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    बालपन में बूढ़ी हो रहीं हड्डियां

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    Updated: Sun, 18 Dec 2016 01:51 AM (IST)

    मेरठ : कहीं आपका बच्चा बालपन में ही तो बूढ़ा नहीं हो रहा। उनमें बुजुर्गो की तरह कमर दर्द, पीठ दर्द औ

    मेरठ : कहीं आपका बच्चा बालपन में ही तो बूढ़ा नहीं हो रहा। उनमें बुजुर्गो की तरह कमर दर्द, पीठ दर्द और घुटनों के दर्द समेत तमाम बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। एनसीआर के 83 फीसद बच्चों में हड्डियां कमजोर मिली हैं। स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूली बच्चे सर्वाधिक हाई रिस्क जोन में हैं।

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    हड्डी रोग विशेषज्ञों की रिपोर्ट के मुताबिक, मेरठ में 50 फीसद स्कूली बच्चों में मोटापे की बीमारी मिली। शरीर का वजन ज्यादा होने और हड्डियों पर दबाव बढ़ने से कमर एवं घुटनों का दर्द बढ़ रहा है। फास्टफूड ज्यादा लेने से जहां बच्चों में मोटापा एवं कोलेस्ट्राल खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है, वहीं कोल्ड ड्रिंक समेत कीटनाशक युक्त खानपान से हड्डियों में खोखलापन बढ़ा है। खेलकूद से दूर रहने, एक स्थान पर काफी देर तक बैठने, चीनी एवं नमक की मात्रा ज्यादा लेने से भी स्कूली बच्चों की हड्डियां फ्रैक्चर के रिस्क जोन में पहुंच गई हैं। शोध में पता चला है कि खाद्य पदार्थो में मिले तमाम रसायनों से भी घुटने जल्दी खराब हो रहे हैं।

    धूप से दूरी भी खतरनाक

    शहरी क्षेत्रों में बच्चों में आस्टियोपुरोसिस जैसे लक्षण तेजी से उभर रहे हैं। सूरज की धूप के संपर्क में आने पर स्किन विटामिन-डी का अवशोषण करती है, जो शरीर में कैल्शियम बढ़ाता है। किंतु वातानुकूलित रहन-सहन व हमेशा कपड़ों में ढंके शरीर में विटामिन डी की न्यूनतम मात्रा भी नहीं पहुंचती, जिससे बच्चों की हड्डियां चरमराने लगती हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, दिसंबर की धूप में सप्ताहभर में शरीर में धूप के माध्यम से 24 नैनोग्राम विटामिन डी पहुंचनी चाहिए, किंतु मेरठ समेत एनसीआर में यह छह नैनोग्राम से भी कम पाई गई। बच्चों में शुगर एवं थायरायड की बीमारी बढ़ने से भी उनकी हड्डियां इस नाजुक उम्र में भी जवाब दे रही हैं। रोजमर्रा के खानपान में दूध गायब होने से शरीर में प्राकृतिक स्रोतों से पहुंचने वाले कैल्शियम की कमी हो गई है। मेरठ में गहरी धुंध, जाड़े में स्मॉग, वायु प्रदूषण एवं उच्च रक्तचाप की बीमारी भी अप्रत्यक्ष रूप से हड्डियों को कमजोर करती है।

    क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    बच्चों में बढ़ता मोटापा हड्डियों पर दबाव बना रहा है। 83 फीसद बच्चों में विटामिन डी की कमी है। जोड़ों में दर्द, घुटनों में दर्द, बैकपेन जैसी बीमारियां इस उम्र में खतरनाक संकेत हैं। बिना परामर्श ज्यादा कैल्शियम न खाएं, अन्यथा रक्त में जमा होकर हार्ट की बीमारी बना सकता है। खूब खेलें, और बैलेंस खानपान रखें।

    डा. सुनील डागर, विशेषज्ञ, हड्डी रोग

    बच्चों में फास्टफूड की लत, लाइफस्टाइल, शुगर, थायरायड एवं वसायुक्त खानपान से भी हड्डियों पर खतरा है। बच्चों की औसत लंबाई में कमी आने के साथ ही हड्डियां जल्दी फ्रैक्चर हो रही हैं। प्रोटीन एवं कैल्शियम युक्त खानपान बढ़ाएं। खेलकूद से हड्डियों की डेंसटी बढ़ेगी।

    डा. अतुल रस्तोगी, विशेषज्ञ, हड्डी रोग।