मुरादाबाद: कुत्ते को रोटी खिलाने की कीमत जान देकर चुकाई, 24 घंटे में थमीं अतुल की सांसें; मामूली खरोंच बनी जानलेवा
मुरादाबाद में 14 वर्षीय अतुल की कुत्ते के नाखून से लगी मामूली खरोंच को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हुआ। दो ...और पढ़ें

इंसेट में अतुल की फाइल फोटो।
HighLights
14 वर्षीय अतुल की रेबीज से हुई दुखद मौत।
कुत्ते के नाखून की मामूली खरोंच को किया नजरअंदाज।
रेबीज टीके की अनदेखी बनी मौत का कारण।
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। बेजुबान जानवरों को रोटी खिलाना 14 वर्षीय अतुल की आदत थी। उसे क्या पता था कि जिस कुत्ते को वह अपने हाथों से रोटी खिला रहा है, उसी दौरान लगी मामूली खरोंच उसकी जिंदगी छीन लेगी। करीब दो माह पहले उंगली में कुत्ते का नाखून लगने पर परिवार ने इसे सामान्य घटना समझा। न घाव की गंभीरता का अंदाजा लगा और न ही रेबीज से बचाव के लिए टीका लगवाया गया।
शनिवार सुबह स्कूल में अचानक तबीयत बिगड़ी तो परिवार को खतरे का अहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। रविवार सुबह दिल्ली के अस्पताल में अतुल की मौत हो गई। बिलारी क्षेत्र के सतारन गांव निवासी अतुल गांव के स्कूल में कक्षा सात का छात्र था। उसके पिता राकेश हैं। परिवार में मां फूलकुमारी और तीन भाई रवि, नागेश व दीपांशु भी हैं।
कुत्ते को रोटी खिलाने की कीमत जान देकर चुकाई, 24 घंटे में थमीं अतुल की सांसें
अतुल रोजाना की तरह शनिवार सुबह तैयार होकर स्कूल पहुंचा। कक्षा में बैठने के कुछ देर बाद ही उसे घुटन महसूस होने लगी। वह बार-बार उठ रहा था और सांस लेने में परेशानी महसूस कर रहा था। स्कूल में पानी का गिलास देखते ही घबराने लगा था अतुल परेशानी बढ़ने पर अतुल शिक्षामित्र विजय लक्ष्मी के पास पहुंचा और अपनी तकलीफ बताई। शिक्षामित्र ने उसे पानी पिलाने के लिए गिलास आगे बढ़ाया तो वह अचानक घबराकर चीखने लगा और भागने लगा। उसकी हालत देखकर कक्षा में मौजूद बच्चे भी डर गए। तत्काल परिवार को सूचना दी गई।
शिक्षामित्र और परिवार के लोग उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। यहां भी उसकी हालत असामान्य बनी रही। वह अस्पताल के गेट पर लगी ग्रिल पकड़कर चीखने लगा। उसे इस स्थिति में देखकर लोगों की भीड़ जुट गई।
दो माह पहले उंगली में लगी थी कुत्ते के नाखून से खरोंच
चिकित्सकों ने रेबीज संक्रमण की पुष्टि की। हालत गंभीर होने पर उसे दिल्ली रेफर किया गया, जहां रविवार सुबह उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। मामूली खरोंच को नजरअंदाज करना पड़ा भारी अतुल की चाची रामश्री ने बताया कि वह मोहल्ले में घूमने वाले कुत्तों को रोटी खिलाता था। करीब दो माह पहले एक कुत्ते को रोटी खिलाते समय उसकी उंगली में नाखून लग गया था। परिवार ने इसे मामूली खरोंच समझा और रेबीज रोधी टीका नहीं लगवाया।
रेबीज से बचाव है जरूरी
चिकित्साधीक्षक डॉ. राजपाल के अनुसार, परिजनों ने उन्हें कुत्ते के काटने की जानकारी दी थी। यह घटना सतर्क रहने का संदेश देती है। कुत्ते या किसी अन्य स्तनधारी के काटने अथवा खरोंचने पर घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए और तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार रेबीज से बचाव का उपचार कराना चाहिए। घाव छोटा होने पर भी लापरवाही जानलेवा हो सकती है। रेबीज के लक्षण सामने आने का इंतजार करने के बजाय जानवर के संपर्क में आने के तुरंत बाद बचाव के उपाय करना जरूरी है।
