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    राजा भैया की एंट्री से बढ़ी BJP की टेंशन! मीरजापुर में NDA प्रत्याशी के खिलाफ कर सकते हैं चुनाव प्रचार

    Updated: Tue, 21 May 2024 04:12 PM (IST)

    अभी दो चरणों का चुनाव बाकी है। जनपद में अंतिम चरण में एक जून को वोट डाले जाएंगे। इससे पहले ही जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के नेता और कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया के एंट्री होने की खबर ने जनपद में भूचाल ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषक भी अब मानने लगे हैं कि राजा भैया की एंट्री के बाद सियासी लड़ाई अब और दिलचस्प हो गई है।

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    चुनाव से पहले मीरजापुर में राजा भैया की एंट्री, तो क्या गेम पलटने की तैयारी!

    जागरण संवाददाता, मीरजापुर। (Lok Sabha Election 2024) अभी दो चरणों का चुनाव बाकी है। जनपद में अंतिम चरण में एक जून को वोट डाले जाएंगे। इससे पहले ही जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के नेता और कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया के एंट्री होने की खबर ने जनपद में भूचाल ला दिया है।

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    राजनीतिक विश्लेषक भी अब मानने लगे हैं कि राजा भैया की एंट्री के बाद सियासी लड़ाई अब और दिलचस्प हो गई है। वह तो यहां तक कहने लगे हैं कि कहीं पूरी गेम ही न पलट जाए, ऐसा इसलिए क्योंकि केंद्रीय मंत्री और अपना दल (एस) नेता अनुप्रिया पटेल ने राजा भैया का लेकर जो बयान दिया है उसका असर अब उनके संसदीय क्षेत्र पर ही नहीं, आसपास की भी सीटों पर साफ तौर पर दिखने की संभावना है।

    अनुप्रिया पटेल के बयानों से क्षत्रिय समाज आहत

    ऐसा इसलिए भी क्योंकि क्षत्रिय समाज अनुप्रिया के बयान से काफी आहत और नाराज दिखाई दे रहा है। क्षत्रिय समाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाद पूर्वांचल में राजा भैया को सबसे बड़े क्षत्रियों के सर्वमान्य नेता मानते आए हैं। ऐसे में चुनाव से पहले इस प्रकार का बयान अशोभनीय बता रहे हैं।

    अभी तक राजनीतिक विश्लेषक यह मानते आ रहे हैं कि राजा भैया का जबरदस्त प्रभाव प्रतापगढ़, कौशांबी और इलाहाबाद में देखने को मिलता है। अब ऐसी स्थिति बन रही है कि मीरजापुर में भी इनका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

    यह है पूरा मामला

    गत दिनों मीरजापुर से एनडीए प्रत्याशी अनुप्रिया पटेल कुंडा के बेंती किला में भाजपा उम्मीदवार विनोद सोनकर के पक्ष में जनसभा को संबोधित कर रहीं थीं। इसी दौरान उन्होंने राजा भैया का नाम लिए बिना कहा कि लोकतंत्र में कोई भी राजा रानी के पेट से पैदा नहीं होता, वह तो ईवीएम से पैदा होता है।

    इस पर राजा भैया ने पलटवार करते हुए कहा है कि ईवीएम से राजा नहीं बल्कि जनसेवक पैदा होता है जो जनता की सेवा करता है। दोनों पक्षों की ओर से जुबानी जंग के बाद सियासी भूचाल आ गया है।

    जनपद में एक लाख क्षत्रिय मतदाता प्रत्याशी के जीत में निभाते अहम भूमिका

    जनपद में करीब एक लाख क्षत्रिय मतदाता है जो खुलकर वोट करते हैं। वर्ष 2019 के चुनाव में भी क्षत्रिय समाज ने भाजपा के पक्ष में जमकर मतदान किया था, ऐसे में एनडीए प्रत्याशी करीब साढ़े पांच लाख 91 हजार वोटों से जीती थीं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इस बार क्षत्रिय समाज नाराज दिखाई पड़ रहा है।

    तो क्या राजा भैया करेंगे अनुप्रिया पटेल के खिलाफ चुनाव प्रचार

    सूत्रों के मुताबिक राजा भैया अनुप्रिया पटेल के खिलाफ चुनाव प्रचार कर सकते हैं। यही नहीं, उनके आने से पहले जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के कुछ नेता मीरजापुर में अनुप्रिया पटेल के खिलाफ चुनाव प्रचार करेंगे। इसके लिए रणनीति तैयार कर ली गई है।

    वहीं दूसरी तरफ जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के मीरजापुर के जिला अध्यक्ष संजू मिश्रा का कहना है कि अनुप्रिया पटेल का बयान आहत करने वाला है। राजा भैया के आदेश का इंतजार है, जो आदेश मिलेगा उसके अनुसार कार्य किया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ सूत्र तो यह भी बता रहे हैं कि जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के कुछ नेता मीरजापुर पहुंच गए हैं। ऐसे में क्षत्रिय वोटों का बंटवारा हो सकता है।

    छानबे उपचुनाव में भी सर्वणों ने बनाई थी दूरी!

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि गत वर्ष 2023 में हुए छानबे उपचुनाव में भी सवर्णों ने भी दूरी बना ली थी। इसका नतीजा यह हुआ कि एनडीए गठबंधन की प्रत्याशी रिंकी कोल ने समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी कीर्ति कोल को सिर्फ 9589 मतों से ही पराजित कर पाई थी। उस समय क्षत्रिय मतदाताओं में नाराजगी सिर्फ इतनी थी कि नेता उनके यहां आते ही नहीं, ऐसे में बहुत कम संख्या में वह वोट देने बाहर निकले।

    यदि बिंद समाज बाहर नहीं निकलता तो शायद परिणाम कुछ और होते। इस बार तो नाराजगी बहुत ज्यादा हो गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि पूर्वांचल में राजा भैया को सबसे बड़े क्षत्रियों के सर्वमान्य नेता मानते आए हैं और उनके खिलाफ बयान काफी नागवार गुजरा है।

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