सच का सेवक तो नेता होता है और लोग सच सुनते हैं..
- शायर हसन जौनपुरी की गजलों न नज्मों की पुस्तक खुशबू का विमोचन - कवि सम्मेलन व मुशायरे में

- शायर हसन जौनपुरी की गजलों न नज्मों की पुस्तक खुशबू का विमोचन
- कवि सम्मेलन व मुशायरे में शायरों की रचनाओं को सराहा जागरण संवाददाता, मीरजापुर : नारघाट स्थित उत्सव वाटिका के सभागार में कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन हुआ। शायरों ने रचनाओं से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शायर हसन जौनपुरी की गजलों व नज्मों की पुस्तक ''खुशबू'' का विमोचन असिस्टेंट कमिश्नर स्टेट जीएसटी अविनाश चंद्र राय ने विमोचन किया। वृजदेव पांडेय ने सच का सेवक तो नेता होता है और लोग सच सुनते हैं, सच बोलते है और भोलानाथ कुशवाहा ने कुछ-कुछ सुबह सी लगती है ये रात को सुनाया।
अरविद अवस्थी ने छप्परों में सांस लेती सादगी, राजधानी में हैं कपट के किले, आनंद अमित ने मिट्टी की खुशबू है इसमें और चमन की खुशबू है, यह तो खुद खुशबू में डूबे फूल-ए-हसन की खुशबू है, मुहिब मिर्जापुरी ने चलते रहना है जिदगी है मुहिब और थकन मौत की अलामत है, अंदलीब जमानी ने फूल आये हैं, कभी संग नजर आये हैं, खुर्शीद भारती ने मेरा नुकसान होने वाला है। फिर भी सच मैंने बोल डाला है और शफक मिर्जापुरी ने सुनाया एक महल आओ मुहब्बत का बनायें मिलकर। पहले नफरत की यह दीवार गिरायी जाये। वहीं
हेलाल मिर्जापुरी ने जिदगी न उलझेगी फिर कभी मशीनों से, गुमनाम मिर्जापुरी ने पी के शराब बीवी पर क्यों ढाते हो सितम, उनमें भी होती जां तुम्हारी जान की तरह, डा. सुधा सिंह ने मैं शहीद की बीवी हूँ,वि धवा न कहलाऊंगी। छोड़ पिया के श्रृंगार सभी अब वीर वधू कहलाऊंगी, गफ्फार नियाजी ने है दिल में आज प्यार का इकरार दोस्तों, सैयद जैगम अली ने इल्म के दो लफ्ज जो मिल जायें मुझे आपसे जो, लालव्रत सिंह सुगम ने गीत ही जीवन के लक्षण, नित रंग बदलती दुनियाँ, अश्क रज्जाकी ने घर के हर एक से मैं हाथ मिला लूँ कैसे, प्रमोद चंद्र गुप्त ने दिल बड़ा नहीं विचार बड़ा होना चाहिए, अताउल्लाह सिद्दीकी ने राष्ट्रीय एकता की खुशबू फैले पूरे देश में यही अभिलाषा है, अमरनाथ सिंह ने इंसान की खुशबू रहती है सुनाया। इसके साथ ही अनिल यादव, जैनब मिर्जापुरी, केदारनाथ सविता भी काव्यपाठ में शामिल रहे।
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