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पति को मौत के घाट उतारने वाली रविता व प्रेमी अमरदीप को मौत की सजा, कोर्ट ने कहा- ऐसे अपराध रोकने को कठोर से कठोर दंड जरूरी

By Sushil Kumar Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Fri, 16 Oct 2026 07:05 PM (IST)

मेरठ के अमित कश्यप हत्याकांड में पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' अपराध करार दिया।

रविता और अमरदीप के फाइल फोटो।

रविता और अमरदीप के फाइल फोटो।  

HighLights

  1. पत्नी ने प्रेमी संग पति का गला घोंटा, तीन बच्चों के सिर से पिता का साया छीना।

  2. अदालत की सख्त टिप्पणी, आजीवन कारावास को माना अपर्याप्त।

  3. अदालत ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' अपराध करार दिया।

जागरण संवाददाता, मेरठ। अमित कश्यप हत्याकांड में कोर्ट ने पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई। शासकीय अधिवक्ता केके चौबे ने बताया कि रविता और अमरदीप को सजा सुनाने से पहले अपर सत्र न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर ने टिप्पणी की।

टिप्पणी के अनुसार अमित कश्यप की हत्या ने भारतीय समाज में वैवाहिक जीवन की नींव को हिला दिया। भारतीय समाज में पति-पत्नी का रिश्ता केवल एक दाम्पत्य बंधन नहीं, अपितु विश्वास, त्याग, समर्पण और सात जन्मों के अटूट पवित्र संस्कार पर आधारित माना जाता है।

हिन्दू शास्त्रों में धर्मपत्नी को अर्धांगिनी की संज्ञा दी गई है। पति-पत्नी एक-दूसरे के जीवन के रक्षक माने जाते हैं। यह हत्या सिर्फ अमित की नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की आत्मा पर किया गया गहरा प्रहार है।

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मुजरिम रविता, जो स्वयं अमित की जीवनसंगिनी थी, उसी ने अपने पवित्र रिश्ते की निर्मम हत्या कर अपने प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर पति के गले को घोंट दिया, जिस पत्नी के हाथों पति ने रक्षा की उम्मीद की थी, उसी के हाथों द्वारा पति की सांसें छीन ली गई। यह कृत्य केवल एक हत्या नहीं, बल्कि भारतीय वैवाहिक संस्था और पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते की निर्मम हत्या है।

इस अपराध का भारतीय समाज पर प्रभाव अत्यंत दूरगामी और विध्वंसकारी है। यह समाज को झकझोर देने वाला कृत्य है। हिन्दू धर्मशास्त्रों में पत्नी को ''अर्धांगिनी'' कहा गया है, जिसका अर्थ है पति के शरीर का आधा अंग। पत्नी को ''धर्मपत्नी'' इसलिए कहा जाता है कि वह पति के धर्म, कर्म, सुख-दुःख की सहभागी होती है।

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हमारे वेदों, पुराणों में कहा गया है 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता'। सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस छीन लिए थे, यही है भारतीय नारी का आदर्श। लेकिन यहां रविता ने सावित्री के आदर्शों को तार-तार कर दिया, जिस पति को परमेश्वर मानकर पत्नी द्वारा उसकी लंबी उम्र के लिए व्रत रखे जाते हैं, करवाचौथ की पूजा की जाती है, उसी पति का गला घोंटकर पत्नी ने अपने हाथों से अपने सुहाग को उजाड़ दिया।

उसी पति ने उस पर विश्वास करके उसे अपने घर की लक्ष्मी बनाया, अपने तीन बच्चों की मां बनाया, अपने जीवन की बागडोर सौंपी, प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर उसी का घोंट दिया और तीन बच्चों का भविष्य अंधकारमय कर दिया गया, जिसकी एकमात्र दोषी स्वयं रविता है। यह अपराध रेयरेस्ट आफ द रेयर की श्रेणी में आता है।

यदि इस प्रकार के अपराध में जहां पत्नी ही अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या कर दे, वहां न्यायालय द्वारा उदारता का लाभ दिया गया तो समाज में एक गलत संदेश जायेगा और पवित्र वैवाहिक मूल्यों पर से लोगों का विश्वास उठ जायेगा।

ऐसे अपराध को रोकने के लिए कठोर से कठोर दंड दिया जाना जरूरी है। इसलिए अपराध की जघन्यता, उसकी योजना, क्रूरता और भारतीय समाज पर पड़ने वाले उसके दुष्प्रभाव को देखते हुए रविता और अमरदीप को फांसी की सजा दी जाती है।