बागपत, जेएनएन। जिला कारागार में हुई किसान ऋषिपाल की हत्या के केस पर सवाल खड़े हो गए हैं। ऋषिपाल के रिश्तेदारों का आरोप है कि यह घटना जेल में हुए विवाद के कारण नहीं हुई, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से की गई है। इसमें जेल प्रशासन की संलिप्तता है। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें बागपत पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है। केस की सीबीआइ जांच होनी चाहिए।

किसान ऋषिपाल के बहनोई एडवोकेट वीरेंद्र कुमार का कहना कि वारदात की बाबत पुलिस की कहानी में जरा भी सच्चाई नहीं है। पहले तो ऋषिपाल की आरोपित बंदियों से कहासुनी नहीं हुई, यदि मान भी लिया जाए कि कहासुनी हुई है तो इसके प्रतिशोध में इतनी बड़ी घटना का होना संभव नहीं है। वहीं जेल के अफसर खुद ही कह रहे हैं कि ऋषिपाल व बबलू के बीच हुई कहासुनी में सुलह-समझौता करा दिया था।

वीरेंद्र सिंह का कहना है कि यह घटना पूरे प्लान के तहत की गई है। इस घटना के पीछे बसी गांव में चली आ रही रंजिश है। इस घटना में जेल प्रशासन की संलिप्तता है, क्योंकि बैरक समय से पहले खोली गई। जब हमला किया गया, उस समय ऋषिपाल और अमित दोनों बैरक में सोए हुए थे। यदि जेल स्टाफ की संलिप्तता न होती, तो यह घटना न हो पाती।

सतसिंह के पैरोल के लिए भटकते रहे रिश्तेदार

ऋषिपाल के पिता सतसिंह जेल में बंद हैं। ऋषिपाल के अंतिम संस्कार में पिता सतसिंह शामिल हो सके, इसलिए उनके पैरोल के लिए रिश्तेदार अफसरों के दफ्तरों व आवास पर चक्कर लगाते रहे, लेकिन पैरोल नहीं मिला।  

Posted By: Prem Bhatt

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