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    मेरठ: नालंदा और तक्षशिला विश्विद्यालय के माडल का अनुशरण कर सौ पुस्तकालय बनाएगा सीसीएसयू

    By Taruna TayalEdited By:
    Updated: Tue, 30 Aug 2022 02:57 PM (IST)

    सीसीएसयू मेरठ और ग्राम पाठशाला के बीच पांच साल के लिए एक एमओयू हुआ। एमओयू के माध्यम से पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में विश्विद्यालय पुस्तकालय बनाएगा। इसके अतिरिक्त सामाजिक गतिविधियां पर्यावरण संरक्षण प्राकृतिक संसाधन शोध एवं प्रकाशन स्टार्टअप सेमिनार कार्यशाला आदि क्षेत्रों में संस्थाएं मिलकर कार्य करेंगी।

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    सौ पुस्तकालय बनाएगा चौधरी चरण सि‍ंंह व‍िश्‍वव‍िद्यालय।

    मेरठ, जागरण संवाददाता। Chaudhary Charan Singh University Meerut चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ और ग्राम पाठशाला के बीच पांच साल के लिए एक एमओयू मंगलवार को हुआ। इस एमओयू के माध्यम से पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में विश्विद्यालय पुस्तकालय बनाएगा। इसके अतिरिक्त सामाजिक गतिविधियां, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन, शोध एवं प्रकाशन, स्टार्टअप, सेमिनार, कार्यशाला आदि क्षेत्रों में दोनों संस्थाएं मिलकर कार्य करेंगी। विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी संगठनों के साथ प्रशिक्षण एवं विकास आधारित कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। साथ ही शिक्षा के प्रति जागरूकता, जल संरक्षण, कृषि, स्वास्थ्य एवं बाल संरक्षण अधिकारों के प्रति भी समय-समय पर अभियान चलाए जाएंगे।

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    मेरठ मंडल के छह जिलों में बनाएंगे 100 पुस्तकालय

    इस अवसर पर कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि ग्राम पाठशाला के साथ विश्वविद्यालय अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन तो करेगा ही, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे युवा वर्ग को पुस्तकालय में जाकर पठन-पाठन के वातावरण से जोड़कर उनके करियर को उनकी रूचि एवं प्रतिभा के अनुरूप नई दिशा देगा। उन्होंने कहा यह संस्था सात राज्यों के 350 गांव में पुस्तकालय स्थापित कर चुकी है। हमारा लक्ष्य रहेगा कि ग्रामीण वासियों की सहायता से आगामी छह माह में विश्वविद्यालय परिक्षेत्र में 100 पुस्तकालय स्थापित करें। उन्होंने नालंदा एवं तक्षशिला विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालय इसी प्रकार सामाजिक सहायता के माडल पर न केवल स्थापित किए गए बल्कि उनका संचालन भी इसी माडल पर किया गया। उन्होंने बताया कि नालंदा एवं तक्षशिला विश्वविद्यालय के क्षेत्रों के लोग अपने घर की आवश्यकताओं के लिए जिस प्रकार धनराशि को बचा कर रखते थे, उसी तरह उसका एक हिस्सा उन विश्वविद्यालय के संचालन के लिए भी किया निकाला जाता था। ग्राम पाठशाला के साथ मिलकर हम उसी माडल पर कार्य करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालय स्थापित करायगें ।

    सप्ताहांत में सेवाएं देकर आगे बढ़ा रहे मुहिम

    इस अवसर पर ग्राम पाठशाला के प्रतिनिधि एवं विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र डा. लाल बहार ने कहा कि पिछले दो वर्षों में देश के सात राज्यों में 350 पुस्तकालय ग्रामीण वासियों की सहायता से बनाए हैं। इन पुस्तकालयों में सभी आधुनिक सुविधाएं जैसे इंटरनेट युक्त कंप्यूटर, अद्यतन पुस्तकें, सीसीटीवी कैमरे, एसी इत्यादि जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि ग्राम पाठशाला संस्था में सभी लोग नौकरी पेशा है और शनिवार व रविवार को विभिन्न गांवो में जाकर इस प्रकार के कार्य करते हैं।

    भौतिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. वीरपाल सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर प्रो. वाई. विमला, प्रो. मृदुल गुप्ता, कुलसचिव धीरेंद्र कुमार, प्रो. एनसी लोहनी, प्रो. शिवराज पुंडीर, प्रो. मुकेश शर्मा सहित कई विभागों के अध्यक्ष एवं ग्राम पाठशाला संस्था के देवराज नागर, प्रवीण कुमार एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

    शिक्षकों, अधिकारियों व कर्मचारियों से मांगी पुस्तकें

    विश्वविद्यालय ने इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और अधिकारियों को घर में रखी किताबें मुहैया कराने का आग्रह किया है। कुलसचिव ने इस बाबत सभी विभागों में कार्यरत हर स्तर के लोगों से घरों में रखी हुई ऐसी किताबें जो छात्र-छात्राओं, युवाओं और बुजुर्गों के पठन-पाठन में काम आ सकती हैं, उन्हें सर छोटू राम इंस्टिट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी के निदेशक डा. नीरज सिंघल के पास एकत्र कराने को कहा है।