई है। मुझे उम्मीद है कि वह मेडल लेकर वापस आएंगी।