मेरठ, जागरण संवाददाता। CCSU Meerut मेरठ में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर और संबद्ध कालेजों में संचालित स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए दूसरे चरण का पंजीकरण गुरुवार को पूरा हो गया। अब शुक्रवार-शनिवार यानी 23-24 सितंबर को पंजीकृत छात्र सभी स्नातक पाठ्यक्रमों की द्वितीय व अंतिम ओपन कटआफ के ब्लैंक आफर लेटर डाउनलोड करेंगे।

प्रति जरूर ले लें छात्र

उक्त दोनों तिथियों पर ही विद्यार्थी ब्लैंक आफर लेटर पर अपने हाथ से कोर्स व कालेज का नाम लिखकर परिसर व कालेजों में जमा कराएंगे। कालेज में आफर लेटर जमा कराने के बाद छात्र अभ्यर्थी प्रति जरूर ले लें। कालेजों में जमा किए गए ब्लैंक आफर लेटर से रिक्त सीटों के सापेक्ष वरीयता सूची व प्रतीक्षा सूची तैयार करेंगे।

26 सितंबर से 28 सितंबर तक प्रवेश

इसके बाद परिसर व कालेजों में रिक्त सीटों पर सोमवार 26 सितंबर से 28 सितंबर तक प्रवेश करेंगे। परिसर के संबंधित विभाग और कालेजों को 28 सितंबर तक छात्रों के प्रवेश संपुष्ट करना अनिवार्य है।

यह है शहर के कालेजों में सीटों की स्थिति

मेरठ कालेज कुल सीट रिक्त सीट आवेदन

बीए 878 185 6465

बीकाम 479 103 2286

बीएससी बायो 479 135 1412

बीएससी गणित 479 151 1370

एनएएस डिग्री कालेज

बीए 559 81 5658

बीकाम 399 176 1814

बीएससी बायो 80 26 1151

बीएससी गणित 160 51 1071

आरजी डिग्री कालेज

बीए 1037 197 3725

बीकाम 160 41 856

बीएससी बायो 239 39 834

बीएससी गणित 80 22 425

कनोहर लाल डिग्री कालेज

बीए 479 110 1240

बीकाम 160 94 256

शहीद मंगल पांडे महिला डिग्री कालेज

बीए 266 71 738

बीकाम 80 24 168

बीएससी बायो 80 42 142

बीएससी गणित 80 45 94

डीएन डिग्री कालेज

बीकाम 399 60 1849

बीएससी बायो 239 58 904

बीएससी गणित 239 37 872

इस्माइल डिग्री कालेज

बीए 638 211 1579

बीकाम 80 31 242

बीएससी गणित 160 138 100

सीसीएसयू : चुनौती मूल्यांकन में 15 से अंक बढ़कर हुए 60

मेरठ : किसी भी संस्थान के परीक्षा और मूल्यांकन के स्तर से ही उसकी गुणवत्ता का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की मूल्यांकन प्रक्रिया ने सभी को चौका दिया है। परीक्षा के बाद हुए प्राथमिक मूल्यांकन में बीएएमएस की एक छात्रा को केवल 15 अंक मिले। जब चुनौती मूल्यांकन हुआ तो उसी छात्रा के अंक बढ़कर 60 हो गए।

यह सवाल उठाता है

चुनौती मूल्यांकन में 45 अंक बढ़ जाना यह सवाल उठाता है कि पहली बार का मूल्यांकन सही था या दूसरी बार हुआ मूल्यांकन ज्यादा सटीक है। जो भी मूल्यांकन गलत है उस परीक्षक पर विश्वविद्यालय कोई कार्रवाई भी करेगा या नहीं। विद्यार्थियों को परीक्षा की फीस देने के बाद सही अंक पाने के लिए चुनौती मूल्यांकन के लिए भी शुल्क भरना पड़ रहा है।

मेडिकल पाठ्यक्रमों में बढ़ रहे ज्यादा अंक

चुनौती मूल्यांकन में विशेष तौर पर मेडिकल पाठ्यक्रमों वाले विद्यार्थियों के अंक में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। विश्वविद्यालय ने गुरुवार को चुनौती मूल्यांकन के लिए हुए आवेदन संख्या 4766 से 4830 तक के परिणाम जारी किए हैं। इनमें बीडीएस फाइनल, बीएएमएस चतुर्थ सेमेस्टर और एमबीबीएस प्रथम सेमेस्टर के अंक हैं। चुनौती मूल्यांकन में अधिकतर छात्रों के अंक डेढ़ से दो गुना तक बढ़े हैं।

प्राप्तांक में इतना अंतर कैसे

इतना ही नहीं चुनौती मूल्यांकन दो परीक्षकों से कराए गए हैं। दोनों परीक्षकों द्वारा दिए गए अंकों का औसत निकालकर छात्रों को अंतिम अंक प्रदान किए गए हैं। दोनों परीक्षकों की ओर से दिए गए अंकों में भी 10 से 20 अंकों तक का अंतर है। सवाल यह है कि मूल्यांकन के नियम जब एक ही हैं तो दो परीक्षकों द्वारा जाची जा रही उत्तर पुस्तिका के प्राप्तांक में इतना अंतर कैसे हो सकता है। 

Edited By: Prem Dutt Bhatt