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    पं. नेहरू ने 75 साल पहले मेरठ में फहराया था तिरंगा, इसे आज भी सहेजे है नागर परिवार

    By Parveen VashishtaEdited By:
    Updated: Thu, 28 Jul 2022 09:12 PM (IST)

    पंडित जवाहर लाल नेहरु ने मेरठ के विक्टोरिया पार्क में 24 नवंबर 1946 को कांग्रेस अधिवेशन में तिरंगा फहराया था। पंडित नेहरू और आईएनए के जनरल शाहनवाज खान ने इस तिरंगे पर हस्ताक्षर किए थे। इसे आईएनए के मेजर जनरल गणपत राम नागर को सुरक्षित रखने के लिए सौंपा था।

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    मेरठ के हस्तिनापुर स्थित अपने घर पर तिरंगे को दिखाते गुरु नागर व उनकी पत्नी।

    मेरठ, जागरण संवाददाता। पुणे की प्रदर्शनी में प्रदर्शित किए गए 75 वर्ष पुराने तिरंगे ने हस्तिनापुर का मान बढ़ा दिया है। इस तिरंगे को संजो कर रखा है हस्तिनापुर के नागर परिवार ने। जिनका सेना से पुराना नाता रहा है।यदि कोई संस्था तिरंगे को संभालने या सुरक्षित करने की जिम्मेदारी ले तो यह 200 से 300 साल तक सुरक्षित रह सकता है। 

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    कांग्रेस के मेरठ अधिवेशन में 24 नवंबर 1946 को फहराया गया था यह तिरंगा 

    भारतीय राष्ट्रीय सेना (आइएनए) के तीसरे डिवीजन के तत्कालीन जनरल आफिसर कमांडिंग मेजर जनरल (दिवंगत) गणपत आर नागर के पौत्र गुरु नागर के पास आज भी 75 वर्ष पुराना तिरंगा सुरक्षित है। 24 नवंबर 1946 को इस तिरंगे झंडे को स्वयं पंडित जवाहर लाल नेहरू ने मेरठ के विक्टोरिया पार्क में सुभाष चंद्र बोस के आइएनए के अधिकारियों की मौजूदगी में आजादी से पूर्व कांग्रेस के अंतिम अधिवेशन में फहराया था। इस तिरंगे को पुणे में आयोजित एक प्रदर्शनी में रविवार को प्रदर्शित किया गया।

    वर्षों तक सुरक्षित रह सकता है यह झंडा

    गुरुनागर के भाई देव नागर बताते हैं कि यह तिरंगा वर्षों तक सुरक्षित रह सकता है। तिरंगे को कोई नुकसान न हो इसलिए वे इसे कहीं बाहर नहीं ले जाते हैं। पुणे में एक संस्थान के अधिकारियों ने इस तिरंगे को संरक्षण का प्रस्ताव रखा। जिस पर देव नागर का कहना है कि यदि कोई संस्था तिरंगे को संभालने या सुरक्षित करने की जिम्मेदारी ले तो 9x14 फीट का यह तिरंगा 200 से 300 साल तक सुरक्षित रह सकता है। इसके लिए उनका परिवार हमेशा ऋणी रहेगा।

    मेजर जनरल गणपत राम नागर के पौत्र देव नागर व गुरु नागर

    बेहद हिफाजत से रखते हैं तिरंगा

    75 साल पुराने खादी के तिरंगे को नागर परिवार बहुत हिफाजत से रखता है। झंडे को नमी से रोकने के लिए सिलिका जेल कैप्सूल के साथ मोड़कर, पैक और सील करके रखा जाता है। हर दो महीने में इसे धूप दिखाकर फिर सिलिका में रखते हैं। दादा गणपत राम नागर के बाद पिता सूरज नागर ने इस तिरंगे को संभाला। अब पोते देव नागर और गुरु नागर इसे संभालते हैं। आगे इनके बेटे विक्रांत और परिवार संभालेगा।

    मेरठ के विक्टोरिया पार्क में पं. नेहरू व उनके साथ मेजर जनरल गणपत राम नागर का दुर्लभ चित्र 

    अधिवेशन के बाद पं. नेहरू ने नागर परिवार को सौंपा था तिरंगा 

    मेरठ के विक्टोरिया पार्क में 24 नवंबर 1946 को कांग्रेस का एक अधिवेशन हुआ। जिसमें जवाहर लाल नेहरू के साथ इंडियन नेशनल आर्मी (आइएनए) के अधिकारी भी पहुंचे थे। अधिवेशन में अध्यक्षता तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष जेबी कृपलानी, पं. नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, सुचेता कृपलानी आदि थे। अधिवेशन के संयोजक देव नागर के दादा मेजर जनरल गणपत राम नागर रहे थे। अधिवेशन के अंतिम सत्र के बाद झंडा उतारा गया। नेहरू जी और आइएनए के जनरल शाहनवाज खान ने इस तिरंगे पर हस्ताक्षर किए और इसे आइएनए के मेजर जनरल गणपत राम नागर को सुरक्षित रखने के लिए सौंप दिया। बताया कि इसी झंडे के नीचे आजादी की लड़ाई लड़ी। बाद में, तीन रंगों को देश के राष्ट्रीय ध्वज में बरकरार रखा गया और चरखे के स्थान पर अशोक चक्र का चिह्न आ गया।

    सुभाष चंद्र बोस के करीबी थे गणपत राम नागर 

    गुरु नागर ने बताया कि मेजर जनरल गणपत राम नागर का जन्म 16 अगस्त 1905 को मेरठ में पंडित विष्णु नागर के घर हुआ था। मेरठ कालेज से पढ़ाई के दौरान वो विदेश गए जहां ब्रिटिश आर्मी में 1929 में किंग अफसर के पद पर नियुक्त हुए। इसके बाद 1939 में आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए और सुभाष चंद्र बोस के काफी नजदीक होने पर उन्हें आइएनए में मेजर जनरल पद दिया गया था।