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    UP News: काम कुछ नहीं किया, सिर्फ गोल-मोल करते रहे; मेरठ में पसर रही गंदगी को जान आप भी सिर पकड़ लेंगे

    Meerut News डिफेंस एंक्लेव निवासी बिनोद कुमार बताते हैं कि उनके मोहल्ले में दो महीने पहले नियमित कूड़ा गाड़ी आती थी लेकिन अब तीसरे - चौथे दिन कूड़ा गाड़ी आती है। सालभर में कभी पूरी तरह कूड़ा उठते नहीं देखा। ये बात अलग है कि स्वच्छ सर्वेक्षण की रिपोर्ट में 82 प्रतिशत डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन दर्शाया गया है।

    By dileep patel Edited By: Aysha SheikhUpdated: Sat, 13 Jan 2024 02:28 PM (IST)
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    UP News: काम कुछ नहीं किया, सिर्फ गोल-मोल करते रहे

    जागरण संवाददाता, मेरठ। वर्ष 2018 में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की शुरुआत हुई थी। छह साल बाद भी शहर के हर घर तक डोर टू डोर कूड़ा गाड़ी नियमित पहुंच पा रही है। करीब 80 हजार भवन हर रोज कूड़ा कलेक्शन से छूट जाते हैं। डिफेंस एंक्लेव निवासी बिनोद कुमार बताते हैं कि उनके मोहल्ले में दो महीने पहले नियमित कूड़ा गाड़ी आती थी, लेकिन अब तीसरे-चौथे दिन कूड़ा गाड़ी आती है।

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    निगम कर्मचारी कूड़ा गाड़ियों की कमी बताते हैं। सफाईकर्मी कूड़ा का ढेर लगाकर चले जाते हैं। यही कूड़ा नाली चोक करता है। रिठानी के राजेंद्र यादव कहते हैं कि पानी टंकी चौक-पंचवटी संपर्क मार्ग किनारे 50 ट्राली से अधिक कूड़ा हमेशा डंप रहता है। सालभर में कभी पूरी तरह कूड़ा उठते नहीं देखा। ये बात अलग है कि स्वच्छ सर्वेक्षण की रिपोर्ट में 82 प्रतिशत डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन दर्शाया गया है।

    डिपो से बाहर नहीं निकलते ई-रिक्शा

    73 वार्ड में बीवीजी कंपनी कूड़ा कलेक्शन करती है और 17 वार्ड नगर निगम। एक जैसी व्यवस्था बनाने को लेकर नगर निगम गंभीर नहीं है। डोर टू डोर कूड़ा प्रबंधन के लिए पांच करोड़ का बजट होने के बावजूद घंटाघर क्षेत्र के पुराने मोहल्लों-बाजारों की संकरी गलियों में कूड़ा गाड़ी नहीं जाती। यहां हाथ ठेले से भी कूड़ा उठना मुश्किल है। दावा तो 53 ई-रिक्शा आने का भी है, लेकिन ये ई-रिक्शा वाहन डिपो से बाहर नहीं निकलते, क्योंकि ई-चार्जिंग स्टेशन ही नहीं बने हैं।

    कागज पर नाले साफ, हकीकत में कचरे से अटे

    झंडे वाले तिराहे शारदा रोड से शुरू होकर ओडियन नाला काली नदी में जाकर गिरता है। ब्रह्मपुरी थाने के सामने ओडियन नाला हर दिन कचरे और गोबर से अटा रहता है, लेकिन स्वच्छ सर्वेक्षण की रिपोर्ट में सौ फीसद साफ मिला है। ब्रह्मपुरी के विशाल कहते हैं कि पिलोखड़ी से कमेला पुल तक, शास्त्रीनगर एल ब्लाक में भी ओडियन नाला कचरे से अटा हुआ है।

    वहीं, दिल्ली रोड नाले की बात करें तो यह नाला कचरे से अटा होने के चलते बरसात में मोहकमपुर, स्पोर्ट्स कांप्लेक्स, माधवपुरम समेत आसपास के सभी मोहल्लों में जलभराव होता है। नाला सफाई पर निगम का खर्च सालाना 10 लाख रुपये है। वर्ष 2022-23 में 8.80 लाख रुपये खर्च हुए थे।

    ईंधन का खर्च बढ़ा, सफाई नहीं सुधरी

    सफाई व्यवस्था में सुधार भले ही न हुआ हो, लेकिन नगर निगम में कार्यशाला अंतर्गत पेट्रोल-डीजल और लुब्रीकेंट का खर्च बढ़ गया है। वर्ष 2022-23 में ईंधन पर खर्च 18.62 करोड़ रुपये था, जो वित्तीय वर्ष 2023-24 में 21 करोड़ अनुमानित किया गया है।

    सितंबर तक 7.81 करोड़ रुपये ईंधन पर खर्च हो चुके हैं। साथ ही वाहनों के मरम्मत का खर्च भी बढ़ा है। इस पर वर्ष 2022-23 में 5.49 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि 2023-24 में सात करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सितंबर तक 2.74 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

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