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मेरठ में दम घोंटने वाली क्लोरीन गैस के रिसाव की वजह आई सामने, STP से हटाया लीकेज वाला कैप्सूल

By Dileep Patel Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Wed, 16 Sep 2026 07:24 PM (IST)

Meerut News: मेरठ के पल्लवपुरम स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से क्लोरीन गैस रिसाव के बाद लीकेज वाला कैप्सूल हटा दिया ...और पढ़ें

पल्लवपुरम सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से हटाया गया लीकेज वाला कैप्सूल।

पल्लवपुरम सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से हटाया गया लीकेज वाला कैप्सूल। 

HighLights

  1. अब अस्थायी रूप से लिक्विड क्लोरीन सोडियम हाइपोक्लोराइड उपयोग हो रहा।

  2. भविष्य में यूवी प्रकाश कीटाणु शोधन तकनीक के इस्तेमाल पर मंथन जारी।

जागरण संवाददाता, मेरठ। क्लोरीन गैस के रिसाव से मंगलवार देर शाम मची दहशत के बाद पल्लवपुरम फेस-दो स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से बुधवार को लीकेज वाला कैप्सूल (सिलिंडर) हटा दिया गया है। क्लोरीन गैस मिलाने के सिस्टम को बंद कर दिया गया है।

उसके स्थान पर सीवेज शोधन के दौरान बैक्टीरिया के खात्मे के लिए लिक्विड क्लोरीन सोडियम हाइपो क्लोराइड मिलाने की अस्थायी व्यवस्था बनाई गई है। बिजली पैनल के फाल्ट, कास्टिक सोडा टैंक सहित सभी उपकरणों का परीक्षण करके एसटीपी संचालन शुरू कर दिया गया है।साथ ही भविष्य में सुरक्षित व्यवस्था बनाने के लिए क्लोरीन की जगह अल्ट्रा वायलेट प्रकाश कीटाणु शोधन तकनीक की व्यवस्था बनाने पर अधिकारियों के बीच मंथन शुरू हो गया है।

गैस रिसाव से व्यवस्था की पोल खुली  

पल्लवपुरम स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में हुए खतरनाक क्लोरीन गैस रिसाव की घटना ने एसटीपी संचालन और उनके रखरखाव, निगरानी की बदहाल और लाचार व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने जलनिगम विद्युत यांत्रिकी से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है।

बुधवार सुबह जलनिगम विद्युत यांत्रिकी के अधिशासी अभियंता सुदीप सिंह, अवर अभियंता बबलू कुमार, वीए टेक कंपनी के सलाहकार राम रतन, तकनीक विशेषज्ञ जगदीश और दौराला आर्गेनिक के सेफ्टी हेड विशाल गुप्ता की टीम एसटीपी पर पहुंची।

क्लोरीन कैप्सूल के वाल्व में थी तकनीकी खराबी 

जांच में सामने आया है कि 10 दिन पहले गाजियाबाद मसूरी स्थित माडर्न एल्कली कंपनी से मंगाए गए क्लोरीन कैप्सूल के वाल्व में ही तकनीकी खराबी थी। आपरेटर राधे श्याम ने नियमानुसार सप्लाई लाइन हटाने से पहले वाल्व बंद कर दिया था, लेकिन खराब वाल्व से गैस का तेज रिसाव शुरू हो गया। जिससे आपरेटर गैस की चपेट में आ गया था और उसकी हालत बिगड़ गई। 
यह हादसा केवल उपकरण की खराबी तक सीमित नहीं रहा बल्कि आपातकालीन सुरक्षा तंत्र की एक के बाए एक फेल होते चले और स्थिति को गंभीर बना दिया।

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प्लांट में क्लोरीन रिसाव की आपात स्थित से निपटने के लिए कास्टिक सोडा का टैंक और उससे जुड़े ब्लोअर मौजूद थे। यदि ब्लोअर चालू हो जाते तो वे क्लोरीन को खींच लेते और कास्टिक सोडा से केमिकल रिएक्शन होकर गैस का दुष्प्रभाव खत्म हो जाता। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ मिनटों के लिए ब्लोअर चले लेकिन फिर ऐन मौके पर बिजली गुल हो गई। प्लांट में जनरेटर तो था लेकिन घबराया आपरेटर बाहर भाग चुका था और उसे चलाने वाला कोई दूसरा कर्मचारी वहां तैनात ही नहीं था।

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नमी के कारण हुआ बिजली के पैनल में फाल्ट

क्लोरीन गैस फैलने पर जब पानी का छिड़काव किया गया तो नमी के कारण बिजली के पैनल में ही शार्ट सर्किट (फाल्ट) हो गया। एक के बाद एक सारे सुरक्षा के इंतजाम धरे के धरे रह गए।
जलनिगम विद्युत यांत्रिकी के अधिशासी अभियंता सुदीप सिंह ने बताया कि लीकेज वाला कैप्सूल हटाकर उसे वापस कंपनी को भेज दिया गया है। कंपनी से भी सप्लाई करने से पहले की गई तकनीकी रिपोर्ट मांगी गई है। आगे कंपनी से क्लोरीन भरे कैप्सूल नहीं लिए जाएंगे।

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