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    Mirzapur: विंध्य क्षेत्र में अब होगी खजूर की खेती, बढ़ेगी किसानों की आय; उद्यान विभाग दे रहा है पौधा

    Updated: Tue, 13 Feb 2024 04:13 PM (IST)

    Mirzapurविंध्य क्षेत्र के किसान भी अब खजूर की खेती करके आत्मनिर्भर बनेंगे। मीरजापुर की जलवायु के अनुरूप बरही प्रजाति के खजूर के पौधे का रोपण कराया जाएगा। जिला उद्यान अधिकारी मेवा राम के अनुसार बरही प्रजाति का पौधा रोपण के तीन वर्ष बाद ही फल देना आरंभ कर देता हैं। यह लगभग 60 वर्षों तक फल देता है। किसानों के लिए खजूर की खेती लाभदायक साबित होगी।

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    विंध्य क्षेत्र में अब होगी खजूर की खेती, बढ़ेगी किसानों की आय

    जागरण संवाददाता, मीरजापुर। विंध्य क्षेत्र के किसान भी अब खजूर की खेती करके आत्मनिर्भर बनेंगे। खजूर की खेती करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है, जिससे आय में बढ़ोतरी हो सके। उद्यान विभाग खजूर की खेती आरंभ करने के लिए चार हजार रुपये में टिश्यू कल्चर पौधा दिया जा रहा है। इसके लिए किसान 17 फरवरी तक पंजीकरण करा सकते हैं।

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    मीरजापुर की जलवायु के अनुरूप बरही प्रजाति के खजूर के पौधे का रोपण कराया जाएगा। जिला उद्यान अधिकारी मेवा राम के अनुसार बरही प्रजाति का पौधा रोपण के तीन वर्ष बाद ही फल देना आरंभ कर देता हैं। यह लगभग 60 वर्षों तक फल देता है। एक पेड़ 4-5 वर्ष के बाद लगभग दो क्विंटल प्रति वर्ष फल देता है।

    किसानों को मिलेगी अच्छा दाम

    खजूर का फल पकने के बाद 60 से 70 रुपये प्रति किग्रा की दर से बिकता है। इसके चलते किसानों को एक पेड़ से 10-12 हजार रुपये प्रति वर्ष की आय होती है। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। किसानों का चयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा। किसानों को अपने अंश की धनराशि अतुल लिमिटेड के खाते में सीधे भेजना होगा।

    कम पानी में होती है खजूर की खेती

    खजूर अत्यंत पौष्टिक और ऊर्जा प्रदान करने वाला फल है। इसका उपयोग आजकल प्राकृतिक मिठास के लिए भी किया जाता है। सफेद चीनी का एक बेहतरीन विकल्प है, जो एंटीऑक्सीडेंट तथा शरीर के लिए डिटॉक्सिफायर भी होता है। खजूर की खेती के लिए उचित जल निकासी वाली रेतीली मिट्टी की आवश्यकता होती है।

    वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रभारी ने कही ये बात

    खेती सख्त जमीन पर नहीं की जा सकती है। ज्यादा पानी की जरूरत भी नहीं होती है। तेज धूप में इसके पौधों का विकास होता है। इसके पौधों को अच्छे से वृद्धि करने के लिए 30 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है। -डा. हरीश कुमार तिवारी, असिस्टेंट प्रोफेसर एवं प्रभारी वनस्पति विज्ञान विभाग, केबीपीजी कॉलेज, मीरजापुर