अब जिला अस्पताल में भी लिंग परीक्षण की कोशिश, सीएमएस शामली समेत चार के खिलाफ मुकदमा, हरियाणा की टीम ने किया राजफाश
लिंग परीक्षण कराने वालों का जाल सरकारी अस्पतालों तक फैल गया है। उत्तर प्रदेश के शामली जिले के जिला अस्पताल में हरियाणा की टीम के चलते जिला अस्पताल में लिंग परीक्षण के प्रयास का मामला सामने आया है। इसमें सीएमएस भी फंस गए हैं।

शामली, जागरण संवाददाता। हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जिला अस्पताल में लिंग परीक्षण कराने का राजफाश कर दिया। मामले में शामली कोतवाली में जिला अस्पताल के सीएमएस डा. सफल कुमार समेत चार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस एक आरोपित को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
इस तरह हुआ मामले का राजफाश
पुलिस को दी तहरीर के अनुसार, फरीदाबाद (हरियाणा) के स्वास्थ्य विभाग ने एक सूचना के आधार पर जिला अस्पताल में लिंग परीक्षण के अवैध धंधे का राजफाश करने की योजना बनाई। फरीदाबाद की एक महिला को योजना में शामिल कर सुरेंद्र नामक व्यक्ति को उसका पति बनाया। सुरेंद्र ने विजय लक्ष्मी नाम की महिला से फोन पर बात कर पत्नी का भ्रूण लिंग परीक्षण कराने की बात कही। इस काम का खर्च 40 हजार रुपये बताते हुए उनसे 21 जुलाई को जिला अस्पताल आने को कहा गया।
सीएमएस को दिए गए 20 हजार रुपये
तहरीर के अनुसार फरीदाबाद स्वास्थ्य विभाग की टीम सुरेंद्र और महिला को लेकर 21 जुलाई को पहुंच गई। टीम में डा. हरजिंदर, डा. अजय गोयल, डा. श्वेता और डा. सनी डहनवाल थे। सुरेंद्र ने विजय लक्ष्मी को फोन किया और उसके कहे अनुसार 20 हजार रुपये जिला अस्पताल के सीएमएस डा. सफल कुमार को दिए। रुपये लेकर उन्होंने कहा कि रुड़की से अल्ट्रासाउंड मशीन मंगवा रहे हैं। शेष रकम मशीन लेकर आने वाले व्यक्ति को दे देना। शाम को मशीन नहीं आई तो विजय लक्ष्मी ने फोन कर सुरेंद्र से दो-तीन दिन बाद आने को कहा। 28 जुलाई को फिर से टीम आई तो विजय लक्ष्मी ने कहा कि डा. सफल को कुछ शक हो गया है, इसलिए अभी अल्ट्रासाउंड नहीं होगा। इस पर सुरेंद्र ने रुपये वापस मांगे तो बताया गया कि रुपये खेड़ीकरमू निवासी आशीष के भाई मुन्नू के खाते में जमा कराए गए थे।
20 हजार रुपये वापस करते ही पकड़ा आरोपित
मोबाइल पर आशीष से संपर्क किया गया तो उसने खेड़ीकरमू बुलाया। 20 हजार रुपये वापस किए और कहा कि अल्ट्रासाउंड कुछ दिन बाद करा देगा। तभी टीम ने रुपयों के साथ आशीष को पकड़ लिया और कोतवाली शामली ले आए। मामले में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अश्वनी कुमार (नोडल अधिकारी, पीसीपीएनडीटी) की तरफ से डा. सफल कुमार, विजय लक्ष्मी, आशीष और मन्नू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। मुकदमे में डा. सफल और विजयलक्ष्मी का पता नामालूम लिखा हुआ है। पिता, पति का नाम भी नहीं है।
इन्होंने कहा
ये सब मेरे खिलाफ षड्यंत्र है। मैं आशीष को इसलिए जानता हूं क्योंकि आउटसोर्स से रखे गए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का ठेका उसी के पास है। जब कर्मचारी रखे जा रहे थे, शायद तभी विजय लक्ष्मी भी किसी की सिफारिश के लिए आई थी। जिला अस्पताल में तो अल्ट्रासाउंड की मशीन ही नहीं है।
-डा. सफल कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल शामली
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