अर्द्ध उष्ट्रासन करके फेफड़े व मांसपेशियों को रखें फिट
जेएनएन मेरठ। फेफड़ों को शक्ति प्रदान करने के साथ ही दृष्टि विकार के रोगियों के लिए अर्द्धउष्ट्र

जेएनएन, मेरठ। फेफड़ों को शक्ति प्रदान करने के साथ ही दृष्टि विकार के रोगियों के लिए अर्द्धउष्ट्रासन अत्यंत लाभकारी है। अर्द्धउष्ट्रासन दो शब्दों से मिलकर बना है। उष्ट्र का अर्थ ऊंट होता है। इस आसन को करने के दौरान शरीर ऊंट की तरह प्रतीत होता है। इसी लिए इसको अर्द्धउष्ट्रासन के नाम से जाना जाता है। अर्द्धउष्ट्रासन बैठ कर करने वाले आसन में एक महत्वपूर्ण योगाभ्यास है। यह कहना है योग देवाशीष योग के प्रशिक्षक आशीष शर्मा का। आइए जानते हैं उनके द्वारा बताए गए आसन को करने के तरीके के बारे में। ऐसे करें अर्द्धउष्ट्रासन-
यह आसन करने में बेहद आसान है। इसके लिए सबसे पहले घुटनों के बल बैठ जाएं। पंजे पीछे की ओर फर्श को स्पर्श कर रहे हो। घुटनों व पैरों के बीच करीब एक फीट की दूरी बनाकर रखें। फिर आप सांस लेते हुए पीछे की ओर झुकें और ध्यान रहे कि पीछे झुकते समय गर्दन को झटका न लगे। दोनों हाथों को कमर के आसपास रखते हुए सिर पीछे की ओर झुका दें। ध्यान रहे कि शरीर का भार भुजाओं और पैरों पर समान रूप से हो। अब धीरे-धीरे सांस लें और धीरे-धीरे सांस को छोड़ें। यहां तक हो सके अपने अनुसार मुद्रा को बनाकर रखें। फिर गहरी लंबी सांस छोड़ते हुए अपनी पिछली स्थिति में आ जाएं। इस प्रकार से यह एक चक्र हुआ। शुरुआत में कम से कम तीन से पांच बार इसे दोहराएं। अर्द्धउष्ट्रासन योग के लाभ-
-अर्द्धउष्ट्रासन फेफड़ों के लिए अच्छा आसन है। इसके नियमित अभ्यास से फेफड़ों से जुड़ी परेशानियों का हल कर सकते हैं।
-सही ढंग से आसन करके पेट की चर्बी को कम कर सकते हैं।
-मधुमेह के रोगी समस्या को नियंत्रित रख सकते हैं। अभ्यास से इन्सुलिन के स्त्राव में मदद मिलती है।
-नेत्र के विकार वाले रोगियों को राहत पहुंचती है।
-क्रोध को कम करते हुए मन को शांत रखता है।
-गर्दन के दर्द को भी कम कर सकते हैं। साथ ही शरीर के विभिन्न अंगों की मांस पेशियों को दुरुस्त रखता है।
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