मौत की सजा के फैसले के बाद कातिलों को जेल में मिली नई पहचान, रविता कैदी नंबर 399 और अमरदीप का नंबर 400
अमित कश्यप हत्याकांड में अमरदीप और रविता को मेरठ कोर्ट ने मृत्युदंड सुनाया है। मेरठ जेल प्रशासन ने उन्हें कैदी नंबर देते हुए काम सौंप दिए हैं।

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HighLights
दोनों को कैदी नंबर, कपड़े और जेल के काम सौंपे गए।
बाद में दोनों को मेरठ से सेंट्रल जेल भेज दिया जाएगा।
जागरण संवाददाता, मेरठ। अमित कश्यप हत्याकांड में अमरदीप और रविता को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई गई है। इसके बाद अमरदीप को कैदी नंबर 400 और रविता को कैदी नंबर 399 से जाना जाएगा। दोनों को कैदी के कपड़े भी दे दिए गए हैं।
शुक्रवार शाम तीन बजे अमरदीप और रविता को जेल से ऑनलाइन कोर्ट से जोड़ा गया था। सवा तीन बजे अपर सत्र न्यायाधीश जयवीर नागर ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया। बताया गया कि सजा सुनते ही रविता बदहवास होकर जमीन पर गिर पड़ी, जबकि अमरदीप सिर पकड़कर जमीन पर बैठ गया। जेल अस्पताल से तत्काल डाक्टर को बुलाया गया। डाक्टर ने उसे उपचार दिया। इसके बाद भी रविता और अमरदीप के आंसू नहीं थमे।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि मुकदमे की कोर्ट में सुनवाई पर रविता को ही हत्या का मास्टरमाइंड बताया गया। इसी के तहत अमरदीप को साढ़े तीन माह पहले कोर्ट से जमानत मिल गई थी। सात अक्टूबर को दोषसिद्ध होने के दिन ही बहसूमा पुलिस ने अमरदीप को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था।
उसके बाद से अमरदीप जेल में बंद है। जेल प्रशासन की तरफ से अमरदीप को कैदी नंबर 400 और रविता को कैदी नंबर 399 से जाना जाएगा। साथ ही कैदी के कपड़े भी दोनों को दे दिए गए। अमरदीप को खेती का काम दिया गया है, रविता को सिलाई करने की जिम्मेदारी दी गई। अमरदीप को साहिल की बैरक में रखा गया है, जबकि रविता की तबीयत में सुधार के बाद उसे मुस्कान वाली बैरक में भेज दिया जाएगा। बाद में दोनों को सेंट्रल जेल भेज दिया जाएगा।
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'सांप का षड़यंत्र बना डर का प्रतीक...इसलिए दोनों को चाहिए मृत्युदंड'
मेरठ : अमित कश्यप हत्याकांड में सजा की बहस पर एडीजीसी फरजाना मकसूद ने रविता और अमरदीप को फांसी की मांग की। बताया गया कि सांप से षड़यंत्र कर अमित की हत्या की गई थी, जो पूरे देश में डर का प्रतीक है। इसके बाद हस्तिनापुर में सांप से कटवाने की दूसरी घटना भी हो चुकी है।
साथ ही सौरभ हत्याकांड का जिक्र भी किया गया कि वहां भी पत्नी ने प्रेमी के संग मिलकर पति की हत्या की हैं। अमित हत्याकांड में भी पत्नी ने ही प्रेमी संग मिलकर वारदात को अंजाम दिया। अदालत ने अभियाजन पक्ष की दलील को स्वीकार करते हुए दोनों को मृत्युदंड दे दिया। सात अक्टूबर को अदालत ने रविता और अमरदीप को अमित हत्याकांड में दोषी करार दिया था।
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फरजाना मकसूद ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए नरमी बरतना न्याय के उद्देश्य के विपरीत होगा। अमित की हत्या अचानक उपजे विवाद या आवेश का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसके लिए पहले से योजना बनाई गई और उसे सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। यह घटना भी सांप कांड के नाम से समाज में भय के प्रतीक के रूप में चर्चित हुई थी।
फरजाना मकसूद ने मृत्युदंड की मांग के समर्थन में महेश बनाम मध्य प्रदेश राज्य, बंटू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, खुशविंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य और धनंजय चटर्जी बनाम पश्चिम बंगाल राज्य समेत सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला दिया।
इन फैसलों के माध्यम से अपराध की प्रकृति, उसकी गंभीरता, समाज पर प्रभाव और दुर्लभतम मामलों में मृत्युदंड दिए जाने के कानूनी सिद्धांतों को सामने रखा गया है। बताया गया कि अमित की हत्या में भले ही क्रूरता से नहीं की गई, लेकिन उसमें दंपती के विश्वास का भी कत्ल हुआ है।
