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    नहीं रहे हजरत मौलाना हकीम मोहम्मद इस्लाम

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    Updated: Sun, 02 Dec 2012 01:22 AM (IST)

    मेरठ : दीन की रोशनी फैलाने और तालीम से उजियारा करने वाले हजरत मौलाना हकीम मोहम्मद इस्लाम का शनिवार के रोज इंतकाल हो गया। वे तकरीबन 94 साल के थे। मुल्क के बड़े आलिमों में शुमार हकीम साहब के इंतकाल की खबर से शहर में सन्नाटा पसर गया। भाटवाड़ा स्थित उनके आवास पर गमी का इजहार करने वालों का तांता लग गया। शहर ही नहीं आसपास के जनपदों से इस्लामी विद्वानों का हुजूम उमड़ा। नम आंखों से शाहपीर गेट कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द ए खाक किया गया।

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    सुबह याद किया अल्लाह को

    हजरत मो. इस्लाम के नवासे और जानशीन मुफ्ती सैय्यद अहमद कासमी के मुताबिक वह पिछले कई रोज से बीमार चल रहे थे। सुबह सात बजे सभी से बातें की, इसके बाद अल्लाह को याद किया। करीब साढ़े सात बजे उन्होंने आखिरी सांस ली। शेख-ए-तरीकत फकी उल हस्र आरिफ बिल्ला हजरत मौलाना हकीम मोहम्मद इस्लाम के इंतकाल की खबर से हर कोई सन्न रह गया। उनके पार्थिव शरीर को आखिरी दीदार के लिए मस्जिद नूरूल इस्लाम में रखा गया।

    ताउम्र फैलाई दीन की रोशनी

    भाटवाड़ा में मुंशी बाकर हुसैन के यहां अलहाज मो. हकीम इस्लाम की पैदाइश 1918 में हुई। मदरसा इमदादुल इस्लाम, सदर से आपने तालीम हासिल की। करीब 75 साल तक मदरसा नूरूल इस्लाम के वे मोहतमिम रहे। उनके मोहतमिम रहते मदरसे का विकास हुआ और दीन की रोशनी फैली। हिंदुस्तान के बड़े आलिमों में वे शुमार थे। उनका रूहानी ताल्लुक दारूल उलूम देवबंद के पूर्व मोहतमिम हजरत मौलाना कारी मोहम्मद तैय्यब से रहा। ताउम्र आपने दीन और इल्मियत की रोशनी फैलाई।

    कई किताबें भी लिखीं

    अलहाज हकीम मोहम्मद इस्लाम किसी परिचय के मोहताज नहीं थे। 'मिल्लते-इस्लाम की मोहसिन शख्सियात', 'हयात-ए-अख्तर', 'तबकीरूल-इस्लाम' समेत कई किताबें भी लिखीं। यही नहीं इस उम्र में भी शाहघासा गली कुम्हारान स्थित दवाखाने भी रोजाना दोनों वक्त जाते थे।

    आखिरी विदाई को उमड़ा सैलाब

    हकीम मो. इस्लाम को आखिरी विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ा। दारूल उलूम वक्फ देवबंद से आए मौलाना असलम ने नमाज-ए-जनाजा पढ़ाई। जनाजा भाटवाड़े से शुरू होकर शाहपीर गेट पुलिस चौकी से इमलियान, हापुड़ अड्डा से वापस हाशिमपुरा होते हुए शाहपीर गेट कब्रिस्तान पहुंचा। यहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। नायब मोहतमिम मौलाना मुहम्मद सूफीयान, मौलाना मो. असलम, सहारनपुर मौलाना अहमद फरीदी, मुफ्ती नासिरूद्दीन, मौलाना रियाजुल हसन, मुफ्ती मो. सईदी, भोपाल से मौलाना गाजिब अली, गाजियाबाद के जमियत उलेमा के सदर मौलाना रियाज, हापुड़ से मौलाना रियाज, मुफ्ती मो. अय्यूब, सियाल से मौलाना हामिद, मुफ्ती मो. फारूख आदि ने शिरकत की।

    शहरकाजी जैनुस साजिद्दीन, कारी शफीकुर्रहमान कासमी, नायब शहर काजी जैनुर राशिद्दीन, मौलाना जिबरील, मुफ्ती मो. आरिफ, मुफ्ती मो. अहसान, असलम जमशेदपुरी, हाजी शाहिद अखलाक, हाजी याकूब कुरैशी, कारी अनवार अहमद, मौलाना खुर्शीद आदि ने नम आंखों से विदाई दी।

    बंद हो गए बाजार, लगा जाम

    हापुड़ रोड, गुलमर्ग, शाहपीर गेट, हाशिमपुरा, इमलियान, अंसार गली आदि इलाकों के बाजार बंद हो गए। जनाजे में भारी भीड़ के कारण पुलिस ने रूट डायवर्ट कर दिया। ईव्ज चौपले व हापुड़ अड्डे पर बेरीकेडिंग लगाकर सूरजकुंड के रास्ते ट्रैफिक को निकाला गया। इस दौरान गली-गली में वाहन चालक फंसे। एनएएस कालेज के पास पुलिया निर्माण के चलते वन-वे था, इसके चलते जाम लगा रहा। मेघदूत चौराहे, सुभाष बाजार, पुरानी कोतवाली, गोला कुंआ, मोहनपुरी, पीएल शर्मा रोड, सुभाष नगर आदि जगहों पर वाहन रेंगते रहे।

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