प्रेमचंद की पत्नी शिवरानी ने मेरठ में बताए थे कहानी के सरोकार
पौराणिक नगरी मेरठ की साहित्य व कला में रुचि और लगाव किसी से छिपा नहीं है। क्रांति धरा की पहचान खुद कई लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकारों से है। 5 दिसंबर को कथा सम्राट प्रेमचंद की पत्नी शिवरानी देवी की पुण्यतिथि है। शिवरानी भी साहित्यकार थीं।

मेरठ, जेएनएन। पौराणिक नगरी मेरठ की साहित्य व कला में रुचि और लगाव किसी से छिपा नहीं है। क्रांति धरा की पहचान खुद कई लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकारों से है। यहां के कला प्रेमियों के बुलावे पर महान विभूतियों का आना-जाना लगा रहा। 5 दिसंबर को कथा सम्राट प्रेमचंद की पत्नी शिवरानी देवी की पुण्यतिथि है। शिवरानी भी साहित्यकार थीं। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की जीवनी 'प्रेमचंद: घर में' लिखी थी। मेरठ भी शिवरानी देवी के ओजस्वी भाषण का साक्षी रहा है।
वर्ष 1937 में सात अप्रैल से नौ अप्रैल तक मेरठ में गल्प सम्मेलन हुआ था। इसमें व्याख्यान देते हुए शिवरानी ने कहा था, बाहर के लोग हमारी गल्पों (तत्कालीन समय में कहानियों को गल्प कहा जाता था) को पढ़कर यही सोचते होंगे कि यहां वालों को प्रेमक्रीड़ा के सिवाय कोई काम नहीं है। देश नाना प्रकार के संकटों में पड़ा हुआ है और हम हैं कि कामुकता के नशे में मस्त हैं। जीवन को संपूर्ण रूप में अंकित करना चाहिए। उपर्युक्त उद्धरण डा. क्षमाशंकर पांडेय की पुस्तक 'विस्मृत रचनाकार शिवरानी देवी' से लिया गया है। डा. पांडेय ने लिखा है कि उस सम्मेलन की स्वागत अध्यक्ष कमला चौधरी थीं। कमला हापुड़ निवासी थीं, जो तब मेरठ का ही भाग था। कमला चौधरी भी तत्कालीन समय की प्रखर रचनाकार थीं।
तीन दिवसीय सम्मेलन की रिपोर्ट चांद पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। चांद पत्रिका का संपादन साहित्यकार महादेवी वर्मा करती थीं। डा. पांडेय ने बताया कि प्रेमचंद की पत्नी होने के कारण कई बार तो लोग यही समझते थे कि प्रेमचंद ही अपनी पत्नी के नाम से रचनाएं लिख रहे हैं। इन आरोपों का स्वयं प्रेमचंद ने खंडन किया था। सम्मेलन में भाषण का अंत करते हुए शिवरानी देवी ने कहा था कि गल्पों में प्रचार भावना न रहते भी जीवन का कोई न कोई सत्य, सौंदर्य का कोई न कोई अंग, आत्मा की कोई न कोई झलक जरूर होनी चाहिए। प्रयागराज निवासी पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर डा. क्षमाशंकर पांडेय ने बताया कि 20वीं शती के पूर्वार्ध में जब नारी लेखन हाशिए पर था, तब शिवरानी जी की कहानी के सरोकार के बारे में सोचकर उनके साहित्यिक व्यक्तित्व की गहराई का पता चलता है। स्त्रीदर्पण फेसबुक प्लेटफार्म पर मनाई जाएगी पुण्यतिथि देश की महिला साहित्यकारों को समर्पित फेसबुक पेज स्त्रीदर्पण नाम से बनाया गया है।
एनएएस कालेज की एसोसिएट प्रोफेसर डा. प्रज्ञा पाठक ने बताया कि मेरठ में ¨हदी लेखन से जुड़े कई साहित्यकर्मी और छात्र इसमें भाग लेंगे। फेसबुक पेज के संचालक विमल कुमार ने बताया कि शिवरानी जी की 44वीं पुण्यतिथि पर उनके द्वारा रचित कहानियों का पाठ होगा और विद्वानों के उद्बोधन होंगे। शिवरानी देवी- एक परिचय पिता - मुंशी देवी प्रसाद 1906 में कथा सम्राट प्रेमचंद से विवाह 1930 में देश के स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने के कारण दो माह की जेल हुई मृत्यु - पांच दिसंबर 1976 साहित्य सृजन -'प्रेमचंद: घर में' आत्मकथा सहित, 46 कहानियां और विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित लेख -उनकी अधिकांश रचनाएं अप्राप्त हैं, जिन्हें खोजने का कार्य चल रहा है।
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