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Suryakiran Aerobatic Team: जब हवा से बातें करते हैं 9 हाॅक जेट तो थम जाती हैं धड़कनें; वायुसेना की शान है 'सूर्यकिरण'

By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Sat, 19 Sep 2026 04:35 PM (IST)

Suryakiran Aerobatic Team: भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का प्रदर्शन केवल हवाई करतब नहीं, बल्कि स्पीड, स्पेस, टाइमिंग और ...और पढ़ें

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HighLights

  1. सूर्यकिरण टीम का प्रदर्शन स्पीड, स्पेस, टाइमिंग और कौशल का तालमेल।

  2. पायलटों के लिए हर सेकेंड गणना, निर्णय और अनुशासन महत्वपूर्ण।

जागरण संवाददाता, मेरठ। आसमान में कुछ क्षण के लिए सब कुछ जैसे थम जाता है। फिर अचानक नौ हाक जेट गर्जना करते हुए ऐसी रफ्तार से सामने आते हैं कि नजरें उनका पीछा करने से पहले ही आसमान के दूसरे छोर तक पहुंच जाती हैं। कभी विमान एक-दूसरे के बेहद करीब उड़ते हुए सटीक फार्मेशन बनाते हैं, कभी पलक झपकते ही लूप और रोल करते हैं और कभी ‘बज’ मनूवर (Manoeuvre)में दर्शकों के ऊपर से तेज गति से निकल जाते हैं।

जमीन पर खड़े लोगों के लिए यह रोमांच और रोमांचक दृश्य है, लेकिन काकपिट में बैठे पायलटों के लिए हर सेकेंड गणना, निर्णय और अनुशासन का होता है। सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का प्रदर्शन दरअसल केवल हवाई करतब नहीं, बल्कि स्पीड, स्पेस, टाइमिंग, गणित और मानवीय कौशल के बेहद सटीक तालमेल का प्रदर्शन है।

400-500 फीट की सामान्य ऊंचाई, विशेष मनूवर में 100 फीट तक नीचे आते हैं विमान

सामान्य एरोबैटिक डिस्प्ले करीब 400 से 500 फीट की ऊंचाई पर किया जाता है। हालांकि कुछ विशेष मनूवर के दौरान विमान करीब 100 फीट तक नीचे आ जाते हैं। इतनी कम ऊंचाई पर तेज रफ्तार से विमान उड़ाने के लिए पायलटों के बीच असाधारण तालमेल और परिस्थितियों की लगातार निगरानी जरूरी होती है।

फार्मेशन उड़ान में सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक जेट के पीछे बनने वाला वेक यानी अशांत वायु प्रवाह भी है। किसी दूसरे विमान के वेक में आने से विमान के नियंत्रण पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि फार्मेशन में प्रत्येक विमान की स्थिति, ऊंचाई, गति और दूसरे विमान से दूरी बेहद सटीक रखी जाती है।

‘बज’ में कुछ क्षण की खामोशी और फिर कानों को चीरती गर्जना

सूर्यकिरण के सबसे रोमांचक मनूवर में ‘बज’ भी शामिल है। इसमें कुछ क्षणों के लिए वातावरण शांत दिखाई देता है और फिर विमान तेज गति से दर्शकों के ऊपर से गुजरता है। इसके अलावा लूप, रोल, बैरल रोल और क्लोवर जैसे वर्टिकल मनूवर भी प्रदर्शन का हिस्सा होते हैं।

दर्शकों को ये करतब कुछ सेकेंड के लगते हैं, लेकिन इनके पीछे पायलटों की लंबी तैयारी और लगातार अभ्यास होता है। एक छोटी सी गलती की गुंजाइश भी नहीं होती।

