जागरण संवाददाता, मेरठ : न्याय की आस लेकर आए पीड़ितों को अधिकारियों की चौखट पर दुत्कार मिल रही है। अनाथ आश्रम से निकाली गई प्रीति शिकायत लेकर एडीएम फाइनेंस के सामने पहुंची तो उसे भी दुत्कार मिली। अधिकारी ने उन्हें यह कहकर वहां से लौटा दिया कि युवती कहीं भी जाए, उन्हें कोई मतलब नहीं है। पीड़िता ने कमिश्नर और डीएम से इस मामले में शिकायत की है।

सिविल लाइन क्षेत्र स्थित रामानुज दयाल वैश्य अनाथालय में पिछले कई साल से प्रीति (19) नाम की युवती रह रही थी। वर्तमान में वह आरजी डिग्री कालेज में बीकॉम प्रथम वर्ष की छात्रा है। आरोप है कि 14 जून की शाम को अधीक्षक ने उससे जबरन कुछ कागजों पर साइन कराए और उसे अनाथ आश्रम से बाहर निकाल दिया। वह किसी तरह से अपने दोस्त रानू के घर पहुंची और पूरी घटना बताई।

शनिवार को इसी मामले में रानू और प्रीति शिकायत लेकर डीएम कार्यालय पहुंचे, लेकिन बैठक में होने के कारण वह मुलाकात नहीं कर सके। शिकायत लेकर एडीएम फाइनेंस आरआर सिंह के पास पहुंची युवतियों और अधिवक्ता को उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि युवती कहीं भी जाए, मुझे कोई मतलब नहीं है। इसके बाद वह एडीएमइ के पास गए तो उन्होंने बताया कि इस बाबत सिटी मजिस्ट्रेट या संबंधित थाना क्षेत्र के एसीएम से शिकायत करें, लेकिन बैठक होने के कारण किसी से मुलाकात नहीं हो सकी। पीड़िता ने दोपहर बाद पूरे घटनाक्रम की जानकारी फोन पर कमिश्नर और डीएम को दी, जिसके बाद उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। युवती के साथ आए अधिवक्ता विजय कुमार ने बताया कि अनाथ आश्रम में रहने वाली युवतियों को उनकी नौकरी लगने या विवाह होने तक रखा जाने का नियम है। इसके विपरीत युवती को जबरन वहां से निकाल दिया गया।

इन्होंने कहा

युवती को अनाथालय से निकालने की कोई घटना नहीं हुई। प्रीति के किसी दूर के रिश्तेदारों ने उसकी सुर्पुदगी के लिए कुछ दिन पहले प्रार्थना पत्र दिया था। इसी पर कार्रवाई करते हुए युवती को उसके रिश्तेदारों के साथ भेजा गया था।

-योगेंद्र जैन, सचिव रामानुज दयाल वैश्य अनाथालय।

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