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द‍िव्‍या म‍ित्‍तल ने साढ़े आठ म‍िनट के वीड‍ियो में बताई अपनी स‍ियासी रणनीत‍ि, प्रदेश की स‍ियासत पर कही यह महत्‍वपूर्ण बात

By Amit Kumar Tiwari Edited By: Abhishek sharma
Published: Thu, 15 Oct 2026 02:33 PM (IST)

सेवानिवृत्त आईएएस दिव्या मित्तल ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में प्रवेश की घोषणा की है। उन्होंने जनता की आवाज ...और पढ़ें

सेवानिवृत्त IAS दिव्या मित्तल का राजनीति में प्रवेश, जनता के लिए मांगेगी 'हिसाब'!

सेवानिवृत्त IAS दिव्या मित्तल का राजनीति में प्रवेश, जनता के लिए मांगेगी 'हिसाब'!

HighLights

  1. सेवानिवृत्त IAS दिव्या मित्तल ने राजनीति में प्रवेश किया।

  2. जनता की आवाज बनकर 'हिसाब मांगने' का संकल्प लिया।

  3. मीरजापुर में सियासी हलचल तेज, नई पारी की शुरुआत।

जागरण संवाददाता, मीरजापुर। प्रदेश की राजनीति में आखिरकार सेवानिवृत्त आईएएस दिव्या मित्तल की इंट्री हो ही गई। पूर्व जिलाधिकारी “चलिए, हिसाब मांगते हैं... के साथ प्रशासनिक सेवा के बाद अब राजनीति में उतरने का मन बना लिया है। हाल ही में स्वैच्छिकक अनिवार्य सेवानिवृत्ति वीआरएस लेने वालीं दिव्या मित्तल ने जनता की आवाज बनने की घोषणा की है।

जनपद मीरजापुर, देवरिया समेत कई जनपदों में जिलाधिकारी रहीं दिव्या मित्तल ने कहा सेवानिवृत्ति के बाद काफी सोच विचार के निर्णय लिया कि अब 80 सालों तक किए गए कार्याें का हिसाब मांगा जाए। उन्होंने जारी वीडियों में कहा कि “हिसाब चाहिए, न्याय चाहिए, डरना नहीं है। अपने राजनीतिक सफर का संकेत देते हुए कहा कि वह राजनीति किसी दल के साथ नहीं, जनता के साथ करेंगी। अधिकारी के तौर पर जिलों की कमान संभालने के बाद अब जनता के मुद्दों पर सवाल उठाने की तैयारी है। उनका आह्वान है “चलिए, हिसाब मांगते हैं।”

जनपद की पूर्व जिलाधिकारी आइएएस दिव्या मित्तल ने आजादी के 70 सालों बाद हलिया ब्लाक के पहाड़ी क्षेत्र लहुरिया दह गांव में पानी पहुंचाकर लोगों के चेहरों पर खुशी लाईं, लेकिन कहीं न कहीं इसका खमियाजा उनको उठाना पड़ा। ट्रांसफर के बाद लगभग नौ माह वनवास काटना पड़ा। आखिरकार भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया।

इस्तीफा स्वीकार होने के बाद जनसेवा करने में जुट गई हैं। लोगों की जिज्ञासाओं के समाधान के लिए वीडियो इंटरनेट मीडिया पर साझा किया। इसमें कई पहलुओं को रखा है। इन्होंने वीडियो से राजनीतिक क्षेत्र के साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाया है। कहा है कि स्वीकृति के तीन साल बाद भी लहुरिया दह में स्कूल नहीं बन सका। इसके साथ ही राजस्व विभाग की कार्यशैली से दुखी हैं। बोलीं हैं कि ऊपर से कौन काम रोकता है। आइएएस से त्यागपत्र दे दिया और आपके मन में किसी सवाल छोड़ दिया।

कुछ दिन तक जवाब नहीं दिया, क्योंकि हौसला जुटा रही थी। आगे क्या, किसके साथ और क्या। उन्होंने कहा कि तुम सबकुछ तो बन गई हो, अब क्या बनना चाहती हो। उन लोगों की आवाज बनना चाहती हूं। उनकी आवाज जिनकी किसी दफ्तर में पहुंचती नहीं और पहुंचती है। तो सुनी नहीं जाती है। उन लोगों की तरफ से देश के 80 सालों का हिसाब चाहिए। गत 29 अगस्त 2023 को निरीक्षण के दौरान एक महिला देवकली ने पानी की बजाए बच्चों के लिए स्कूल मांगा।

कहा कि बच्चों की पढ़ाई कक्षा 5 के बाद पहाड़ों में गुम होकर रह जाती है। नियम कानून के अनुसार स्वीकृत करने के तीन साल बाद भी आज तक स्कूल नहीं बना है। लोगों को न्याय के लिए भटकना पड़ा रहा है। राजस्व विभाग में रहते हुए पट्टा होने के बाद भी कब्जा नहीं दिया गया। पन्नियों में लपटे अन्याय का हिसाब चाहिए। आज बच्चे रात रात पढ़ रहे हैं और पेपर लीक हो जा रहा है। पांच साल तक तैयारी करने के बाद फैसला न्यायालय में पहुंच जाता है। किसान भूमि बेंचकर और महिलाएं गहने बेचकर कोडिंग पढ़ाई करा रहीं हैं।

उनका क्या होगा। आज ए आई आ रहा है। बहुत सारा काम ए आई करेगा। हर नौजवान को डर है। सवाल हो सकता था, सोच तो हो सकती थी। कोई सदन नहीं है, जहां इसकी बात हो सकती थी। हमारे बच्चे जिस ओर चल रहे हैं उसकी किसी को चिंता नहीं है। हमारी राजनीति में सबकुछ है। सत्ता है, शिलान्यास है, शोर है पर सोच नहीं है। मुझे उस न सोचने का हिसाब चाहिए। उद्देश्य केवल एक राजनेता बदलने का नहीं बल्कि राजनीति बदलनी होगी। इरादे की राजनीति, फ़िक्र की राजनीति और सोच की राजनीति। वह राजनीति नहीं चाहिए जो सीधी बनाकर सत्ता तक पहुंचती है। बल्कि लोगों को सुनती है।

मीरजापुर का चढ़ा सियासी पारा
आइएएस दिव्या मित्तल वीआरएस लेने के बाद जल्द राजनीतिक पारी की शुरुआत करेगी। इस बात का संकेत उन्होंने अपने संदेश से दे दिया है। मंगलवार का दिन, साड़ी का रंग और उसमें बने कमल के फूल की डिजाइन काफी कुछ बता रहे हैं। दिव्या मित्तल के राजनीति में आने से मीरजापुर में सियासी पारा हाई हो चुका है।