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फांसी की सजा का फैसला आने के बाद जेल में साहिल और मुस्कान पर पहरा सख्त, दोनों की काउंसिलिंग भी कराई

By Sushil Kumar Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 15 Oct 2026 07:45 PM (IST)

Saurabh murder case: सौरभ हत्याकांड में फांसी की सजा मिलने के बाद साहिल और मुस्कान मेरठ जेल में कड़ी निगरानी ...और पढ़ें

यह फोटो AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

यह फोटो AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. मुस्कान ने अपील के लिए सरकारी अधिवक्ता की मांग की।

  2. साहिल का भाई दिव्यांस कराएगा हाईकोर्ट में अपील।

जागरण संवाददाता, मेरठ। सौरभ हत्याकांड में दोषी साहिल और मुस्कान को अदालत से उम्रकैद की उम्मीद थी, लेकिन अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई। फैसला आते ही दोनों टूट गए। मुस्कान अपनी दोनों बेटियों को लेकर चिंतित नजर आई और उसने बड़ी बेटी से मिलने की इच्छा जताई। उनकी मनोदशा को देखते हुए जेल प्रशासन ने निगरानी सख्त कर दी और दोनों की दो बार काउंसलिंग कराई।

अदालत का आदेश मिलने के बाद साहिल को सफेद कुर्ता-पायजामा और मुस्कान को क्रीम रंग की साड़ी दी गई। दोनों को दो-दो जोड़ी कपड़े मुहैया कराए गए। जेल में काम के तहत साहिल को खेती, जबकि मुस्कान को सिलाई और कढ़ाई का काम सौंपा गया। दोनों की बैरक भी बदल दी गई। मुस्कान को 17 महिला कैदियों के साथ और साहिल को 261 कैदियों के साथ रखा गया है। जेल में अदालत से सजा पा चुके कुल 278 कैदी हैं।

वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि साहिल को कैदी नंबर 395 और मुस्कान को 396 के रूप में होगी पहचान की जाएगी। अदालत से फांसी का निर्णय आने के बाद मुस्कान ने जेल प्रशासन ने आगे की कार्रवाई के बारे में जानकारी ली। दरअसल, 30 दिनों के अंदर ही दोनों मुजरिम होईकोर्ट में निचली अदालत के निर्णय की अपील कर सकते हैं। मुस्कान ने अपील के लिए सरकारी अधिवक्ता की मांग की, जबकि साहिल के छोटे भाई दिव्यांस ने खुद हाईकोर्ट में अपील के लिए वकील करने की बात जेल प्रशासन से कही है।

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वीरेश राज शर्मा ने बताया कि सरकार की तरफ से मुस्कान को अधिवक्ता मुहैया कराने के लिए कागजी कार्रवाई पूरी की गई है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि मुस्कान से परिवार का कोई भी सदस्य मिलने नहीं आया है, जबकि साहिल से उसकी नानी और छोटा भाई मिलने आ चुके है। फांसी की सजा मिलने के बाद साहिल का परिवार भी चितिंत नजर आया है।

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जेल प्रशासन ने बताया कि महिला बंदी को पहली बार फांसी की सजा सुनाई गई हैं, इससे पहले भी जेल में 17 महिला कैदी है, जिन्हें अदालत उम्रकैद की सजा सुना चुकी है। उक्त महिला बंदियों के साथ ही मुस्कान को भी शिफ्ट कर दिया है। सेंट्रल जेल में जगह न होने की वजह से 278 कैदी जिला कारागार में बंद है, जिन्हें अदालत से उनके गुनाहों की सजा मिल चुकी है। अभी तक उन्हें सेंट्रल जेल में नहीं भेजा गया है। फिलहाल जेल में 1950 बंदी और इनमें 64 महिला बंदी है।

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