World Earth Day 2022: प्रकृति से प्रेम कीजिए, हरी-भरी होगी पृथ्वी, अंधाधुंध दोहन से मानव जीवन खतरे में
World Earth Day 2022 मानव जीवन की सुरक्षा के लिए पेड़ों को बचाव बेहद ही जरूरी है। पृथ्वी को बचाने के लिए तमाम संगठन व सरकार चला रही अभियान। जल जंगल और जमीन के साथ जीवों को बचाने की हो रही कवायद। हमें भी इस कवायद में आगे आना चाहिए।

मेरठ, जागरण संवाददाता। प्राकृतिक संसाधनों के साथ पृथ्वी हमें ऐसी तमाम चीजें प्रदान करती है, जिससे जीवन में समृद्धि का संचार होता है, लेकिन समय के साथ बढ़ती इंसान की लालसा ने पृथ्वी को नुकसान भी पहुंचाया है। लगातार पेड़ों का कटान, जल दोहन और जीवों का शिकार पर्यावरण संतुलन के लिए खतरा बन रहा है। इसके अलावा बढ़ते प्रदूषण के कारण भी दिक्कत बढ़ रही है। हालांकि अब पृथ्वी को फिर से प्राकृतिक संपदा के मामले में समृद्ध करने के प्रयास शुरू किए गए हैं।
हस्तिनापुर सेंक्चुअरी
जनपद में धरती को फिर से हराभरा बनाने के लिए बड़ी संख्या में पौधारोपण किया गया। हालांकि देखरेख के अभाव में तमाम पौधे पेड़ बनने से पहले ही नष्ट हो गए। हस्तिनापुर सेंक्चुअरी में इसके सुखद परिणाम कई तरह से सामने आए हैं। यहां वन संपदा में इजाफा तो हुआ ही, साथ ही वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि भी दर्ज की गई है। ऐसे ही गंगा किनारे के क्षेत्र में भी जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिससे गंगा में रहने वाले जलीय जीवों को जीवन मिल सके।
जल बचाने की हो रही बड़ी पहल
वन संपदा में वृद्धि के साथ ही जनपद में भूगर्भ जल को समृद्ध करने के लिए बड़ा अभियान भी शुरू किया गया। जिले के हर पंचायत घर, स्कूल आदि में 750 से अधिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगाए गए। साथ ही तालाबों की सफाई कराकर यहां भी जल संचयन किया जा रहा है।
पृथ्वी दिवस के बारे में जानें
सन 1969 में कैलिफोर्निया के सांता बारबरा में तेल रिसाव की वजह से त्रासदी हो गई थी। इस हादसे के बाद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करने का फैसला लिया गया। इसके बाद 1970 में अमेरिकी सीनेटर गेलार्ड नेल्सन ने पर्यावरण की शिक्षा के तौर पर इस दिन की शुरुआत की थी। नेल्सन के आह्वान पर 22 अप्रैल को लगभग दो करोड़ अमेरिकियों ने पृथ्वी दिवस के पहले आयोजन में हिस्सा लिया था। पृथ्वी दिवस 2022 की थीम इन्वेस्ट इन अवर प्लानेट है।
मेरठ का वन क्षेत्र (एफएसआइ की रिपोर्ट-2021 अनुसार)
2590 वर्ग किमी - जनपद का कुल भू-भाग
00 वर्ग किमी - जनपद में अति घना वन क्षेत्र
34 वर्ग किमी - जनपद में मध्यम घना वन क्षेत्र
34.41 वर्ग किमी - जनपद में खुला वन क्षेत्र
68.41 वर्ग किमी - जनपद में कुल वन क्षेत्र
प्रकृति की करें देखभाल, तभी रह सकेंगे सुरक्षित
मेरठ : जिस तरह से प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है, इससे आने वाले समय में मानव जीवन पर संकट मंडरा सकता है। समय रहते हमें प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना होगा, तभी हम सुरक्षित रह सकते हैं। पृथ्वी दिवस के उपलक्ष्य में एनएस डिग्री कालेज में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने यह बात कही। कालचक्र इतिहास परिषद, इतिहास विभाग और सांख्यिकी विभाग की ओर से यह संगोष्ठी आयोजित हुई। इतिहास विभाग की अध्यक्ष डा. स्मिता शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पंचमहाभूतों का वर्णन है, उसमें पृथ्वी को विशेष महत्व दिया गया है। सारी गतिविधियां इसी ग्रह पर संचालित होती हैं। पूर्व प्राचार्य डा. सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि विश्व की सभी सभ्यताएं नदियों और वृक्षों के संरक्षण में ही फली-फूली हैं, इसलिए पर्यावरण संरक्षण में वृक्ष जल और वायु पर विशेष बल दिया गया है।
सबसे अधिक हानि ऐसे पहुंची
डा. देवेश चंद्र शर्मा ने कहा कि पर्यावरण को सबसे अधिक हानि महायुद्धों की विभीषिका ने पहुंचाई है। उपभोक्तावादी संस्कृति ने प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने के लिए मानव को प्रेरित किया है। सांख्यिकी विभाग और परिषद के अध्यक्ष डा. विवेक त्यागी ने कहा कि यदि हमने प्रकृति के साथ तालमेल नहीं रखा तो सबसे पहले हमारा ही विनाश होगा। डा. नवीन गुप्ता ने हर हाथ से एक वृक्ष लगाने और उसकी देखभाल का संकल्प दिलाया। अर्थशास्त्र विभाग की अध्यक्ष डा. चिन्मयी चतुर्वेदी, डा. देवेश टंडन ने संबोधित किया। डा. एस के घई ने वृक्षारोपण में सभी के भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। डा. हरीश, डा. कपिल, डा. सीमा शर्मा , डा. रेखा, डा. हेमंत, डा. नीरज, डा . दीप्ति, अर्चना, डा. रीना आदि मौजूद रहे।
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