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द‍िव्‍या म‍ित्‍तल ने 'जननीत‍ि भारत पार्टी' के तीन वचनों के साथ शुरू की यूपी में स‍ियासत, 2027 में विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान 

By Prashant Kumar Yadav Edited By: Abhishek sharma
Published: Thu, 15 Oct 2026 03:28 PM (IST)

पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने जननीति पार्टी का ऐलान किया है और 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा ...और पढ़ें

दिव्या मित्तल ने जननीति पार्टी बनाई, 2027 यूपी चुनाव में तीन वचनों के साथ उतरेगी।

दिव्या मित्तल ने जननीति पार्टी बनाई, 2027 यूपी चुनाव में तीन वचनों के साथ उतरेगी।

HighLights

  1. पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने जननीति पार्टी का गठन किया।

  2. 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया।

  3. पार्टी के तीन वचन: जन-केंद्रित नीतियां, जरूरत पर फैसले, जवाबदेही।

जागरण संवाददाता, मीरजापुर। पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने एक वीडियो जारी कर अपनी नई पार्टी जननीति पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है।इससे मीरजापुर में राजनीति गलियारे में हलचल बढ़ गई है। पार्टी बनाने के साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव लड़ने का भी ऐलान कर दिया है।

कहा कि उनकी पार्टी इस चुनाव को मजबूती के साथ लडेगी। इसमें उनकी पार्टी के तीन वचन होंगेे। जिनके मुद्दे पर वह अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतारने का काम करेंगी। वीडियो में मित्तल ने बताया कि पिछली बार राजनीति में आने की बात कहने पर उन्होंने वाटएसएप नंबर जारी किया था। लोगों के इतने संदेश आए कि नंबर बंद करना पड़ा।

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उन्होंने कहा कि उन्हें इतने समर्थन की उम्मीद नहीं थी और इसके लिए उन्होंने लोगों से माफी मांगी। मित्तल के अनुसार, पार्टियों की कमी नहीं, बल्कि आम लोगों की सुनवाई की कमी है। उनकी पार्टी में हर व्यक्ति की बात सुनी जाएगी और सरकार लोगों की जरूरतों के अनुसार काम करेगी।

पार्टी का पहला वचन है कि देश की नीतियों के केंद्र में लोग होंगे और नीतियां तय करने में उनकी भागीदारी होगी। मित्तल ने लहुरिया दह की देवकली देवी का उदाहरण दिया, जिन्होंने गांव में स्कूल की मांग की थी। उनके वीडियो के बाद स्कूल का काम शुरू हुआ और नींव भी बनी, लेकिन बाद में जमीन जंगल की होने की जानकारी मिलने पर काम रोक दिया गया।

मित्तल ने कहा कि बड़े उद्योगपति को उद्योग के लिए 80 दिन में जमीन मिल जाती है, जबकि गरीब की कारखाना लगाने की फाइल 80 वर्षों तक घूमती रहती है। उन्होंने कहा कि नीति वहीं होनी चाहिए, जहां न्याय और सबकी सुनवाई हो। जनता की जरूरतों और अनुभवों को नीतियों में जगह मिलनी चाहिए।

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दूसरा वचन है कि हर फैसला लोगों की जरूरत देखकर लिया जाएगा। सड़क निर्माण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति की आपत्ति पर सड़क का रास्ता बदल दिया गया, जिससे एक व्यक्ति को फायदा हुआ, जबकि दूसरी ओर हजारों लोगों के घर टूटे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की जरूरतों को लेकर लड़कियों की बात भी सुनी जानी चाहिए।

तीसरे वचन के तहत हर काम का हिसाब जनता को देने की बात कही गई है। मित्तल ने मकान स्वीकृत कराने के नाम पर एक महिला से बिचौलिए द्वारा पांच हजार रुपये मांगे जाने का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सड़क, नाली और खड़ंजे के काम की लागत और पूरा होने की समय-सीमा लोगों को पता होनी चाहिए।

काम की स्थिति बताने के लिए हरा रंग अच्छा, पीला अधूरा और लाल खराब काम का संकेत होगा। इससे स्कूलों में किताबों और पढ़ाई की स्थिति सहित कमियों का भी पता चलेगा। मित्तल ने कहा कि चुनाव पैसे से नहीं, लोगों के सहयोग से लड़ा जाएगा और इसके लिए घर-घर जाना होगा।

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