मेरठ, जेएनएन। मेडिकल कालेज के नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डा. निकुंज जैन कोरोनाकाल में लगातार हाई रिस्क जोन में डयूटी कर रहे हैं। ईएनटी के मरीजों के इलाज में डाक्टर को संक्रमित होने का सर्वाधिक खतरा होता है। इन मरीजों की नाक और मुंह खोलकर इलाज करना होता है, और इसी मार्ग से कोरोना के वायरस हवा में पहुंचते हैं। डा. निकुंज ओपीडी, फ्लू ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड में इलाज के लिए पहुंचते हैं।

यहांं हर जगह कोरोना मरीज मिल रहे हैं। वह मई माह के दौरान कोविड वार्ड में भी डयूटी कर चुके हैं। 2006 बैच के एमबीबीएस और 2014 में अलीगढ़ मेडिकल कालेज से एमएस करने वाले डा. निकुंज ने सितंबर 2017 में मेडिकल कालेज ज्वाइन किया। इस समय वो ईएनटी विभाग के एसिस्टेंट प्रोफेसर हैं। डा. जैन सोमवार और गुरुवार को ओपीडी करते हैं। विभाग में पहुंचने वाले मरीजों की कोविड जाच करने के बाद इलाज किया जाता है। ट्रामा के मरीजों में इएनटी डाक्टर की खास भूमिका होती है।

ऐसे में पीपीई किट पहनकर उनका तत्काल इलाज किया जाता है। साथ ही कोविड जाच के लिए सैंपल भेज दिया जाता है। डा. जैन बताते हैं कि मई माह के दौरान उन्होंने कोविड-19 वार्ड में ड्यूटी की। मरीजों में गले से जुड़ी कई जटिलताएं थीं, जिसका इलाज किया गया। कोरोना वायरस गले में संक्रमित होता है। सांस और मुंह से निकलने वाली भाप के जरिए फैलता है। उनका मानना है कि सíदयों में वायरस और घातक बन सकता है। ऐसे में लोगों को मास्क लगाने में कोई भूल नहीं करनी चाहिए। शारीरिक दूरी रखें। भीड़ में न जाएं। गले को साफ करने के लिए भाप लेते रहें। कोई भी दवा अपने मन से न खाएं। गले के संक्रमण से बचने के लिए काढ़ा और बीटाडीन गार्गल भी कर सकते हैं।