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    Meerut News: यह सरकारी स्कूल अनूठा है, यहां स्मार्ट क्लास में पढ़ते हैं बच्चे...शिक्षक ने पलटी विद्यालय की काया

    Updated: Wed, 21 Aug 2024 10:31 AM (IST)

    Meerut News कुछ ऐसा करो कि लोग याद करें पिता के इन शब्दों को साकार किया है उच्च प्राथमिक विद्यालय बहलोलपुर माछरा मेरठ के सहायक अध्यापक अजय ने। कोरोना काल में शिक्षिका पत्नी को खाेने के 15 दिन बाद पिता भी साथ छोड़कर चले गए। इसके बाद स्कूल के विद्यार्थियों के लिए कुछ करने की ठानीं तो आज पूरे स्कूल की कायापलट दी।

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    Meerut News: शिक्षक अजय कुमार अपने स्कूल के बच्चों के साथ।

    मेरठ (राजेंद्र शर्मा)। Meerut News, Meerut Government School, Ajay Kumar यह सरकारी स्कूल अनूठा है। यहां टाट−पट्टी पर नहीं स्मार्ट क्लास में बच्चे पढ़ते हैं। पब्लिक स्कूलों से भी आकर्षक एक दो नहीं पूरे तीन पार्क हैं। स्कूल भवन बेहद आकर्षक हैं। जहां नया सत्र शुरू होते ही प्रवेश के लिए लाइन रहती है। गांव ही नहीं आसपास के अन्य गांव और कस्बा परीक्षितगढ़ तक के अभिभावकों का भी सपना होता है कि बस उनके बच्चे का इस स्कूल में प्रवेश हो जाए।

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    बात हो रही उच्च प्राथमिक विद्यालय बहलोलपुर माछरा की। यहां कार्यरत स्कूल के सहायक अध्यापक अजय कुमार ने अपने अथक प्रयास, लगन एवं निजी खर्च के साथ पंचायत के सहयोग से पूरे स्कूल की ही कायापलट दी। स्वयं को भी स्कूल के लिए समर्पित कर दिया है। वे दिन-रात अब स्कूल को और आकर्षक बनाने में जुटे रहते हैं। इस स्कूल को देखते ही ऐसा अहसास होता है कि किसी बड़े शहर के पब्लिक स्कूल में आ गए हों। राष्ट्रीय पर्व 26 जनवरी, 15 अगस्त एवं दीपावली पर स्कूल में आकर्षक सजावट की जाती है।

    स्कूल में बैठे विद्यार्थी।

    अजय ने पिता की प्रेरणा से की शुरूआत

    बहलोलपुर निवासी शिक्षक अजय कुमार ने पिता डा. राजेंद्र सिंह की प्रेरणा से पूरे स्कूल का ही कायापलट किया है। उनका कहना है कि पिताजी कहते थे कि कुछ ऐसा करो कि समाज और लोग आपके कार्य को याद करें। कहते हैं कि कोरोना काल में पहले मैंने पत्नी रूचि को खोया। वे भी फिरोजाबाद में शिक्षिका थीं। उनके 15 दिन बाद ही पिता को खोया। जिससे मैं ही नहीं पूरा परिवार टूट गया। तब स्कूल के बच्चों से सहारे ही मैंने खुद व परिवार को संभाला। तब से स्कूल के बच्चे ही मेरी अनमोल धरोहर है।

    यूं हुई स्कूल में बदलाव की शुरूआत

    सहायक अध्यापक अजय कुमार ने स्कूल में अक्टूबर-2018 में कार्यभार ग्रहण किया था। इसके बाद से ही वे दिन-रात स्कूल की कायापलट करने में दिन-रात जुट गए। पूर्व प्रधान अरुण कुमार से विशेष अनुरोध कर सबसे पहले अपने स्कूल की बाउंड्रीवाल करायी। शौचालय का निर्माण, मिट्टी भराव के साथ मुख्य गेट लगवाया। वहीं, वर्तमान ग्राम प्रधान डा. शिवदत्त से विशेष आग्रह करके कमरों में टाइल्स एवं आधारशिला लैब बनवायी तथा इंटरलॉकिंग करायी।

    स्कूल परिसर में तीन आकर्षक पार्क

    यही नहीं स्कूल परिसर में तीन पार्कों को आकर्षक लुक के साथ विकसित करने की जिम्मेदारी स्वयं निजी खर्च पर अजय कुमार ने संभाली। जिसमें कक्षा एक के कमरे का जीर्णोद्धार, वॉल पेटिंग, फर्नीचर, स्मार्ट टीवी, वॉटर कूलर, छह पंखे तथा इनवर्टर लगवाया। वहीं, वर्ष-2018 एवं 2024 में पूरे स्कूल की वॉल पेटिंग करायी। जिस पर अभी तक सात लाख रुपए से अधिक का खर्च आ चुका है। यही नहीं स्कूल परिसर में विकसित किए तीनों पार्कों की देखरेख के लिए प्रतिमाह पांच हजार की धनराशि स्वयं वेतन से ही माली को देकर खर्च करते हैं।

    प्रवेश के लिए रहती है मारामारी

    जिले के कई सरकारी स्कूलों में जहां प्रवेश के लिए न्यूनतम बच्चे भी नहीं होते। वहीं, देहात क्षेत्र में स्थित स्कूल में हर साल प्रवेश को लेकर भी मारामारी रहती है। गांव व आसपास के अधिकांश अभिभावक किसी पब्लिक स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की बजाय इसी स्कूल में बच्चों को वरीयता देते हैं।

    200 से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं

    जिस समय अजय आए थे, उस समय प्राथमिक व जूनियर दोनों स्कूलों में ही करीब 125 बच्चे थे। कम्पोजिट विद्यालय (प्राइमरी व जूनियर का एक साथ विलय) होने के बावजूद वर्तमान में विद्यालय में दो सौ से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। गांव के साथ कस्बा परीक्षितगढ़ तक से भी यहां बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। जबकि वहां पर कई स्कूल हैं। प्रधानाध्यापक श्रीकृष्ण वर्मा के नेतृत्व में सात अध्यापक पूरे स्कूल के शिक्षण कार्य को संभालते हैं। शिक्षण सहायक सामग्री की सहायता से बच्चों को पढ़ाते हैं।

    कक्षा 8 उत्तीर्ण छात्राओं की करते हैं मदद

    शिक्षक अजय कुमार बेटियों की शिक्षा में भी मदद करते हैं। स्कूल से कक्षा 8 पास करने वाली जो छात्राएं नौवीं कक्षा में प्रवेश लेती हैं, उनको वह अपनी ओर से किताबें भी निशुल्क प्रदान करते हैं, ताकि बेटियों की पढ़ाई में बाधा न आए। इस बार भी 15 छात्राओं को उन्होंने किताबें एवं स्टेशनरी प्रदान की है।

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    शिक्षक अजय कुमार के प्रयास से अन्य शिक्षक भी प्रोत्साहित होंगे

    बीएसए आशा चौधरी का कहना है कि शिक्षक अजय कुमार का प्रयास बेहद सराहनीय है। उन्होंने केवल स्कूल का कायापलट ही नहीं किया, बल्कि पूरे समाज का सरकारी स्कूलों को लेकर नजरिया ही बदल दिया है। उम्मीद है कि उनके इस प्रयास से अन्य शिक्षक शिक्षिकाएं भी प्रोत्साहित होकर अपने स्कूलों को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए प्रयास करेंगे। उनके प्रयास से यह बात भी साबित हो गई है की सकारात्मक दिशा में की गई पहल के सार्थक परिणाम सामने आते हैं।