मेरठ: गैस रिसाव से दहशत बरकरार, लोग बोले- खांसी, सिरदर्द... सांस लेने में हुई परेशानी; आबादी से दूर हो STP
मेरठ के पल्लवपुरम स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में क्लोरीन गैस रिसाव से दहशत फैल गई, जिससे कई लोगों को सांस ...और पढ़ें

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के कर्मचारी। जागरण
HighLights
पल्लवपुरम में एसटीपी में क्लोरीन गैस का हुआ था रिसाव।
गैस रिसाव से 14 लोग अस्पताल में भर्ती हुए।
जागरण संवाददाता, मेरठ। पल्लवपुरम फेस-दो स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में मंगलवार देर शाम क्लोरीन गैस के रिसाव की घटना ने आसपास के लोगों में दहशत पैदा कर दी। गैस रिसाव के दौरान खांसी, सिरदर्द, पेट दर्द, आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी की शिकायत होने पर लोग आनन-फानन में घरों पर ताला लगाकर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए थे।
हालांकि देर रात करीब 11 बजे गैस रिसाव पर काबू पाने पर कुछ परिवार वापस लौट आए, लेकिन कई मकानों पर बुधवार तक भी ताले लटके रहे। घटना के बाद से क्रालोनीवासी भयभीत हैं और उन्हें आशंका है कि तकनीकी खराबी के चलते भविष्य में ऐसी घटना दोबारा हो सकती है।
एन पाकेट पल्लवपुरम निवासी मोनू, हिमांशु आदि क्षेत्रवासियों के अनुसार, जब से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित हुआ है, गैस रिसाव की यह पहली बड़ी घटना सामने आई है। मंगलवार देर शाम अचानक गैस का रिसाव होने से आसपास के क्षेत्र में अफरातफरी मच गई थी। 14 लोगों को गैस रिसाव से सांस लेने पर हुई दिक्कत के बाद एसडीएस ग्लोबल और फ्यूचर प्लस हास्पिटल में भर्ती कराना पड़ा था, जिनमें कई बच्चे भी थे।
इनमें स्थानीय पार्षद विक्रांत ढाका भी थे, जिनको हास्पिटल में आक्सीजन तक देनी पड़ी थी। बुधवार को लोग अपने घर के बाहर मुंह पर कपड़ा बांधकर आए और अपना दर्द बताया। कहा कि उनको कुछ देर में ही भोपाल में गैस रिसाव से हुई तबाही याद आ गई और रोते हांफते हुए वह अपने घरों को बंद कर सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि उन्हें सबसे अधिक चिंता इस बात की है कि यदि भविष्य में तकनीकी खराबी के कारण दोबारा गैस का रिसाव हुआ तो समय रहते आसपास के लोगों को इसकी जानकारी कैसे मिलेगी। उनका कहना है कि रिहायशी क्षेत्र के बीच एसटीपी होने के कारण किसी भी आपात स्थिति में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो सकते हैं।
लोगों ने सुझाव भी दिया है कि यदि किसी कारण से प्लांट को दूसरी जगह स्थानांतरित करना संभव नहीं है तो एसटीपी में ऐसी सुरक्षा व्यवस्था की जाए कि किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी अथवा गैस रिसाव होने पर तत्काल अलार्म बजना शुरू हो जाए। अलार्म की आवाज इतनी तेज हो कि कम से कम दो किलोमीटर दूर रहने वाले लोगों तक पहुंच सके। इससे लोग समय रहते सतर्क होकर सुरक्षित स्थानों पर जा सकेंगे और किसी संभावित बड़े हादसे को टाला जा सकता है।
समय रहते नहीं संभलते हालात तो हो सकती थी बड़ी घटना
कालोनीवासियों का कहना है कि जिस तरह अचानक गैस का रिसाव हुआ, यदि लोग समय रहते सतर्क नहीं होते और पुलिस उन्हें घरों से दूर नहीं भेजती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। राहत की बात रही कि देर रात करीब 11 बजे तक गैस रिसाव पर काबू पा लिया गया। इसके बाद कुछ परिवार रात में ही अपने घर लौट आए, लेकिन कई परिवार वापस नहीं आए। बुधवार को भी कई मकानों पर ताले लटके रहे। घटना के बाद से लोगों के मन में डर बना हुआ है।
आबादी से दूर हो एसटीपी, नहीं तो दो किमी तक सुनाई दे अलार्म
पल्लवपुरम एन पाकेट निवासियों ने मांग की है कि कालोनी के बीच रिहायशी क्षेत्र में बने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को आबादी से दूर जंगल क्षेत्र में स्थापित किया जाए, ताकि भविष्य में गैस रिसाव जैसी घटना होने पर आम लोगों की जान जोखिम में न पड़े। लोगों का कहना है कि मंगलवार को तकनीकी खराबी के कारण जिस तरह गैस का रिसाव हुआ, यदि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा हुई तो बड़ी घटना होने का अंदेशा बना रहेगा।
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एसटीपी से पहली बार गैस रिसाव हुई है। मगर, समय रहते सभी घरों से नहीं भागते तो बड़ी घटना हो सकती थी। प्लांट में मजबूत व्यवस्था होनी चाहिए। भविष्य में चेतावनी के लिए अलार्म बजना चाहिए।
संजीव पाठक।
गैस रिसाव होने से अनहोनी होने में देर नहीं थी। मगर, भगवान का आशीर्वाद था कि सभी सकुशल बच गए और रिसाव बंद हो गया। जंगल में प्लांट स्थापित होना चाहिए।
शुभम।
सांस लेने में परेशानी हो रही थी। हर सांस कड़वी लग रही थी। आधा घंटे तक पता नहीं चला कि दुर्गंध कहां से आ रही है। अलर्ट करने की कोई व्यवस्था नहीं है, जो होनी चाहिए।
मोनू धनकड़।
आंखों से आंसू टपकने लगे थे, खांसी से सिर और सीने में दर्द हो रहा था। प्लांट जंगल में स्थापित हो, वरना अलर्ट करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
हिमांशु़।
