योगी आदित्यनाथ ने वर्तमान और भविष्य में मेरठ के विकास की पूरी गाथा को रखा सामने
CM Yogi Visits Meerut मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विक्टोरिया पार्क में अपने संबोधन में मेरठ के पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इस कालखंड की विराट यात्रा के बीच 10 मई 1857 को गर्वित मुद्रा में याद किया।

मेरठ, विवेक राव। बाबा औघड़नाथ के नाम से सीएम योगी के संबोधन का शुभारंभ...और उन्हीं के नाम से अंत। हर चार मिनट में एक बार बाबा औघड़नाथ का जिक्र। नौ बार एक भारत-श्रेष्ठ भारत की संकल्पना। राजा दुष्यंत के पुत्र भरत के नाम से मेरठ का संबंध बताने का गर्वभाव। यह मुख्यमंत्री योगी का क्रांतियोगी अवतार था, जिनके संबोधन में मेरठ का संस्कार, सुगंध और वैभव तैरता रहा।
10 मई 1857 को गर्वित मुद्रा में किया याद
योगी आदित्यनाथ ने विक्टोरिया पार्क में 24 मिनट 23 सेकेंड का संबोधन किया। मेरठ के पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए पुलकित नजर आए। मुख्यमंत्री ने महाभारतकालीन इतिहास के गौरवशाली परंपरा को भारतीय इतिहास की स्वर्णिम कड़ियों में माना। उन्होंने कालखंड की विराट यात्रा के बीच 10 मई 1857 को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को गर्वित मुद्रा में याद किया। सीएम ने कहा कि क्रांति दिवस पर मेरठ में चार घंटे की उपस्थिति स्मरणीय क्षण हैं। गंगा नदी के किनारे बसी संस्कृति और इंतिहास को याद किया।
मुख्यमंत्री ने मेरठ में वर्तमान में हो रहे विकास का भी उल्लेख किया। वर्तमान और भविष्य में विकास की पूरी गाथा को सामने रखा।
नए दौर में भी निखर रहा मेरठ
मुख्यमंत्री योगी ने संबोधन में मेरठ के अतीत से लेकर वर्तमान और भविष्य को भी नाप लिया। विकास की नई योजनाओं की रफ्तार को वरदान बताया। रैपिड रेल जीवनरेखा बन रही है तो 14 लेन के एक्सप्रेस-वे ने दिल्ली से मेरठ की दूरी कम कर दी। भविष्य में प्रयागराज से मेरठ को जोड़ने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे और जेवर हवाई अड्डा से मेरठ की सूरत संवर जाएगी। उन्होंने याद दिलाया कि क्रांतिकारियों ने मेरठ से दिल्ली तक पैदल यात्रा की थी। मेरठ के खेल उत्पादों की विश्वविख्यात विरासत का जिक्र करते हुए सरधना में बन रहे मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय की भी बात कही। मेरठ को क्रांति और प्रगतिशील नगर बताया। सीएम ने कहा कि मेरठ अपराधियों के लिए नहीं, बल्कि विकास के लिए जाना जा रहा है। प्रगति के असंख्य रास्ते खुल गए हैं। गर्व और मुस्कुराहट की धाराएं सीएम योगी के चेहरे पर रह रहकर उभरती रहीं। उन्होंने सांस्कृतिक राष्ट्वाद को नई ताकत देते हुए कहा कि आज से दस साल पहले कोई क्रांति दिवस मनाने नहीं आता था। तालियों की गड़गड़ाहट बता रही थी कि सांस्कृतिक व एतिहासिक चेतना नया करवट ले चुकी है।
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