Surya Kiran: 900 KM प्रति घंटे की रफ्तार में AI नहीं, पायलटों की अद्भुत सटीकता, मशीन और टाइमिंग का परफेक्ट तालमेल
Surya Kiran Aerobatic Team: भारतीय वायु सेना की सूर्य किरण एरोबेटिक टीम के विमान 19 और 20 सितंबर को मेरठ में रोमांचक करतब दिखाएंगे।

HighLights
हवा की दिशा बदलते ही बदलती है स्पीड और फार्मेशन।
विमानों के बीच लगभग पांच मीटर की दूरी ही रहती है।
अमित तिवारी, मेरठ। आसमान में महज पांच मीटर के अंतर पर उड़ते नौ जेट, 900 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार, 100 फीट तक नीचे जाकर किए जाने वाले जटिल मनूवर और हर सेकेंड बदलती हवा के साथ स्पीड का रियल-टाइम हिसाब। यह किसी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (SKT) की हकीकत है।
आसमान में जब सूर्यकिरण के हाक विमान करतब दिखाएंगे, तब दर्शकों को रोमांच नजर आएगा, लेकिन उसके पीछे महीनों की ट्रेनिंग, हजारों घंटे का फ्लाइंग अनुभव और अत्यंत सटीक गणना काम करती है।
सूर्यकिरण की सबसे खास बात यह है कि इसके एरोबैटिक प्रदर्शन में एआइ का इस्तेमाल नहीं होता। यह पूरी तरह ‘मैन एंड मशीन’ का खेल है। पायलट को विमान की गति, एल्टीट्यूड, ऊंचाई, हवा की दिशा और फार्मेशन में अपनी स्थिति का हिसाब उड़ान के दौरान ही करना पड़ता है।
पांच मीटर का फासला, भरोसे की सबसे बड़ी परीक्षा
फार्मेशन में आठ पायलट सबसे आगे चल रहे कमांडिंग आफिसर के रेफरेंस को आधार बनाकर उड़ते हैं। विमानों के बीच लगभग पांच मीटर की दूरी रहती है। इतनी कम दूरी पर तेज गति से उड़ान भरने के लिए केवल तकनीकी दक्षता पर्याप्त नहीं है।
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हर पायलट को अपने साथी और फार्मेशन लीडर की गतिविधियों पर पूरा भरोसा रखना पड़ता है। फार्मेशन की ‘स्पाइन’ में नंबर एक, चार और सात के विमान रहते हैं। नंबर-एक पर टीम के कमांडिंग आफिसर ग्रुप कैप्टन अजय दशरथी उड़ते हैं, जबकि नंबर-चार पर फ्लाइट कमांडर होते हैं। दाईं ओर सम संख्या वाले दो और छह और बाईं ओर विषम संख्या वाले तीन और पांच नंबर विमान अपनी निर्धारित स्थिति बनाए रखते हैं।
लूप में ऊपर जाते ही घटती है स्पीड, फिर भी टूटना नहीं चाहिए फार्मेशन
एरोबैटिक फ्लाइंग में विमान का एल्टीट्यूड और स्पीड लगातार बदलते हैं। तीन आयामी डायमंड आकार में लूप करते समय विमान ऊपर उठता है तो उसकी गति कम होती है। पायलट को उसी समय विमान की ऊर्जा बनाए रखने के साथ अपनी फार्मेशन पोजिशन भी कायम रखनी होती है।
क्रासिंग जैसे मनूवर में चुनौती और बढ़ जाती है। हवा में विमान को ‘रोक’ पाना संभव नहीं होता। इसलिए हवा की गति और दिशा के अनुसार दोनों विमानों को अपनी गति और उड़ान पथ को रियल-टाइम में एडजस्ट करना पड़ता है। यही वह गणित है, जिसमें सेकेंड के छोटे से अंतर का भी बड़ा महत्व हो सकता है।
