'पिस्टल' का खाकी अवतार! असली नोट दिखाकर कागज की गड्डी थमाने वाले हिस्ट्रीशीटर का हैरान करने वाला खेल, सिपाही बने जोड़ीदार
Meerut News: हिस्ट्रीशीटर साजिद पिस्टल पश्चिम उत्तर प्रदेश में नकली नोटों के नाम पर ठगी की वारदातें कर रहा था, ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
मेरठ, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर समेत कई जनपदों में लोगों से ठगी कर चुका।
साजिद पिस्टल ठगी की रकम में दोनों सिपाहियों की बराबर हिस्सेदारी होती थी।
जागरण संवाददाता, मेरठ। हिस्ट्रीशीटर साजिद पिस्टल ने पिछले चार वर्षों में पश्चिम उत्तर प्रदेश में नकली नोटों के नाम पर ठगी की कई वारदातें की हैं। दो जुलाई 2022 को साजिद पिस्टल और उसके गिरोह के सदस्यों को नकली नोटों की गड्डी के साथ पकड़ा गया था।
इस गिरोह में शास्त्रीनगर के प्रशांत और मोहसिन, तथा ज्ञानपुर निवासी साजिद को जेल भेजा गया था। पहले साजिद पिस्टल खुद खाकी वर्दी पहनकर पुलिसकर्मी बन जाता था, लेकिन इस बार उसने गिरोह में भावनपुर थाने के दो सिपाहियों को शामिल कर लिया। सिपाहियों को भी ठगी का आधा हिस्सा बांटता था।
22 जुलाई 2022 को पुलिस ने होमगार्ड सतेंद्र शर्मा, उसके भाई कृष्ण शर्मा, मोहसिन, नाजिम महताब और अरशद को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से 15 हजार के असली और 53 लाख कीमत के नकली नोट बरामद हुए थे। यह गिरोह लोगों को असली नोट नकली बताकर देता था। पहले इन नोटों को बाजार में चलवाया जाता था, जिससे कोई भी इन्हें पकड़ नहीं पाता था।
इस कारण लोग इन नोटों को लेने के लिए तैयार हो जाते थे। बाद में यह गिरोह कागज की गड्डी बनाकर ऊपर और नीचे असली नोट लगा देता था। डिलीवरी के समय पुलिसकर्मी बनकर मौके पर पहुंच जाते थे। नकली नोट लगने वाले डर जाते थे और अपने असली नोट छोड़कर भाग जाते थे।
साजिद पिस्टल लगातार चार साल से उक्त धंधे में शामिल है, जो मेरठ के अलावा मुजफ्फरनगर से भी जेल जा चुका है। हाल ही में भावनपुर पुलिस ने साजिद पिस्टल को जानलेवा हमले में जेल भेजा था। जमानत पर आने के बाद फिर से साजिद पिस्टल नकली नोटों के नाम पर ठगी का धंधा करने लगा था।
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फिर दागदार हुई खाकी
लोहियानगर के दो दारोगा ने धागा कारोबारी को अगवा कर 20 लाख की रकम वसूली थी। उक्त दोनों दारोगा को पुलिस ने जेल भेजा था, जो जमानत पर आ चुके है। उसके अलावा रेलवे रोड थाने से भी वारंटी से रकम वसूली पर नौचंदी थाने के दारोगा और सिपाही जेल जा चुके है। इसी तरह से भावनपुर थाने के 2025 बैंच के दो सिपाहियों ने ही हिस्ट्रीशीटर के साथ मिलकर लूट की वारदात को अंजाम दिया। दोनों सिपाहियों की विभागीय जांच भी बैठा दी गई है। दोनों सिपाहियों की नौकरी अभी एक साल भी पूरी नहीं हुई है।
