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    मुश्किलों में पूर्व कुलपति डॉ. रामपाल सिंह; ED ने भ्रष्टाचार के मामलों में जब्त कीं 3.21 करोड़ रुपये की संपत्तियां

    Updated: Sat, 20 Jul 2024 08:24 AM (IST)

    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भ्रष्टाचार के संगीन मामलों से घिरे चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के पूर्व कुलपति डा.रामपाल सिंह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पूर्व कुलपति की 3.21 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं। इनमें बदायूं स्थित जमीन व बरेली स्थित दो मंजिल मकान शामिल है। ईडी पूर्व कुलपति व उनकी आरपी सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के विरुद्ध जांच कर रहा है।

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    मेरठ के पूर्व कुलपति डॉ. रामपाल सिंह पर ईडी ने की है कार्रवाई। चौधरी चरण सिंह विवि का फाइल फोटो।

    जागरण संवाददाता, मेरठ। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. रामपाल सिंह की संपत्ति एक मनी लांडरिंग मामले में जब्त की है। इस मामले में विश्वविद्यालय में कार्यरत रहे और उसी मामले से जुड़े और लोग भी ईडी के शिकंजे में आ सकते हैं।

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    यह मामला 21 सितंबर 2020 को उत्तर प्रदेश विजिलेंस पुलिस ने दर्ज किया था जिसमें विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. रामपाल सिंह के अलावा पूर्व वित्त नियंत्रक चंद्र किरण सिंह और सीपीएमटी परीक्षा 2004 के पूर्व समन्वयक प्रोफेसर हरेंद्र सिंह बालियान को आरोपित बनाया गया है।

    डा. रामपाल सीसीएसयू में दो मार्च 2003 से 27 मई 2005 तक कुलपति रहे थे। उनके पद पर रहने के दौरान ही उनके खिलाफ हुई शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय से लेकर पुलिस तक की जांच हुई। बाद में विजिलेंस ने मनी लांडरिंग का मामला दर्ज किया जिसकी जांच अब ईडी कर रही है।

    ईडी ने मांगी थी कर्मचारियों की डिटेल

    मामले की जांच के लिए ईडी ने विश्वविद्यालय ने तीनों आरोपितों के आधार कार्ड व पैन कार्ड की छाया प्रति, सैलरी एकाउंट के विवरणों में खाता संख्या, बैंक का नाम व शाखा, जनवरी 2003 से अप्रैल 2024 तक उन्हें दिए गए वेतन का महीने वार विवरण, उक्त समय के दौरान ही तीनों के द्वारा इम्मोवेबल प्रापर्टी रिटर्न में घोषित विवरण, विश्वविद्यालय में व्याप्त तीनों के किसी भी अन्य ऐसेट व लायबिलिटी के विवरण, तीनों की वर्तमान पोस्टिंग का विवरण, विश्वविद्यालय की ओर से की गई जांच की प्रतियां व रिपोर्ट भी और तीनों की ओर से धनराशि को लेकर की गई अनियमितताओं का विवरण भी मांगा था।

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    ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर जय कुमार ठाकुर की ओर से यह पत्र 16 मई को जारी किया गया था जिसमें विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने जवाब भेजे हैं। इस मामले के शिकायतकर्ता एडवोकेट संदीप पहल थे।