मेरठ, [प्रदीप द्विवेदी]। Rapid Raid In Meerut रैपिड रेल कॉरिडोर के सभी 22 स्टेशन और उससे संबंधित अन्य भवन ग्रीन इमारत होंगे। ग्रीन बिल्डिंग के मानक का पालन कराने के लिए इस निर्माण की विशेष निगरानी होगी। इसके लिए इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल और एनसीआरटीसी के बीच अनुबंध हुआ है। इस परियोजना के 12 स्टेशन मेरठ में बनेंगे। शहर में एक भी ग्रीन बिल्डिंग नहीं एमडीए के नगर नियोजक विजय कुमार का कहना है कि मेरठ में अभी एक भी भवन मालिक ने ग्रीन बिल्डिंग का प्रमाण पत्र नहीं दिखाया है। ग्रीन बिल्डिंग के लिए मानचित्र के समय छूट का प्रावधान है, लेकिन किसी ने इसका लाभ नहीं लिया है।

हमारा कर कदम पर्यावरण का हितैषी

एनसीआरटीसी के सीपीआरओ सुधीर शर्मा का कहना है कि रैपिड रेल के सभी स्ट्रक्चर और स्टेशन एनर्जी एफिशियंट और ग्रीन होंगे। इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल से गोल्ड श्रेणी का प्रमाण पत्र लिया जाएगा।

ऐसे बनती है ग्रीन इमारत

- इमारत में साफ हवा और सूर्य की पर्याप्त रोशनी पहुंचनी चाहिए।

- खिड़कियों पर सीधी धूप ना पड़े।

- परिसर में पर्याप्त पेड़, गार्डन और खुली जगह हो।

- छत व बालकनी में हरे-भरे पौधे लगे हों।

- कम पानी की खपत वाले पौधे हों

- फव्वारा व एलईडी लाइट लगी हों।

- अधिकांश उपकरण सोलर प्लांट से संचालित हों

- रेन वाटर हार्वेङ्क्षस्टग यूनिट हो।

- पानी को रिसाइकिल करने के उपकरण व तकनीक हो।

- बिजली से संचालित सभी उपकरण स्टार रेङ्क्षटग वाले हों।

- कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था हो।

- पर्यावरण फ्रेंडली 'लो वीओसी पेंट' का प्रयोग हो।

- इंटेलिजेंस बिल्डिंग मैनेजमेंट सिस्टम का प्रयोग हो।

दीवार-खिड़कियों का निर्माण है चुनौती

ग्रीन बिल्डिंग दीवार बनाने के लिए बाहरी दीवारें एएसी से और अंदर की दीवारें फ्लाईऐश ईंट से बनाई जाती हैं। फ्लाईऐश की ईंट सामान्य ईंटों से अलग और दस फीसद महंगी होती हैं। इससे घर का तापमान संतुलित रहता है। एएसी की दीवारें भी बाहर की गर्मी को घर में नहीं पहुंचने देती। खिड़कियों में दो फ्रेम होते हैं। इसे डबल गेज्ड विंडो कहा जाता है। ऐसी खिड़की भी तापमान संतुलित रखती है।

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