पुलिस ने ढूंढ निकाले सारे रास्ते, SSP विपिन ताडा का चक्रव्यूह तैयार; यूपी के इस जिले से बाहर निकलना मुश्किल!
मेरठ में संगीन वारदातों के बाद बदमाशों के भागने से रोकने के लिए पुलिस ने 150 नाकों को चिन्हित कर नाकाबंदी योजना लागू की है। सूचना मिलते ही पुलिस 10 मिनट में घेराबंदी करेगी। शहर में 42 और देहात में 30 प्रमुख मार्गों पर चेकिंग अभियान चलाया गया जिसमें 8102 संदिग्धों की जांच की गई। 35 वाहन सीज और 664 चालान किए गए।

लोकेश पंडित, मेरठ। संगीन वारदातों के बाद बदमाश जिले से बाहर न निकल पाए, इसके लिए पुलिस ने ' नाकाबंदी ' को अंतिम रूप दे दिया है। वारदात के बाद बदमाशों के लिए सुरक्षित रास्ता बने 150 नाके (पाइंट) को पुलिस ने चिंहित किया है। व्यवस्था की गई है कि सूचना फ्लैश होते ही इन नाको की पुलिस दस मिनट में घेराबंदी कर ले। इसके बाद बिना जांच पड़ताल के न तो यहां से कोई वाहन निकल सकें, ना ही कोई संदिग्ध।
नाकाबंदी के इन पाइंट में पुलिस ने शहर व देहात के एक थाने से दूसरे थाने को जोड़ने वाले मार्ग को हाईवे को शामिल किया है। शहर के कुछ प्रमुख चौराहों को पुलिस ने नाका बनाया है। शहर के 28 व ग्रामीण क्षेत्रों में 48 चौराहों को हाट स्पाट बताते हुए इसमें शामिल किया गया है।
जबकि देहात में 72 पाइंट ऐसे हैं, जिन्हें चेकिंग का नया नाका बनाया गया है। एसएसपी डा. विपिन ताडा की माने तो काफी होमवर्क के बाद यह नाकाबंदी प्लान तैयार किया गया है। विभिन्न स्तर पर विचार मंथन व परीक्षण किया जा रहा है। जरूरत व परिस्थिति के लिहाज से इसमें बदलाव व नए नाके शामिल किए जाएंगे।
मेरठ में नाकाबंदी
लंबे समय से जिले में नाकाबंदी की योजना तैयार की जा रही थी। हाल ही में एडीजी डीके ठाकुर व डीआइजी कलानिधि नैथानी ने बदमाशों की वारदात के बाद तत्काल घेराबंदी व जिले से बाहर न निकलने देने की योजना बनाने का आदेश दिया था। इसके बाद एसएसपी डा. विपिन ताडा ने अधिकारियों संग बैठक कर जिले की नाकाबंदी योजना को अंतिम रूप दिया।
नाकाबंदी योजना के तहत शहर व देहात के लिए अलग-अलग रणनीति तैयारी की गई है। शहर में जहां चौराहों को तवज्जो दी गई है, वहीं देहात में संपर्क मार्ग व हाईवे के एक थाने से दूसरे थाने को जोड़ने वाले क्षेत्र, सड़क व मार्ग को सम्मिलित किया गया है। हाईवे के लिंक रोड व देहात की ओर जाने वाले संवेदनशील मार्ग को भी सूचीबद्ध किया गया है।
एसएसपी ने बताया कि पूरे जिले में फिलहाल 150 पाइंट चिंहित किए गए हैं। अब तक के होमवर्क के बाद समझ आ रहा है कि इन मार्ग पर यदि कायदे से नाकाबंदी की जाए तो बदमाशों जिले से वाहन नहीं निकल पाएगा। इसमें गंगनहर पटरी मार्ग, मेरठ-करनाल को जोड़ने वाले दादरी-सलावा मार्ग, सरधना-पारसी मार्ग, लावड- गंगानगर मार्ग, मोहउद्दीनपुर-खरखौदा मार्ग, मेरठ-परीक्षितगढ़-बहसूमा मार्ग, गंगानगर-परीक्षितगढ़ रोड मार्ग समेत विभिन्न मार्ग है, जिन्हें सूचीबद्ध किया गया है।
उन्होंने कहा, हो सकता है कुछ ऐसे रास्ते बच गए हो, परिस्थिति व घटनाक्रम के अनुसार ऐसे क्षेत्र सामने आने पर उन्हें भी नाकाबंदी सूची में शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद, सिटी व देहात के एसपी व सीओ से भी मंत्रणा कर इस सूची का अंतिम रूप दिया है। अब इस पर शिद्दत से कार्य शुरू किया जाएगा। इसके बाद जहां बदलाव की जरूरत होगी उसे गंभीरता से किया जाएगा।
जिले में चला आपरेशन नाकाबंदी
सोमवार को एसएसपी ने जिले की नाकाबंदी के लिए चलाए प्लान को परखा। इस दौरान उन्होंने जिले के सभी नाको पर सुबह दस से शाम चार बजे तक चेकिंग अभियान शुरू कराया। मकसद तैयार नाकाबंदी प्लान की कमियों को देखना व उसे दूर करना था। आठ घंटे चले होमवर्क में पुलिस ने सड़कों पर टहल रहे व वाहनों से जा रहे 8000 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिया। उनसे गहन पूछताछ की। उनका पूरा अपराधिक रिकार्ड खंगाला गया।
संतुष्ट होने के बाद पुलिस ही इन्हें छोड़ा गया। इस कार्रवाई से हड़कंप मचा रहा। 150 नाको पर चली कार्रवाई में संदिग्ध मिले 35 वाहनों को सीज भी किया गया। एसएसपी डा. विपिन ताडा ने बताया कि मंगलवार सुबह शहर के 42 व देहात, 30 पाइंट, शहर के 28 व देहात में 48 चौराहे पर एक साथ चेकिंग शुरू की गई। उन्होंने बताया कि सोमवार को आपरेशन नाकाबंदी में 4826 संदिग्ध वाहनों को चेक किया गया। इनमें से 35 को सीज व 664 के चालान किया गया।
एसएसपी डा. विपिन ताडा। फाइल फोटो।
8102 संदिग्ध लोगों को पूरे जिले में हिरासत में लेकर उनकी जांच पड़ताल की गई। संबंधित थानों से उनका पूरा इतिहास जानने के बाद ही उन्हें छोड़ा गया। इनमें मेरठ शहर में ही 4965 व देहात में 3137 लोगों की जांच की गई। शहरी थानों में सबसे ज्यादा कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र में 490 लोगों की जांच की गई। सिविल लाइंस ऐसा थाना रहा जहां पुलिस को कोई संदिग्ध ही नहीं मिला।
देहात में सबसे ज्यादा संदिग्धों की जांच किठौर थाने जबकि परीक्षितगढ़ थाना पुलिस को मात्र 87 संदिग्ध लोग ही मिले। शहर में सबसे ज्यादा वाहनों के चालान कंकरखेड़ा में 23 व सिविल लाइंस पुलिस यहां भी सबसे फिसड्डी रही। एक भी वाहन का चालान नहीं किया गया। एसएसपी ने बताया कि इस कार्रवाई के सार्थक परिणाम सामने आए हैं। व्यवस्था बनाने को औचक अभियान चलाए जाएंगे ताकि पुलिस की सक्रियता बरकरार रहे। लापरवाही पर संबंधित थाना प्रभारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।