डेढ़ घंटे की उड़ान के बाद शरीर से ज्यादा दिमाग थकता है

स्क्वाड्रन लीडर तुषार गर्ग के अनुसार एरोबैटिक डिस्प्ले के दौरान करीब एक से डेढ़ घंटे तक शरीर और दिमाग अपनी उच्च क्षमता पर काम करते हैं। लैंडिंग के बाद शारीरिक थकान की तुलना में मानसिक थकान अधिक महसूस होना इस उड़ान की जटिलता को दर्शाता है।

हर मनूवर में मैथ्स, फिजिक्स, टाइमिंग, स्पीड और स्पेस का सटीक तालमेल जरूरी होता है। पायलट को यह लगातार ध्यान रखना होता है कि उसका विमान किस स्थिति में है, अगले क्षण उसे कहां होना है और फॉर्मेशन के बाकी विमानों के साथ उसका अंतर कितना है।

हवा में पायलट, जमीन पर सेफ्टी पायलट—एक रेडियो चैनल पर नजर

सूर्यकिरण के प्रदर्शन में सुरक्षा व्यवस्था भी बहुस्तरीय होती है। जमीन पर मौजूद सेफ्टी पायलट और कमेंटेटर एक ही रेडियो चैनल के माध्यम से हवा में मौजूद पायलटों से जुड़े रहते हैं।

यदि किसी समय पक्षी टकराने का खतरा दिखाई देता है या कोई दूसरी असुरक्षित स्थिति पैदा होती है तो सेफ्टी पायलट तत्काल मनूवर अबॉर्ट करने या विमान को क्लाइंब करने का निर्देश दे सकता है। यानी आसमान में रोमांच के साथ सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहती है।

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मार्च से सितंबर तक ट्रेनिंग, सितंबर से मार्च तक एयर शो

सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का होम बेस कर्नाटक में है। टीम का प्रशिक्षण चक्र मार्च से सितंबर तक चलता है, जबकि सितंबर से मार्च तक डिस्प्ले सीजन रहता है। विशेष शूटिंग के लिए मुख्यालय की अनुमति से विमानों पर गोप्रो कैमरे भी लगाए जाते हैं। हिंडन से निर्धारित प्रदर्शन क्षेत्र तक विमान सीधे उड़ान भरते हुए करीब दो मिनट में पहुंच सकते हैं, जबकि घूमकर आने में लगभग चार मिनट लगते हैं।

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1996 में गठन, अब तक 800 से ज्यादा एयर शो

सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का गठन 1996 में किया गया था। वर्ष 2012 से 2016 के बीच टीम का पुनर्गठन किया गया। इसके बाद टीम ने अपनी एरोबैटिक क्षमता और प्रदर्शन शैली को और मजबूत किया। अब तक सूर्यकिरण 800 से अधिक एयर शो कर चुकी है और भारतीय वायुसेना की एरोबैटिक क्षमता का प्रमुख प्रतीक बन चुकी है।

हाक जेट में सुपरसोनिक क्षमता, लेकिन शो में नियंत्रण सर्वोपरि

सूर्यकिरण में इस्तेमाल होने वाला हाक विमान अपनी क्षमता के लिए जाना जाता है। यह विमान करीब 1.2 मैक, यानी 1400 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की सुपरसोनिक गति हासिल कर सकता है। ध्वनि की गति से तेज उड़ान के दौरान सोनिक बूम पैदा होता है, जिससे तेज ध्वनि उत्पन्न होती है। इसलिए ऐसी उड़ान विशेष रूप से निर्धारित और अधिकृत क्षेत्रों में ही की जा सकती है।

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लेकिन सूर्यकिरण का असली कौशल केवल विमान को तेज उड़ाना नहीं है। असल चुनौती उसकी शक्ति को मिलीमीटर स्तर की सटीकता और सेकेंड के अंशों में नियंत्रित करना है। यही वजह है कि जब नौ हाक विमान आसमान में एक साथ पैटर्न बनाते हैं तो दर्शकों को दिखाई देने वाला हर मनूवर पायलटों के लिए अनुशासन, अभ्यास, गणना और भरोसे की परीक्षा होता है।