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    सेहत निगल रहे पेट के कीड़े

    By Edited By:
    Updated: Sat, 10 Sep 2016 02:09 AM (IST)

    मेहंदी अशरफी, मुरादाबाद बुखार, शरीर का पीला होना, पेट में दर्द, दिल तेजी से धड़कना, चक्कर आना, खान

    मेहंदी अशरफी, मुरादाबाद

    बुखार, शरीर का पीला होना, पेट में दर्द, दिल तेजी से धड़कना, चक्कर आना, खाने का अच्छा न लगना और बार-बार दस्त होना कृमि के लक्षण हो सकते हैं। पेट के कीड़े शरीर में हमला करते हैं तो बीमारी बढ़ जाती है। आज विश्व कृमि दिवस है। एक एलबेंडाजॉल की खुराक पेट के कीड़ों से निजात दिला सकती है। इसलिए पेट की तमाम बीमारियों को दूर करने के लिए आज यह खुराक खुद व बच्चों को भी खिलाएं।

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    बच्चों से लेकर वृद्धों की आंतों में कृमि पाए जाते हैं। इसकी वजह से प्रतिवर्ष न जाने कितने लोग मौत का शिकार भी हो जाते हैं और उनकी मौत का कारण भी स्पष्ट नहीं हो पाता। साफ पानी न पीने और दूषित व अशुद्ध खाद्य पदार्थो का सेवन इसके लिए जिम्मेदार है। शारीरिक स्वच्छता के प्रति अनदेखी इस बीमारी का कारण बनता है। कृमि का लार्वा त्वचा के जिस स्थान पर प्रवेश करता है, उसपर तीव्र खुजली होती है और वह स्थान लाल होकर सूज जाता है। इसके बाद रोगी को भूख कम, हल्का बुखार, दमा जैसा श्वास और रुक-रुक कर खासी होने लगती है। आमाशय में दर्द, अफरा और कभी कब्ज-कभी अतिसार की शिकायत होने लगती है। बच्चों का पेट फूल जाता है।

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    कृमि के प्रकार

    पेट के कीड़े कई तरह के होते हैं, लेकिन प्रमुखता ये दो प्रकार की श्रेणियों में बंटे हैं। गोल कृमि, या 'राउंड वर्म' और फीता कृमि, या 'टेप वर्म'। अपनी क्षमता के हिसाब से यह शरीर पर असर डालते हैं। समय से इलाज होने से इसे समाप्त किया जा सकता है।

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    दवा से मरेंगे कृमि

    इंसान और पशुओं को राउंड वॉर्म, हुक वॉर्म, फ्लूक और टेप वॉर्म जैसे परजीवी कृमियों से बचाने के लिए एंटी हेलमिंटिक दवा दी जाती है। स्कूली बच्चों के सामूहिक डी-वॉर्मिंग अभियान के तहत हेलमिनथिएसिस की रोकथाम और उपचार के लिए इस दवा का इस्तमाल किया जाता है। इसमें मिट्टी के संपर्क से पैदा होने वाला हेलमिनथिएसिस भी शामिल हैं। बच्चों का उपचार मेबेनडेजॉल और एलबेनडेजॉल से किया जा सकता है। एलबेनडेजॉल की एक गोली से बच्चों को परजीवी कृमियों से बचाया जा सकता है, जो बच्चे की आतों में रहते हैं और मानसिक स्वास्थ्य तथा शारीरिक विकास के लिए आवश्यक पोषण तत्वों को अपना आहार बनाते हैं।

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    एक्सपर्ट वर्जन

    बच्चे अक्सर इन कृमियों की वजह से पनप नहीं पाते हैं। इसलिए बच्चे की खुराक कम होने या फिर कमजोरी महसूस होने पर फौरन चिकित्सक को दिखाएं। जिससे आंतों को नुकसान पहुंचाने वाले कृमियों को खत्म किया जा सके।

    डॉ. बीर सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